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मुख्यमंत्री की विनम्रता और संत के प्रति श्रद्धा बनी मिसाल

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📍 भोपाल
मुख्यमंत्री की विनम्रता और संत के प्रति श्रद्धा बनी मिसाल
8 अक्टूबर 2025। रेहटी (सीहोर) का उत्तम सेवा धाम इस बार शरद पूर्णिमा महोत्सव का साक्षी बना, जहां राजनीति और धर्म का सुंदर संगम देखने को मिला। मंच पर महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज अपने अनुयायियों व सेवाभावी जनों को संबोधित कर रहे थे, वहीं वर्चुअल स्क्रीन पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हाथ जोड़े नम्रता से जुड़े। यह क्षण इस बात का प्रतीक बन गया कि नेतृत्व का असली मूल्य केवल सत्ता में नहीं, बल्कि विनम्रता और सम्मान में है।

कार्यक्रम में अनुपस्थिति पर संवाद
मुख्यमंत्री व्यस्तता के कारण कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंच सके, लेकिन जैसे ही उन्हें महामंडलेश्वर के संदेश का पता चला, उन्होंने तत्काल वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपनी बात रखी। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के इच्छुक थे, पर परिस्थितियों ने रोका। उन्होंने कई बार हाथ जोड़कर कहा कि वे अगली बार स्वयं उपस्थित होकर सेवा धाम के कार्यों में सहभागिता करेंगे।

धर्म-राजनीति का सौहार्दपूर्ण संदेश
इस घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि मध्यप्रदेश में धार्मिक संस्थाओं और संतों का योगदान केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा के लिए भी अमूल्य है। मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मान व्यक्त करना, यह दर्शाता है कि राज्य की नेतृत्व व्यवस्था इन संस्थाओं के प्रयासों को सराहती है।

उत्तम स्वामी महाराज का प्रेरक आह्वान
महाराज उत्तम स्वामी के शब्द सेवा की प्राथमिकता को रेखांकित करते हैं—उन्होंने यह स्पष्ट किया कि समय और ध्यान का महत्व सेवा के कार्यों में सबसे अधिक है। उनके कथन ने सभी उपस्थित जनों को यह सोचने का अवसर दिया कि सेवा धाम द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों में सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

सकारात्मक राजनीतिक अर्थ
राजनीतिक दृष्टि से यह घटना मुख्यमंत्री की धार्मिक छवि को और सुदृढ़ करती है। मोहन यादव का यह विनम्र भाव उनकी अहंकार रहित नेतृत्व शैली का प्रमाण है। यह संवाद भविष्य में सरकार और धार्मिक-सामाजिक संस्थानों के बीच और भी मजबूत सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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