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2024 में देश में साइबर अपराध के 1.02 लाख से अधिक मामले दर्ज, वित्तीय धोखाधड़ी में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा बचाए गए

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 171

नई दिल्ली 21 जुलाई 2026। देश में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में देशभर में साइबर अपराध के 1,01,928 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2020 में यह संख्या 50,035 थी। यानी पांच वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में करीब दोगुनी वृद्धि हुई है।

गृह मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2021 में 52,974, 2022 में 65,893 और 2023 में 86,420 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,01,928 तक पहुंच गया।

साइबर अपराधों में धोखाधड़ी सबसे बड़ी श्रेणी रही। वर्ष 2024 में साइबर धोखाधड़ी के 29,758 मामले दर्ज किए गए, जबकि बेईमानी से जुड़े 19,296 और डेटा चोरी के 88 मामले सामने आए। साइबर ब्लैकमेलिंग और धमकी के 601 मामले तथा सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों से जुड़े 483 मामले भी दर्ज किए गए।

साइबर फ्रॉड की 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में बचाए गए ₹11,158 करोड़

गृह मंत्रालय के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तहत संचालित Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) के माध्यम से 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बचाई गई।

वर्ष 2021 से 2025 के बीच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी की 65.89 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें रिपोर्ट की गई राशि 55,050 करोड़ रुपये से अधिक थी। 8,189 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को लियन के रूप में चिह्नित किया गया, जबकि 1.95 लाख से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं।

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए सरकार ने 1930 हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया है।

29,837 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी

साइबर अपराध से निपटने के लिए I4C के समन्वय प्लेटफॉर्म और 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराधों और अपराधियों के बीच अंतरराज्यीय संबंधों का विश्लेषण करता है।

सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए अब तक 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 2.33 लाख से ज्यादा साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त किए गए हैं।

देश के साइबर अपराध हॉटस्पॉट और बहु-राज्यीय अपराधों से निपटने के लिए मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी में सात संयुक्त साइबर समन्वय दल गठित किए गए हैं।

281 साइबर कमांडो ने पूरा किया प्रशिक्षण

सरकार ने साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित साइबर कमांडो की एक शाखा भी शुरू की है। अब तक 281 साइबर कमांडो अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।

इसके अलावा, साइबर अपराध की जांच और फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। सरकार ने इस उद्देश्य के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, देश में साइबर अपराध मामलों की जांच में सहायता के लिए सात केंद्रीय और 28 राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं।

यह जानकारी गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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