🔴 TRENDING NOW!
प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर स्कोडा ऑटो इंडिया ने 350 से अधिक ग्राहक संपर्क केंद्रों का आंकड़ा पार किया, 193 शहरों तक पहुँच का विस्तार किया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निभाया वादा, हनुमान अंश फिल्म के बुंदेली गायक सुनील लोधी के आंखों का उपचार शुरू सीएम डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने लिए अहम फैसले, डेवलपमेंट-इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्वीकार किए 23 हजार 300 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए उप पुलिस अधीक्षकों को दिए कर्तव्य मंत्र, कहा- रील से ज्यादा रियल प्रॉब्लम करें सॉल्व सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- किसी की सगी नहीं हो सकती कांग्रेस AI की कमाई पर उठे सवाल, टेक शेयरों में 2 ट्रिलियन डॉलर की भारी गिरावट भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं, आयु सीमा पार कर रहे अभ्यर्थी उद्योग, रोजगार, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यटन और विरासत के संरक्षण में सबसे आगे मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ.यादव नीता अंबानी ने किया 'नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय' का भूमिपूजन, 5,000 से अधिक जरूरतमंदों को मिलेगा अपना घर

विधानसभा सत्र: दिनों के सत्र घंटों में, जनता की आवाज़ दबी?

👤
prativad
👁 1420 व्यूज
📍 भोपाल
विधानसभा सत्र: दिनों के सत्र घंटों में, जनता की आवाज़ दबी?
13 नवंबर 2024। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या यह सत्र पूरे पांच दिन चलेगा? पिछले कुछ वर्षों में विधानसभा सत्रों की अवधि लगातार घटती जा रही है। दिनों के सत्र घंटों में सिमट रहे हैं और जनता की समस्याओं पर सदन में गंभीर चर्चा नहीं हो पा रही है।

बजट बढ़ रहा, सत्र घट रहे
एक ओर जहां विधानसभा का बजट लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्रों की अवधि लगातार घट रही है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में एक दिन की विधानसभा बैठक पर लगभग 7 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन सत्रों की अवधि इतनी कम है कि आम लोगों की समस्याओं पर सदन में पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती।

विशेषज्ञों की राय
विधानसभा से जुड़े जानकारों का मानना है कि साल में कम से कम 60 दिन सत्र चलना चाहिए। लेकिन वर्तमान में यह अवधि 15-20 दिन ही रह गई है। इसका कारण यह है कि विधायकों को हर दिन का भत्ता मिलता है, जिसके कारण वे सत्रों की अवधि बढ़ाने के लिए उत्सुक नहीं होते हैं।

जनता की आवाज़ दबी
विधानसभा सत्रों की अवधि कम होने से जनता की आवाज़ दब रही है। विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाने में असमर्थ हैं। परिणामस्वरूप, जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

क्या है समाधान?
विधानसभा सत्रों की अवधि कम होने की समस्या का समाधान निकालना जरूरी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सत्रों की अवधि बढ़ाई जाए ताकि जनता की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जा सके। इसके अलावा, विधायकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लें।

सवाल यह है कि क्या आगामी शीतकालीन सत्र में यह स्थिति बदलेगी?
Tags :