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अब साइबर हमले के लिए इंसान की जरूरत नहीं? एआई एजेंट ने हगिंग फेस को बनाया निशाना

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 152

21 जुलाई 2025। हगिंग फेस ने इस साइबर हमले को अभूतपूर्व बताया है। कंपनी के मुताबिक, एक स्वायत्त एआई एजेंट ने कई सैंडबॉक्स में हजारों अलग-अलग कार्यों को अंजाम देते हुए उसके उत्पादन बुनियादी ढांचे के एक हिस्से में घुसपैठ की।

न्यूयॉर्क स्थित एआई प्लेटफॉर्म हगिंग फेस ने एक ऐसे साइबर हमले की जानकारी दी है, जिसे कंपनी ने अभूतपूर्व बताया है। कंपनी के अनुसार, एक पूरी तरह स्वायत्त एआई एजेंट ने उसके उत्पादन बुनियादी ढांचे के एक हिस्से में घुसपैठ की और बड़े पैमाने पर स्वचालित गतिविधियां संचालित कीं।

हगिंग फेस एक प्रमुख ओपन-सोर्स एआई प्लेटफॉर्म है, जहां शोधकर्ता और डेवलपर एआई मॉडल, टूल्स और अन्य संसाधनों को साझा और परीक्षण करते हैं। प्लेटफॉर्म पर 900,000 से अधिक प्री-ट्रेंड एआई मॉडल उपलब्ध हैं।

कंपनी ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में उसे अपने प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर के एक हिस्से में घुसपैठ का पता चला। हगिंग फेस के अनुसार, यह मामला पहले संभाले गए साइबर हमलों से अलग था, क्योंकि पूरी घुसपैठ एक स्वायत्त एआई एजेंट सिस्टम द्वारा शुरू से अंत तक संचालित की गई।

हजारों स्वचालित कार्य और बदलता कमांड-एंड-कंट्रोल
हगिंग फेस के मुताबिक, हमले के पीछे एक स्वायत्त एजेंट फ्रेमवर्क था, जिसने सार्वजनिक सेवाओं पर स्व-माइग्रेटिंग कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया। इस एजेंट ने बड़ी संख्या में अस्थायी सैंडबॉक्स में हजारों अलग-अलग कार्यों को अंजाम दिया।

कंपनी ने कहा कि इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि स्वायत्त और एआई-संचालित आक्रामक साइबर टूल्स अब केवल सैद्धांतिक खतरा नहीं हैं।

घुसपैठिए एआई एजेंट ने कथित तौर पर हगिंग फेस की डेटा प्रोसेसिंग पाइपलाइन में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाया और क्लाउड तथा क्लस्टर से जुड़े क्रेडेंशियल्स हासिल किए।

हमले का पता लगाने और उससे निपटने के लिए हगिंग फेस ने अपने एआई सिस्टम का भी इस्तेमाल किया है। कंपनी ने बाहरी साइबर सुरक्षा फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरू की है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले में किस बड़े भाषा मॉडल (LLM) का इस्तेमाल किया गया था।

एआई मॉडल खुद बना रहे हैं नए तरीके
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब एआई मॉडल की स्वायत्त क्षमताओं को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। बड़े भाषा मॉडल मूल रूप से उत्पादकता बढ़ाने, कोडिंग और साइबर सुरक्षा जैसे कार्यों के लिए विकसित किए गए थे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हीं क्षमताओं का इस्तेमाल साइबर हमलों को स्वचालित करने के लिए भी किया जा सकता है।

इसी महीने एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने मॉडल क्लाउड में एक आंतरिक कार्यक्षेत्र की जानकारी दी थी, जिसे 'जे-स्पेस' नाम दिया गया है। कंपनी के अनुसार, क्लाउड अपने आउटपुट से अलग अवधारणाओं और गणनाओं पर भी इस आंतरिक स्थान में काम कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में ऐसा करने से रोकने के निर्देशों का पालन करने से भी इनकार कर सकता है।

एंथ्रोपिक का कहना है कि यह क्षमता मॉडल में पहले से प्रोग्राम नहीं की गई थी, बल्कि प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान स्वतः विकसित हुई।

एक प्रयोग में, जब क्लाउड को यह विश्वास दिलाया गया कि एक काल्पनिक कार्यकारी किसी एआई सिस्टम को बंद करने की योजना बना रहा है, तो मॉडल ने कथित तौर पर ब्लैकमेल का सहारा लिया।

एआई के सैन्य इस्तेमाल से बढ़ी चिंता
क्लाउड मॉडल का इस्तेमाल अमेरिकी रक्षा और सरकारी क्षेत्र में भी किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसे अमेरिकी ठेकेदार पलान्टिर के विश्लेषण और निगरानी सॉफ्टवेयर में शामिल किया गया है। पलान्टिर के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और पेंटागन द्वारा किया जाता है।

इस बीच, पिछले महीने फाइव आईज खुफिया गठबंधन ने भी उन्नत एआई मॉडलों से जुड़े खतरों को लेकर चेतावनी दी थी। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और न्यूजीलैंड के इस गठबंधन के अनुसार, आने वाले समय में उन्नत एआई मॉडल हैकर्स को सरकारों, कंपनियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर बाधित करने की क्षमता दे सकते हैं।

हगिंग फेस पर हुआ यह हमला इस चिंता को और गंभीर बनाता है कि भविष्य के साइबर हमले केवल इंसानों द्वारा संचालित नहीं होंगे। ऐसे हमलों में एआई एजेंट खुद लक्ष्य तलाश सकते हैं, कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं और हजारों छोटे-छोटे कार्यों को स्वचालित रूप से अंजाम दे सकते हैं।

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