नई दिल्ली 28 जुलाई 2026। केंद्र सरकार ने कहा है कि साइबर अपराध और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए देश में व्यापक और समन्वित तंत्र विकसित किया गया है। गृह मंत्रालय के तहत स्थापित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के माध्यम से साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच और पीड़ितों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने बताया कि संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है, जबकि केंद्र सरकार तकनीकी सहयोग, सलाह और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।
सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और 1930 हेल्पलाइन के जरिए साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। वर्ष 2021 में शुरू की गई नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) के माध्यम से 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाई जा चुकी है।
सरकार ने बताया कि साइबर अपराधियों पर कार्रवाई के तहत 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक किए गए हैं। वहीं, बैंकों के सहयोग से तैयार किए गए संदिग्ध रजिस्टर में 30.48 लाख संदिग्ध पहचानकर्ताओं और 32.08 लाख फर्जी बैंक खातों का डेटा साझा किया गया, जिससे ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन रोके जा सके।
I4C के 'प्रतिबिंब' और समन्वय प्लेटफॉर्म की मदद से विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधियों के नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप अब तक 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है तथा 2.33 लाख से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोधों का निपटारा किया गया है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के लिए CyTrain ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। 30 जून 2026 तक 1.63 लाख से अधिक पुलिस और न्यायिक अधिकारी इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं और 1.61 लाख से अधिक प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। इसके अलावा, साइबर कमांडो कार्यक्रम के तहत अब तक 281 विशेष प्रशिक्षित साइबर कमांडो तैयार किए जा चुके हैं।
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि नई दिल्ली और असम में राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिन्होंने अब तक 14,064 से अधिक साइबर अपराध मामलों में राज्यों की जांच एजेंसियों को तकनीकी और फोरेंसिक सहायता प्रदान की है।
साइबर ठगी के मामलों के त्वरित निपटान के लिए अप्रैल 2026 से फंड रिस्टोरेशन मॉड्यूल और ग्रिवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल भी शुरू किए गए हैं, ताकि पीड़ितों को उनकी धनराशि शीघ्र वापस दिलाई जा सके।
सरकार ने बताया कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए CyberDost अभियान, सोशल मीडिया, टीवी, रेडियो, एसएमएस, स्कूलों, सिनेमा हॉल, आईपीएल, मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों सहित विभिन्न माध्यमों से लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।















