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ज्ञान भारतम मिशन: 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी जुटाई गई, एआई से होगा डिजिटल संरक्षण

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📍 भोपाल
ज्ञान भारतम मिशन: 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी जुटाई गई, एआई से होगा डिजिटल संरक्षण
नई दिल्ली 27 जुलाई 2026। भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने और डिजिटल रूप से सुलभ बनाने के लिए चलाए जा रहे ज्ञान भारतम मिशन के तहत अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी जुटाई जा चुकी है। यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

मिशन के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और लिपियों में मौजूद पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और उनके संरक्षकों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है। हालांकि, मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और वास्तविक पंजीकरण के लिए कोई जिला-वार लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था।

एआई तकनीक से पांडुलिपियों की समझ आसान

ज्ञान भारतम वेब पोर्टल भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच उपलब्ध कराने के लिए कई एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल करता है। इनमें लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR), हैंडरिटेन टेक्स्ट रिकग्निशन (HTR), स्क्रिप्ट रिकग्निशन, सिमेंटिक सर्च और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद शामिल हैं।

पोर्टल का एआई-संचालित ज्ञान इंटरफेस ‘ज्ञान मित्रम’ पांडुलिपियों की तस्वीरों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एक साथ जोड़कर उनके अध्ययन, व्याख्या और खोज को आसान बनाता है।

‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ से पांडुलिपियों से संवाद
भारतीयजीपीटी ने ज्ञान भारतम पोर्टल पर ‘पांडुलिपि से संवादात्मक एआई’ सुविधा उपलब्ध कराई है। इसके जरिए पांडुलिपि विरासत को एआई-तैयार और मशीन-पठनीय ज्ञान में बदला जा रहा है।

‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ सुविधा के माध्यम से उपयोगकर्ता पांडुलिपियों से टेक्स्ट, ऑडियो और आवाज आधारित बातचीत कर सकेंगे। यह सुविधा बहुभाषी और बहुआयामी पहुंच उपलब्ध कराती है, जिससे भारत की ज्ञान परंपराओं को विद्वानों, छात्रों, शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सकेगा।

‘पांडुलिपि दर्पण’ से स्क्रिप्ट पहचान और अनुवाद
ज्ञान भारतम वेब पोर्टल पर ‘पांडुलिपि दर्पण’ नामक एआई आधारित उपकरण भी उपलब्ध है। इसके जरिए उपयोगकर्ता किसी डिजिटाइज्ड पांडुलिपि की तस्वीर अपलोड या चुनकर एआई-सहायता प्राप्त लिपि पहचान, लिप्यंतरण और अनुवाद की सुविधा हासिल कर सकते हैं।

सरकार के अनुसार, पांडुलिपियों की डिजिटल प्रतियों तक पहुंच लागू कानूनों और संरक्षकों व अधिकार धारकों के अधिकारों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएगी। जहां कानूनी रूप से अनुमति होगी, वहां पांडुलिपियों और उनसे जुड़े मेटाडेटा को सार्वजनिक और अकादमिक शोध के लिए राष्ट्रीय डिजिटल भंडार के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता है। संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित सामग्री के लिए अलग-अलग पहुंच शर्तें लागू होंगी।
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