🔴 TRENDING NOW!
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह में बी-आह मुख्यालय का किया दौरा, वेस्ट मैनेजमेंट सहित कई विषयों पर हुआ मंथन बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन से की भेंट, एमपी में बड़े निवेश की संभावना भारत की रक्षा ताकत को बड़ा बूस्ट, ₹1.10 लाख करोड़ की सैन्य खरीद को मंजूरी वो बंदूक से नहीं डॉक्टर की सुई से डरते हैं, एंबुलेंस को मौत की गाड़ी समझते हैं “नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट में विकास की नई चुनौती” अवैध शराब के कारोबार पर लगेगी पूरी तरह रोक: डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा क्वांटम एंटैंगलमेंट को बचाने में भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, सही समय पर एक ‘फ्लिप’ से टलेगा नुकसान टैगोर नाट्य महोत्सव के पहले दिन गूंजा टैगोर का संगीत और रंगमंच, संतोष चौबे ने कहा- विश्व प्रेम और मानवीय चेतना टैगोर के चिंतन का आधार मध्य प्रदेश ने प्रमुख गैर-CO₂ प्रदूषकों में कमी के लिए रोडमैप जारी किया

ब्रह्मोस ब्लॉक-3 का लगातार सफल परीक्षण

👤
DD
👁 19829 व्यूज
📍 Bhopal
ब्रह्मोस ब्लॉक-3 का लगातार सफल परीक्षण
दक्षिण पश्चिमी कमान 'सट्राइक वन' ने भूमि पर प्रहार करने वाली क्रूज़ मिसाइल प्रणाली से युक्त अत्याधुनिक ब्रह्मोस ब्लॉक ? 3 का बुधवार 03 मई 2017 को अंडमान निकोबार में लगातार दूसरे दिन सफल परीक्षण किया। लगातार सफलतम परीक्षण ने दुर्जेय हथियारों से मार करने की क्षमता को और मज़बूत किया है। 02 मई 2017 को इसी स्थान से लंबी-दूरी तक मार करने वाले सामरिक हथियारों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था।



सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों का ये सफलतापूर्वक परीक्षण, मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर्स से पूर्ण परिचालन अवस्था में भूमि-से-भूमि पर मार करने वाली मिसाइल के रूप में अपनी पूर्ण क्षमता के साथ किया गया। उच्च स्तर और जटिल युद्धाभ्यासों को आयोजित करते समय कॉपीबुक तरीके से सभी उड़ान मापदंडों को पूरा करते हुए, बहु भूमिका वाली मिसाइल ने भूमि आधारित निर्धारित लक्ष्य पर वांछित सटीकता के साथ सफलतापूर्वक हमला किया। दोनों ही परीक्षणों के दौरान लक्ष्य पर हमले करने के मामले में मिसाइल की सटीकता एक मीटर से भी कम रही।



यह लगातार पांचवां मौका है, जब ब्रह्मोस के ब्लॉक-3 संस्करण का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है और भूमि पर हमला करने के मामले में इसकी श्रेणी के किसी अन्य हथियार ने अभी तक यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल नहीं की है। वर्ष 2007 में ब्रह्मोस को अपनाने वाली दुनिया की पहली थल सेना की उपलब्धि पाने वाली भारतीय सेना इस दुर्जेय हथियार की कई अन्य श्रेणियों को विकसित कर चुकी है। इस मिसाइल को संयुक्त रूप से भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओएम द्वारा विकसित किया गया है।



Tags :