भारत का हाई एंड्योरेंस ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल अपनी नौसेना को और अधिक निगरानी क्षमताओं से लैस करेगा
1 अप्रैल 2025। भारत ने नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) द्वारा विकसित अपने हाई एंड्योरेंस ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (HEAUV) के सफल परीक्षण की सोमवार को घोषणा की।
NTSL भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम में स्थित एक रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला है। HEAUV ने एक झील में परीक्षण किया, जिसमें कई बार परीक्षण के माध्यम से सतह और जलमग्न दोनों स्थितियों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। परीक्षण के स्थान का खुलासा नहीं किया गया।
ये मानवरहित अंडरवाटर रोबोट आकार में कुछ सौ से लेकर कई हज़ार पाउंड तक के होते हैं। वे समुद्र की सतह से गहराई तक और वापस जाने, या ब्लिंप या हेलीकॉप्टरों के समान तरीके से रुकने, मँडराते और आगे बढ़ने में सक्षम हैं।
HEAUV को उच्च सहनशक्ति के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे इसे बार-बार सतह पर आने या रिचार्ज करने की आवश्यकता के बिना लंबे समय तक संचालित किया जा सकता है। उद्योग पर नज़र रखने वालों के अनुसार, यह उन मिशनों के लिए ज़रूरी है, जिनमें समुद्र तल की मैपिंग, निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाना और समुद्र विज्ञान संबंधी अध्ययन जैसे लंबे समय तक पानी के भीतर संचालन की ज़रूरत होती है।
AUV पनडुब्बी रोधी युद्ध और अन्य पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए उन्नत सेंसर से लैस है।
HEAUV की उन्नत तकनीक और क्षमताएँ भारत के नौसैनिक अभियानों को बढ़ाएँगी, जिससे इस क्षेत्र में रणनीतिक लाभ मिलेगा। लंबी अवधि तक काम करने की अपनी क्षमता के साथ, HEAUV भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों का समर्थन करते हुए महत्वपूर्ण डेटा और खुफिया जानकारी एकत्र करने में सक्षम होगा।
HEAUV का विकास रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करने के प्रयासों का हिस्सा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमाग की उपज ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम जैसी पहलों के अनुरूप है। हाल ही में, भारतीय सेना ने 5,000 से ज़्यादा वस्तुओं को घरेलू उत्पादन के लिए ज़रूरी बताया है, और देश के भीतर उनके निर्माण को प्राथमिकता दी है।
