नई दिल्ली 28 जुलाई 2026। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) से पहले भारत ने एक बार फिर बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अपनी वैश्विक नेतृत्व की स्थिति मजबूत की है। देश में दुनिया की 75 प्रतिशत से अधिक जंगली बाघ आबादी निवास करती है। बीते डेढ़ दशक में भारत ने वैज्ञानिक प्रबंधन, कड़े संरक्षण उपायों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बल पर बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
वर्तमान में भारत में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जो लगभग 82,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 2.5 प्रतिशत हिस्सा है। इन संरक्षित क्षेत्रों ने न केवल बाघों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया है, बल्कि जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाई है।
2006 से अब तक दोगुनी से अधिक हुई बाघों की संख्या
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा कराई गई गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2006 में भारत में 1,411 बाघ थे। यह संख्या बढ़कर 2022 में 3,682 हो गई। इस तरह 16 वर्षों में बाघों की आबादी दोगुनी से भी अधिक हो गई है।
संरक्षण के लिए कई नई पहल
सरकार ने बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए कई तकनीकी और प्रबंधन आधारित कदम उठाए हैं। इनमें आधुनिक निगरानी प्रणाली, कैमरा ट्रैप, ड्रोन सर्विलांस, वन्यजीव अपराधों पर सख्ती, आवास सुधार, शिकार पर नियंत्रण और वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) का संरक्षण शामिल है। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी और ईको-डेवलपमेंट कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया गया है।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी जरूरी हैं बाघ
विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं बल्कि स्वस्थ जंगलों और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के संकेतक हैं। बाघों की सुरक्षा का अर्थ है जंगलों, नदियों, जल स्रोतों और हजारों अन्य वन्यजीव प्रजातियों का संरक्षण। यही कारण है कि बाघ संरक्षण को पर्यावरण सुरक्षा और जलवायु संतुलन से भी जोड़ा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मॉडल बना मिसाल
पीआईबी के अनुसार, भारत का बाघ संरक्षण मॉडल अब कई देशों के लिए प्रेरणा बन चुका है। वैज्ञानिक निगरानी, मजबूत कानूनी व्यवस्था, संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार और जनभागीदारी के कारण भारत वैश्विक स्तर पर बाघ संरक्षण का सबसे सफल उदाहरण माना जा रहा है।















