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EVM ने अर्ज़ किया हैँ

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prativad
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📍 भोपाल
EVM ने अर्ज़ किया हैँ
बैबफाई तो फ़ितरत हमारी हैँ
तुम्हारी हस्ती मिटे या मिट जायें लोकतंत्र,
मुझे लाने की ख़ता, भी तो तुम्हारी हैँ

सोशल एक्टिविस्ट डॉ. महेश यादव ने मुख्य चुनाव आयोग के देश में निष्पक्ष चुनाव और EVM को 100% विश्वसनीय बताने वाले वयान को देश व लोकतंत्र के लिए घातक वताया हैँ और देश में निष्पक्ष चुनाव के लिए मतपत्र से चुनाव की मांग करने व EVM का विरोध करने वाली आम जनता व पार्टियों का शेर और शायरी के माध्यम से मज़ाक उड़ाने अफ़सोस जताया हैँ और कहा हैँ की दुनियां का सबसे बड़े लोकतंत्र में जनता को ही यह अधिकार नहीं दिया जा रहा की वह संविधानिक तरीके से मतपत्र द्वारा अपने जन प्रतिनिधिओं का चुनाव कर सके उन्होंने कहा हैँ की EVM से मत Fake जनमत हैँ!

EVM के नाम पर मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार के शेर के जवाब में सोशल एक्टिविस्ट डॉ. महेश यादव ने एक कविता लिखी जो EVM यानि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के क्रिया कालापो व उसकी मूल भावना को दर्शाती हैँ जो इस प्रकार हैँ

EVM ने अर्ज़ किया हैँ -

बेवफाई मेरे खून में हैँ, कई देशों से भागकर आई हूँ
EVM हैँ नाम मेरा, लोकतंत्र मिटाने आई हूँ

वफ़ा की हसरतें, मत रखना, विदेशी नागिन की मैं बेटी हूँ
तुम्हारी आज़ादी, डसने को,कुंडली मार कर बैठी हूँ

वोट लुटेरे, आशिक हैँ मेरे, लोकतंत्र के, यह हत्यारें
मेरी वफ़ा, बस इनसे हैँ,लगते मुझको,यह प्यारे

कई देशों ने, मुझे भगाया, फिर तुमने, क्यों अपनाया
मेरी इसमें, क्या ख़ता हैँ, मुकद्दर अपना, खुद फुटवाया

मुझे तोड़ दो या फोड़ दो, मैं फिर भी,नहीं जाउंगी
नमक हरामों का, नमक खाया हैँ, मैं गीत उन्हीं के गाऊँगी

मेरे आका जो कहेँगे, करके वो दिख लाऊंगी
जहाँ जहाँ हारेंगे वो, मैं जीत उन्हें दिलाऊँगी


बैवफाई करना, फ़ितरत हमारी हैँ, अधूरी हसरतों का इल्ज़ाम, ठीक नहीं
तुम्हारी हस्ती मिटे या मिट जायें लोकतंत्र, मुझे लाने की ख़ता, भी तो तुम्हारी हैँ

किसे हरा दूँ किसे जिता दूँ, मैं सत्ता हिलाने आई हूँ
EVM के भेष में, डायन हूँ, तुम्हारा भविष्य, खाने मैं आई हूँ

देश तुम्हारा सबसे अच्छा, लोकतंत्र बैमिशाल हैँ
अभी वक्त हैँ, जाग भी जाओ, अब संविधान पर ही सवाल हैँ

लेखक - डॉ. महेश यादव

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