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अस्थमा पर जागरूकता बढ़ाने और सही उपचार को अपनाने की जरूरत

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Digital Desk
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📍 Bhopal
अस्थमा पर जागरूकता बढ़ाने और सही उपचार को अपनाने की जरूरत
भोपाल में अस्थमा से पीड़ित 10 में से 7 लोग इनहेलेशन थेरैपी नहीं लेते हैं, यह बड़ी चिंता का विषय है



केओएल (भोपाल) में अस्थमा से पीड़ित केवल 15 प्रतिशत (एक तिहाई) लोगों के पास ही उपचार की योजना है



2 नवंबर 2018। अस्थमा एक पुरानी बीमारी है जो अमूमन फेफड़ों तक ऑक्सीजन ले जाने वाली वायु नलिकाओं में सूजन और संकुचन पैदा करती है और जिसकी स्थिति समय के साथ भिन्न भी हो सकती है। यह अनुमान लगाया गया है कि भोपाल में, स्थानीय डॉक्टरों को दैनिक आधार पर अस्थमा/श्वसन तंत्र संबंधी रोगों से पीड़ित लगभग 40 रोगियों को देखना पड़ता है।



बच्‍चों में भी वर्ष दर वर्ष अस्‍थमा में उल्‍लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है (डॉक्टरों का मानना है कि वे हर महीने अस्थमा से पीड़ित बच्चों के अनुमानित 25-30 नए मामले देखते हैं)। 2018 में अभी तक औसतन, भोपाल ने पिछले साल की तुलना में अस्थमा से पीड़ित लोगों की संख्या में 25% की वृद्धि देखी, जबकि भोपाल की लगभग एक-तिहाई आबादी में कुछ समय से अस्थमा का विकास तेजी से हो रहा है और ज्यादातर ये मामले 20 साल से कम उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं । इस बीच विगत कुछ वर्षों में इनहेलेशन थेरैपी का उपयोग करने वाले रोगियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन 75 प्रतिशत रोगी इनहेलर का उपयोग बंद कर देते हैं।



भोपाल में अस्थमा की मौजूदगी के प्रमुख कारणों में वायु प्रदूषण प्रमुख है, जो वायु में पार्टिकुलेट मैटर, परागकणों और धूम्रपान में बढ़ोतरी के कारण होता है। इसके अलावा खाने-पीने की आदतें, पोषण की कमी, वंशानुगत और माता-पिता के बीच काफी हद तक लापरवाही इत्यादि भी इसके प्रमुख कारण हैं। इन्हीं सब वजहों से खासकर भोपाल में भी फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियों का प्रतिशत बढ़ा है।



अस्थमा पर जागरूकता की कमी और रोगी में सुधार के लिए सही उपचार को अपनाने लिए एक मल्‍टीमीडिया जागरुकता कैंपेन #BerokZindagi शुरू किया गया है। यह कैंपेन अस्थमा के बारे में मिथकों और भय को दूर करने और इस स्थिति से प्रभावित लोगों को बिना किसी पाबंदी के जिंदगी जीने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस बीमारी से निपटने के लिए सबसे अच्छे विकल्प के रूप में इनहेलेशन थेरेपी को स्थापित करने का प्रयास करते हुये, यह मल्‍टी-चैनल पहल अस्थमा से प्रभावित लोगों और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के लिए सूचना और संसाधन भी प्रदान करेगी। इस अभियान का उद्देश्य इनहेलेशन थेरेपी से सम्बंधित कलंक को खत्म करना और इसे सामाजिक रूप से अधिक स्वीकार्य बनाना है जिससे मरीजों और उनके चिकित्सकों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।



इस कैंपेन ने बॉलीवुड की ग्‍लोबल आइकन और स्वयं अस्थमा से पीड़ित प्रियंका चोपड़ा के साथ सहक्रियात्‍मक साझेदारी की है। वे अस्‍थमा को लेकर जागरुकता बढ़ायेंगी और इस स्थिति से जुड़े कलंक को दूर करने में मदद करेंगी। यह उन प्रमुख कारकों में से एक है जो मरीजों की उत्‍कंठा एवं इनकार, देर से डायग्‍नोस कराने और सबके सामने इनहेलर के प्रयोग से बचने के लिए जिम्‍मेदार है।



भोपाल में अस्‍थमा की घटनाओं के बारे में बात करते हुये चेस्‍ट फिजिशियन डॉ. आशीष दुबे (Dr. Ashish Dubey, Chest Physician, Anamaya Chest Center) ने कहा, "पिछले कुछ सालों की तुलना में, बच्‍चों और मध्‍यम आयु वाले लोगों में अस्‍थमा बढ़ा है। कारों एवं अन्‍य ऑटोमोबाइल्‍स द्वारा होने वाला प्रदूषण के साथ ही प्रॉपर्टीज के निर्माण के कारण प्राकृतिक हैबिटैट में कमी की उल्‍लेखनीय मात्रा अस्‍थमा के बढ़ते मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। बच्‍चे इसे लेकर सबसे अधिक संवेदनशील हैं, पर वे इनहेलेशन थेरैपी अपनाने को लेकर बहुत लोचशील भी होते हैं। भोपाल में लोगों से बात करने पर पता चला कि वे बेहतर शिक्षा और जागरुकता के कारणदूसरे मेट्रो शहरों के मुकाबले अधिक जागरुक हैं।"







भोपाल के प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. यादव कहते हैं (Dr. R.K Yadav, Paediatrician, V Care Children Hospital) "अस्‍थमा बच्‍चों में क्रॉनिक बीमारियों का प्रमुख कारण है और भोपाल में पिछले कुछ सालों में इसमें बढ़ोतरी हुई है। मरीज अब अधिक जागरुक हो रहे हैं और पिछले कुछ वर्षों की तुलना में वे इनहेलेशन थेरैपी कोअपना रहे हैं। बच्‍चों में एयरवेज छोटे होते हैं, और जब वे परागकणों, धूल और प्रदूषण के संपर्क में आते हैं, तो संकुचित हो जाते हैं,जिससे उनमें अस्‍थमा की मौजूदगी अधिक होती है। इनहेलेशन थेरैपी शुरू करने के बाद, लगभग 40 प्रतिशत मरीज इनहेलर का इस्‍तेमाल करने से जुड़े मिथकों के कारण इसे बीच में ही बंद कर देते हैं।"



विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में 15 से 20 मिलियन लोगों को अस्थमा है और 5 से 11 वर्ष के 10 से 15 प्रतिशत बच्चे इससे पीड़ित हैं। #BerokZindagi का लक्ष्य खुलकर सांस लेने में लोगों की मदद करना है और इसलिये यह अभियान अस्थमा से पीड़ित लोगों को इनहेलेशन थेरैपी लेने के लिये प्रोत्साहित करेगा। इस रोग को लेकर शर्माने से जिन्दगी बेहतर नहीं होगी, बल्कि इसे स्वीकार करने से लाभ होगा। अस्थमा का उपचार दवाओं से किया जा सकता है, लेकिन सही उपचार के बिना यह बार-बार हमला कर सकता है।



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