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भोपाल : जेल से फरार कैदियों के एनकाउंटर के बाद वीडियो ने उठाए पुलिस पर सवाल

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Digital Desk
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📍 Bhopal
भोपाल : जेल से फरार कैदियों के एनकाउंटर के बाद वीडियो ने उठाए पुलिस पर सवाल
दीवाली की रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल से प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के 8 संदिग्ध आतंकी फरार हो गए. इसके कुछ देर बाद ही सोमवार सुबह पुलिस ने एक एनकाउंटर में इन आठों को मार गिराया. लेकिन अब एनकाउंटर करने वाली पुलिस को तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है.



दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एनकाउंटर का एक वीडियो सामने आने के बाद जांच की मांग की है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक पुलिसकर्मी एक बेजान शरीर पर गोली दाग रहा है. इसके घंटों बाद के एक और वीडियो से लगता है कि जैसे आत्मसमर्पण के लिए तैयार फरार कैदियों को पुलिसकर्मियों ने मार गिराया.



इस वीडियो में दिखायी देता है कि कुछ ही दूरी पर संदिग्ध दिखाई देते हैं. एक आवाज आती है : कंट्रोल! ये पांचों लोग हमसे बात करना चाहते हैं. तीन भागने की कोशिश कर रहे हैं. चलो उन्हें घेर लो! इसके बाद गोलियों की आवाज आती है.



एनकाउंटर के फर्जी होने के आरोपों पर केजरीवाल ने ट्वीट किया, यह बहुत गंभीर है. हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हैं.



एक अन्य गैर सत्यापित मोबाइल वीडियो जिसे कथित रूप से एक गांव वाले ने उस वक्त फिल्माया जब पुलिस संदिग्ध आतंकियों के शरीरों की जांच कर रही है, इसमें एक पुलिसवाला साफ तौर पर एक मरे हुए व्यक्ति पर गोलियां चलाता दिख रहा है, जिसके ठीक पहले उस पुलिसवाले का एक साथी एक अन्य शव की बेल्ट से स्टील प्लेट जैसी कोई चीज निकालता नजर आ रहा है. जब पुलिस वाले को दूसरे शव पर गोलियां दागने को कहा जाता है तो उसे यह कहते हुए इनकार करते सुना जा सकता है कि इसे फिल्माया जा रहा है.



भोपाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी योगेश चौधरी ने कहा, हम वीडियो फुटेज की प्रमाणिकता की जांच करेंगे. पुलिस ने बताया कि उन्हें जवाबी फायरिंग करने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि जब भगोड़ों को घेर लिया गया तो उन्होंने गोली चलनी शुरू कर दी. ये घटना भोपाल सेंट्रल जेल, जहां से ये लोग फरार हुए थे, से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर हुई. चौधरी ने बताया कि पुलिस ने उनके पास से चार हथियार बरामद किए हैं.



हालांकि राज्य के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने विरोधाभासी बयान देते हुए कहा कि संदिग्धों के पास कोई हथियार नहीं थे, उनके पास केवल जेल की वो प्लेटें थीं, जिससे उन्होंने गार्ड का गला रेत दिया और फरार हो गए.



उन्होंने कहा कि संदिग्धों ने पुलिस पर हमला करने और भागने की कोशिश की. पुलिस के पास उन्हें मारने के अलावा कोई चारा नहीं था.



चादरों को एक-दूसरे से बांधकर जेल की दीवार चढ़कर फरार होने के कुछ ही घंटों बाद आठों कैदियों को पुलिस द्वारा मार गिराए जाने की सनसनीखेज खबर सामने आई.



सभी कैदियों पर आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने, देशद्रोह और डकैती के मामले चल रहे थे.



बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, वो लोग जघन्य अपराधों में लिप्त थे. पुलिस ने बहादुरी भरा काम किया है. क्या कांग्रेस और अन्य पार्टियों का सवाल उठाना जायज है?
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