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AK-203 के लिए भारत में बनेगा गोला-बारूद, अडानी डिफेंस ने इंडो-रशियन कंपनी से किया 5 साल का करार

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Digital Desk
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📍 भोपाल
AK-203 के लिए भारत में बनेगा गोला-बारूद, अडानी डिफेंस ने इंडो-रशियन कंपनी से किया 5 साल का करार

7 सितंबर 2026। भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत-रूस संयुक्त उद्यम इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के साथ पांच साल का समझौता किया है। इसके तहत अडानी डिफेंस भारतीय सेना के लिए तैयार की जा रही AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए भारत में निर्मित 7.62x39 मिमी गोला-बारूद की आपूर्ति करेगी।

भारत में ही बनेगी राइफल और उसकी गोलियां
इस समझौते की खास बात यह है कि AK-203 राइफल और उसके लिए जरूरी गोला-बारूद, दोनों की आपूर्ति श्रृंखला में भारतीय उत्पादन की भूमिका बढ़ रही है। IRRPL उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा स्थित संयंत्र में AK-203 राइफलों का निर्माण कर रही है, जबकि अडानी डिफेंस कानपुर स्थित अपनी सुविधा में छोटे कैलिबर का गोला-बारूद बनाती है।

कंपनी के अनुसार, पांच साल का यह करार AK-203 कार्यक्रम के लिए गोला-बारूद की निरंतर घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगा। समझौते की कुल वित्तीय कीमत, गोला-बारूद की मात्रा और डिलीवरी शेड्यूल सार्वजनिक नहीं किया गया है।

6 लाख से ज्यादा AK-203 बनाने का लक्ष्य
भारत और रूस के बीच अंतर-सरकारी समझौते के तहत 2019 में IRRPL की स्थापना की गई थी। इसके भारतीय साझेदारों में एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड शामिल हैं, जबकि रूसी पक्ष से कलाश्निकोव कंसर्न और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट जुड़े हैं।

दिसंबर 2021 में रक्षा मंत्रालय ने IRRPL के साथ 6,01,427 AK-203 राइफलों के निर्माण का करार किया था। इन राइफलों का निर्माण उत्तर प्रदेश के कोरवा संयंत्र में किया जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, संयंत्र से लगभग 70,000 AK-203 राइफलें सुरक्षा बलों को दी जा चुकी हैं।

'शेर' के जरिए 100 फीसदी स्वदेशीकरण की ओर कदम
AK-203 कार्यक्रम में भारत में स्थानीयकरण लगातार बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में भारत में पूरी तरह भारतीय कलपुर्जों और इनपुट सामग्री से तैयार AK-203 का निर्माण और परीक्षण भी किया गया। इस स्वदेशी संस्करण को 'शेर' नाम दिया गया है।

इससे AK-203 कार्यक्रम केवल भारत में राइफल असेंबल करने तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि इसके अलग-अलग हिस्सों और अब गोला-बारूद की घरेलू आपूर्ति को भी इससे जोड़ा जा रहा है।

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
अडानी डिफेंस और IRRPL के बीच हुआ यह समझौता भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर राइफल और गोला-बारूद दोनों के उत्पादन से विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने और देश में एकीकृत रक्षा आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है।

AK-203 मूल रूप से रूस की कलाश्निकोव डिजाइन पर आधारित राइफल है, लेकिन भारत में इसके उत्पादन में लगातार स्वदेशी सामग्री और तकनीकी भागीदारी बढ़ाई जा रही है। नए समझौते के साथ अब इस हथियार प्रणाली के लिए गोला-बारूद की घरेलू आपूर्ति भी भारतीय रक्षा औद्योगिक ढांचे का हिस्सा बन गई है।

कुल मिलाकर, यह करार भारत-रूस रक्षा सहयोग को खत्म करने के बजाय उसे अधिक स्थानीय और भारतीय उत्पादन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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