🔴 TRENDING NOW!
ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी भारत की अगली रक्षा लड़ाई सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमानों से नहीं, AI और Cyber Security से भी होगी हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा ने ‘यारी की नई वाइब’ के साथ यारी को दिया नया अंदाज़ कूनो फिर हुआ गुलजार, मादा चीता केजीपी12 के परिवार में आए चार नन्हे शावक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत के सरकारी और रक्षा संस्थानों पर साइबर खतरा, APT36 के नए Malware अभियान से अलर्ट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत, स्वामित्व अधिकार योजना के तहत 50 लाख संपत्तियों की होगी फ्री रजिस्ट्री

आखिर आर्मी अपने कुत्तो को रिटायरमेंट के बाद मार क्यों देती है

👤
DD
👁 27754 व्यूज
📍 Bhopal
आखिर आर्मी अपने कुत्तो को रिटायरमेंट के बाद मार क्यों देती है
सेना के कुत्तों को भारतीय सेना में सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जाता है। आर्मी डॉग्स भी अपनी खासियत के कारण देश की सेवा में तत्पर रहते हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह एक सैनिक देश की सेवा करता है!



लेकिन इन कुत्तों के बारे में आपको एक जानकारी अब तक शायद पता न हो। कि सेना के इन कुत्तों को तभी तक जीवित रखा जाता है । जब तक ये सेना का काम कर रहे होते हैं। जब ये कुत्ते काम के नहीं रहते या इन्हें रिटायरमेंट दिया जाता है। इसके बाद इन्हें जहर देकर मार दिया जाता है।

आपको बता दें कि सेना के इन कुत्तों को रिटायरमेंट के बाद मारे जाने का चलन अंग्रेजों के शासन काल से चला आ रहा है। जो आज भी कायम है। कहा जाता है कि जब कोई डॉग एक महीने से अधिक समय तक बीमार रहता है ।या ड्यूटी नहीं कर पाता है। तो उसे जहर देकर मार दिया जाता है। इसके पहले पूरे सम्मान के साथ उसकी विदाई की जाती है।

हालांकि इन कुत्तों को जान से मारे जाने के पीछे दो तर्क दिए गए हैं-



पहला- तर्क ।उन्हें सेना के बेस लोकेशन्स और कैम्प्स की पूरी जानकारी होती है। साथ ही, वे अन्य गुप्त जानकारियां भी रखते हैं। ऐसे में यदि उन्हें आम लोगों को सौंपा जाता है। तो यह सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।



दूसरा- तर्क

यदि इन कुत्तों को एनिमल वेलफेयर सोसाइटी या किन्हीं निजी हाथों में दिया जाता है। तो वे उस कुत्ते को वैसी सुविधाएं नहीं दे सकते ।जो उन्हें सेना में मिलती है। सेना में कुत्तों को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं।

लेकिन अब केंद्र सरकार की एक समिति इस बाबत विचार विमर्श कर रही है और ऐसी नीति तैयार करने का प्रयास कर रही है। जिससे कि रिटायरमेंट के बाद इन्हें मारा नहीं जाए।
Tags :