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सीआईए प्रमुख की चेतावनी: एआई आधारित साइबर हथियार बन सकते हैं 'डिजिटल परमाणु हथियार'

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 115

वॉशिंगटन 2 जुलाई 2026। अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) के निदेशक John Ratcliffe ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस साइबर हथियारों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि भविष्य में एआई आधारित साइबर हमले इतने शक्तिशाली हो सकते हैं कि उनकी तुलना "डिजिटल परमाणु हथियारों" से की जा सकती है। उन्होंने आगाह किया कि ऐसी तकनीक वैश्विक महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और साइबर संघर्ष को और तेज कर सकती है।

वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रौद्योगिकी सम्मेलन के दौरान रैटक्लिफ ने कहा कि एआई केवल तकनीकी विकास का साधन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया अभियानों की प्रकृति भी बदल रहा है। उनके अनुसार, अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देश लगातार अमेरिकी तकनीकी बढ़त हासिल करने और उसे अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।

साइबर युद्ध की समयसीमा अब वर्षों नहीं, महीनों की

रैटक्लिफ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब खुफिया साझेदारी Five Eyes पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि एआई के कारण साइबर युद्ध की क्षमताओं में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है। गठबंधन का आकलन है कि अगली पीढ़ी के एआई मॉडल आक्रामक और रक्षात्मक दोनों तरह की साइबर क्षमताओं को पूरी तरह बदल सकते हैं और इसके लिए वर्षों नहीं, बल्कि कुछ महीनों का समय लग सकता है।

इसी संदर्भ में अमेरिकी सीनेट की खुफिया समिति के वरिष्ठ सदस्य Mark Warner ने भी हाल ही में कहा था कि अत्याधुनिक एआई मॉडल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व क्षमता दिखा रहे हैं। उनके अनुसार, नियंत्रित परीक्षणों में कुछ एआई मॉडल जटिल सुरक्षा कमजोरियों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कर पा रहे हैं।

एआई की वैश्विक दौड़ में अमेरिका-चीन आमने-सामने

एआई तकनीक को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इस क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि इस निवेश की सफलता काफी हद तक वैश्विक तकनीकी नेतृत्व बनाए रखने पर निर्भर करेगी।

इस बीच चीन की एआई कंपनी DeepSeek ने अपने कम लागत वाले एआई मॉडल पेश कर वैश्विक उद्योग का ध्यान आकर्षित किया है। कंपनी के मॉडल प्रदर्शन के मामले में कई अमेरिकी एआई प्रणालियों के बराबर बताए गए, जिससे एआई बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई।

हाल ही में चीन की कंपनी Zhipu AI ने अपना नया कोडिंग असिस्टेंट मॉडल GLM-5.2 भी पेश किया, जिसे कई विशेषज्ञों ने ओपन-सोर्स एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

चिप्स और ऊर्जा भी बन रहे निर्णायक कारक

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की वैश्विक दौड़ केवल एल्गोरिद्म तक सीमित नहीं है। उन्नत माइक्रोचिप्स के निर्माण, विशाल डेटा सेंटर और पर्याप्त ऊर्जा संसाधन भी इस प्रतिस्पर्धा में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चीन सेमीकंडक्टर निर्माण और ऊर्जा उपलब्धता दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है, जिससे अमेरिका की तकनीकी बढ़त को चुनौती मिल सकती है।

एआई की संभावनाएं और चुनौतियां

हालांकि एआई ने कोडिंग, डेटा विश्लेषण और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्वायत्त ड्राइविंग जैसी कई तकनीकें अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी हैं। ऐसे में एआई को लेकर किए जा रहे दावों और वास्तविक क्षमताओं के बीच अंतर को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

एआई आधारित साइबर हथियारों को लेकर सीआईए प्रमुख की चेतावनी इस बात का संकेत है कि भविष्य की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा केवल पारंपरिक सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साइबर स्पेस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी वैश्विक शक्ति संतुलन के प्रमुख आधार बनेंगे।

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