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मप्र सरकार ने विदेशी शराब के निर्यात में की कड़ाई

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📍 Bhopal
मप्र सरकार ने विदेशी शराब के निर्यात में की कड़ाई
20 जुलाई 2017। मध्यप्रदेश सरकार ने शराब उत्पादक कारोबारियों को निर्यात में कड़ाई कर दी है। अब उन्हें निर्यात के बाद आयताकत्र्ता से सत्यापन रिपोर्ट लेकर निर्यात का लायसेंस देने वाले आबकारी कार्यालय को देने के लिये समय-सीमा कर दी गई है।



दरअसल राज्य सरकार ने मप्र विदेशी मदिरा नियम 1996 के तहत 29 सितम्बर 2010 में प्रावधान किया था कि निर्यातकत्र्ता, आयात करने वाली इकाई के भारसाधक अधिकारी से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त करेगा कि उसे माल मिल गया और यह सत्यापन रिपोर्ट निर्यात की लायसेंस अवधि खत्म होने की समाप्ति के 40 दिन के भीतर निर्यात का लायसेंस देने वाले अधिकारी को सौंपेगा। लेकिन सात साल बाद इस प्रावधान को बदल दिया गया है। अब प्रावधान किया गया है कि निर्यातकत्र्ता, आयात करने वाली इकाई के भारसाधक अधिकारी से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त करेगा और इस सत्यापन रिपोर्ट को निर्यात करने की लायसेंस अवधि समाप्त होने के 90 दिन के भीतर पूर्वोत्तर राज्यों के एवं 60 दिन के भीतर अन्य राज्यों के लिये, निर्यात का लायसेंस देने वाले अधिकारी को प्रस्तुत करेगा।



यदि निर्यात का लायसेंस देने वाले अधिकारी को यह सत्यापन रिपोर्ट उक्त नवीन समयावधि में नहीं सौंपी जाती है तो निर्यात की गई विदेशी मदिरा पर उदग्रहणीय शुल्क जमा राशि, बैंक गारंटी या निष्पादित किये गये बंधपत्र से वसूल किया जायेगा। यदि निर्यात का लायसेंस देने वाले अधिकारी को सत्यापन रिपोर्ट लायसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद दी जाती है और इस बीच उसने निर्यात किये गये माल को गंतव्य पर पहुंचने के पहले जब्त कर लिया गया है, तो इस पर उदग्रहणीय शुल्क नहीं वसूल किया जायेगा।



मदिरा वेस्टेज भी कम की :

राज्य सरकार ने शराब के भण्डारण एवं परिवहन में होने वाली छीजन यानी वेस्टेज में भी कमी कर दी है। यह वेस्टेज रखरखाव के दौरान शराब के वाष्पीकरण या उसके परिवहन के दौरान बोतलों आदि की टूट-फूट से होती है। इससे वेस्टेज पर आबकारी शुल्क नहीं लगाया जाता है।



अब शराब में उपयोग होने वाली स्प्रिट का ड्रमों में ढाई सौ किलोमीटर दूरी तक परिवहन करने पर वेस्टेज 0.5 प्रतिशत, ढाई सौ किलोमीटर से अधिक किन्तु 500 किलोमीटर तक परिवहन पर छीजन 0.75 प्रतिशत तथा 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक परिवहन पर 1 प्रतिशत छीजन स्वीकृत की जायेगी। इसी प्रकार, टैंकरों से स्प्रिट के परिवहन पर ढाई सौ किलोमीटर दूरी तक 0.5 प्रतिशत तथा इससे अधिक दूरी हेतु 1 प्रतिशत छीजन स्वीकृत की जायेगी।



इसी प्रकार देशी मदिरा का बोतल भराई इकाई से गोदाम तक परिवहन पर कांच की बोतलों के लिये 0.5 प्रतिशत तथा पैट बोतलों के लिये 0.25 प्रतिशत छीजन मंजूर की जायेगी। देशी मदिरा के निर्यात पर छीलजन 0.5 प्रतिशत हो सकेगी। गोदाम के अंदर देशी मदिरा के भण्डारण पर कांच की बोतलों हेतु 0.25 प्रतिशत तथा पैट बोतलों हेतु 0.1 प्रतिशत वेस्टेज स्वीकृत किया जायेगा।



इसी प्रकार भण्डारण में विदेशी मदिरा की पैट की बोतलों हेतु 0.1 प्रतिशत तथा कांच की बोतलों हेतु 0.25 प्रतिशत, बीयर/वाईन के अंतर्गत केन बोतलों हेतु 0.25 प्रतिशत तथा कांच की बोतलों हेतु 0.50 प्रतिशत छीजन मंजूर की जायेगी। विदेशी मदिरा के निर्यात पर छीजन 0.5 प्रतिशत दी जायेगी। क्रेता एवं विक्रेता लायसेंसधारी एक ही जिले के होने की स्थिति में बोतलों में भरी विदेशी मदिरा के समस्त परिवहन में छीजन 0.25 प्रतिशत दी जायेगी और यदि जिले अलग-अलग होने पर छीजन 0.5 प्रतिशत ही स्वीकृत की जायेगी।

इसके अलावा बोतलों में भरी बियर या वाईन के निर्यात पर छीजन 0.75 प्रतिशत दी जायेगी। बियर एवं वाईन के क्रेता एवं विक्रेता लायसेंसधारी एक ही जिले के होने पर छीजन 0.5 प्रतिशत तथा अलग-अलग जिले के होने पर 0.75 प्रतिशत छीजन स्वीकृत की जायेगी।



विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन रिपोर्ट जमा करने की समयावधि बढ़ाई गई है जबकि छीजन का दुरुपयोग रोकने के लिये इसके प्रतिशत में कमी की गई है क्योंकि छीजन दिखाकर मदिरा का उपयोग किया जा रहा था।





- डॉ नवीन जोशी
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