🔴 TRENDING NOW!
भारत की अगली रक्षा लड़ाई सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमानों से नहीं, AI और Cyber Security से भी होगी हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा ने ‘यारी की नई वाइब’ के साथ यारी को दिया नया अंदाज़ कूनो फिर हुआ गुलजार, मादा चीता केजीपी12 के परिवार में आए चार नन्हे शावक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत के सरकारी और रक्षा संस्थानों पर साइबर खतरा, APT36 के नए Malware अभियान से अलर्ट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत, स्वामित्व अधिकार योजना के तहत 50 लाख संपत्तियों की होगी फ्री रजिस्ट्री BRICS समिट से पहले बम धमकियों में 5 लाख Gmail अकाउंट्स का इस्तेमाल, Google से जवाब मांगेगा भारत एआई के दौर में मौलिक अभिव्यक्ति और भाषाई संवेदना को बचाए रखना जरूरी : प्रो. संजय द्विवेदी सीएम डॉ. मोहन यादव ने कई अहम फैसलों पर लगाई मुहर, 42 हजार 490 करोड़ रुपये से होगा राज्य का विकास अमेरिका ने माना, अंतरिक्ष में तैनात हैं उसके स्पेस हथियार

दक्षिण पूर्व एशिया में हजारों भारतीय 'साइबर गुलाम' के रूप में फंसे: रिपोर्ट

👤
prativad
👁 5220 व्यूज
📍 भोपाल
दक्षिण पूर्व एशिया में हजारों भारतीय 'साइबर गुलाम' के रूप में फंसे: रिपोर्ट
1 अक्टूबर 2024। भारत सरकार दक्षिण पूर्व एशिया में फंसे उन भारतीय नागरिकों की पहचान कर रही है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और "डेटिंग स्कैम" जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल किए जा रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि हजारों भारतीय विभिन्न दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में फंसे हुए हैं, जहां उन्हें 'साइबर गुलाम' के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

कथित तौर पर इन लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग, क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी और कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार और वियतनाम जैसे देशों में 'डेटिंग या लव स्कैम' में धकेला जा रहा है। भारतीय आव्रजन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2024 तक इन देशों में यात्री वीजा पर गए 73,138 भारतीयों में से लगभग 30,000 अभी तक अपने वतन वापस नहीं लौटे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि भारत के विभिन्न राज्यों से लोगों को धोखेबाज गिरोह फंसाकर उन सोशल मीडिया अकाउंट्स का उपयोग करने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिनमें अक्सर महिलाओं की फर्जी तस्वीरें इस्तेमाल की जाती हैं। इन अकाउंट्स के जरिए लोगों को पैसा निवेश करने के लिए धोखे से फंसाया जाता है। इस साल की शुरुआत में, भारतीय सरकार ने कुछ फंसे हुए पुरुषों को बचाया, जिनमें से कई ने बताया कि एजेंटों ने उन्हें आकर्षक नौकरियों का झांसा देकर इन देशों में भेजा, जहां पहुंचने पर उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए।

फंसे हुए भारतीयों में ज्यादातर 20 से 30 वर्ष के युवा हैं, जिनमें एक तिहाई से अधिक पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग वापस नहीं लौटे हैं, उनमें से लगभग 70% थाईलैंड गए थे।

इस गंभीर समस्या पर देश का ध्यान तब गया, जब पिछले साल ओडिशा पुलिस ने कंबोडिया से जुड़े एक साइबर अपराध सिंडिकेट पर कार्रवाई की थी। एनडीटीवी के अनुसार, एक सरकारी कर्मचारी ने इस साइबर धोखाधड़ी की जानकारी दी थी, जिसके बाद कई लोगों को बचाया गया।

अप्रैल में, भारत सरकार ने कंबोडिया से 250 भारतीय नागरिकों को बचाने की घोषणा की, जो साइबर गिरोहों द्वारा धोखाधड़ी योजनाओं में फंसाए गए थे। इसके बाद मई में, नई दिल्ली ने इस मुद्दे से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयीय पैनल का गठन किया। इस पैनल का उद्देश्य सिस्टम की खामियों की पहचान करना और फंसे हुए भारतीयों की सही जानकारी जुटाना है।

इसके साथ ही, दूरसंचार ऑपरेटरों को भी हांगकांग, कंबोडिया, लाओस, फिलीपींस और म्यांमार में भारतीय मोबाइल नंबरों की रोमिंग सेवाओं के डेटा साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय "स्पूफ्ड कॉल्स" को रोकने के लिए भी दूरसंचार कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि ये कॉल भारत में आने वाले कुल अंतर्राष्ट्रीय संचार का 35% हिस्सा हैं।

सरकार इस समस्या को हल करने के लिए गंभीरता से कदम उठा रही है ताकि भारतीय नागरिकों को इस खतरनाक जाल से मुक्त कराया जा सके।
Tags :