नई दिल्ली 24 जुलाई 2026। भारत का सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 421.3 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है। दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं के साथ-साथ व्यावसायिक सेवाओं ने इस वृद्धि में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में भारत का कुल सेवा निर्यात 254.5 अरब डॉलर था, जो 2022-23 में बढ़कर 325.3 अरब डॉलर, 2023-24 में 341.1 अरब डॉलर और 2024-25 में 387.5 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
IT और डिजिटल सेवाओं का सबसे बड़ा योगदान
भारत के सेवा निर्यात में दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। इस क्षेत्र का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 206.6 अरब डॉलर रहा, जो कुल सेवा निर्यात का 49.03 प्रतिशत है।
वहीं, व्यावसायिक सेवाओं का निर्यात 124.2 अरब डॉलर रहा और कुल सेवा निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 29.5 प्रतिशत रही। आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्रोतों पर आधारित हैं।
FTA से भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बढ़त
सरकार ने बताया कि सेवा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और अन्य व्यापार संवर्धन पहलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय सेवा प्रदाताओं को विदेशी बाजारों में बेहतर बाजार पहुंच और समान शर्तों पर सेवाएं देने का अवसर मिल रहा है।
हाल के व्यापार समझौतों में पेशेवर योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, घरेलू नियमन में पारदर्शिता और कुशल भारतीय पेशेवरों की अस्थायी आवाजाही को आसान बनाने के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
भारत ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ हुए व्यापार समझौतों में छात्रों के लिए भी सहायक प्रावधान हासिल किए हैं। इसके अलावा, कई समझौतों में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं, जिससे विदेशों में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा अंशदान का दोहरा भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
मेडिकल टूरिज्म से गेमिंग तक कई क्षेत्रों पर फोकस
सरकार के अनुसार, सेवा निर्यात बढ़ाने के लिए मेडिकल वैल्यू टूरिज्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, गेमिंग, मनोरंजन, लॉजिस्टिक्स और फिनटेक जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जा रहा है।
सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (SEPC) भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी कराने तथा खरीदार-विक्रेता संपर्क बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।















