मुंबई, 30 जुलाई, 2026। वीमेंस फोरम फॉर द इकोनॉमी एंड सोसाइटी (पब्लिसिस ग्रुप) पहली बार अपना प्रमुख ग्लोबल मीटिंग भारत में आयोजित करेगा। यह आयोजन 2-3 नवंबर 2026 को फ्रांस-भारत नवाचार वर्ष 2026 के अंतर्गत होगा। भारत में फ्रांस के दूतावास तथा इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईएफसीसीआई) के सहयोग से आयोजित इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के प्रमुख विशेषज्ञ नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
पिछले 20 वर्षों से वीमेंस फोरम व्यवसाय और समाज से जुड़े वैश्विक संवाद का एक अग्रणी मंच रहा है। फ्रांस के बाहर पहली बार इसका ग्लोबल मीटिंग भारत में आयोजित होना एक ऐतिहासिक अवसर है, जो वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है।
"द फ्यूचर ऑफ प्रॉस्पेरिटी: वीमेन, वर्क एंड द फोर्सेज रीशेपिंग आवर वर्ल्ड" विषय पर आधारित यह सम्मेलन भारत को नवाचार और समावेशी समृद्धि पर वैश्विक विमर्श के केंद्र में स्थापित करेगा। इसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उद्यमिता, नेतृत्व और भविष्य के कार्यस्थलों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्यमिता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उसकी अग्रणी भूमिका उसे वीमेंस फोरम के पहले अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल मीटिंग की मेजबानी के लिए उपयुक्त बनाती है।
यह ग्लोबल मीटिंग भारत, फ्रांस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के नेताओं को विचारों के आदान-प्रदान, श्रेष्ठ अनुभव साझा करने तथा नवाचार आधारित और अधिक समावेशी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने वाली साझेदारियों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। सम्मेलन में एआई आधारित भविष्य में सफलता के लिए आवश्यक कौशल, नीतियों और नवाचारों पर चर्चा होगी, साथ ही यह भी विचार किया जाएगा कि तकनीकी प्रगति के लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक कैसे पहुंचाए जाएं।
वीमेंस फोरम की अध्यक्ष नैनेट लाफोंड डुफोर ने कहा, "आर्थिक विकास, नवाचार और तकनीकी परिवर्तन तभी वास्तविक मूल्य सृजित कर सकते हैं, जब वे सभी लोगों को उन अवसरों में भागीदारी का अवसर दें जिन्हें वे उत्पन्न करते हैं। अपनी स्थापना से ही वीमेंस फोरम ने लैंगिक समानता को केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि नवाचार, प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत आर्थिक विकास का एक सशक्त आधार माना है।"
फ्रांस-भारत नवाचार वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित यह सम्मेलन उद्योग जगत, प्रौद्योगिकी क्षेत्र, सरकारी संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच संवाद एवं सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। यह फ्रांस और भारत के बीच नवाचार, सतत विकास और व्यापक आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने वाले सहयोग का भी हिस्सा है।
भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथू ने कहा, "वर्ष 2026 ने हमारे दोनों देशों की विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में नवाचार को एक प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। लेकिन भविष्य की समृद्धि तभी संभव है जब महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता सुनिश्चित हो। वीमेंस फोरम द्वारा चुना गया विषय इसी चुनौती को सामने रखता है। फ्रांस के बाहर पहली बार मुंबई में इस ग्लोबल मीटिंग का आयोजन हमारे द्विपक्षीय संबंधों की असाधारण गहराई को दर्शाता है।"
भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन भारत और दुनिया भर की प्रभावशाली पहलों को प्रदर्शित करने, सीमा-पार सहयोग को मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भविष्य के कार्यस्थल, जलवायु अनुकूलन, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी जैसे वैश्विक विषयों पर समाधान विकसित करने का मंच बनेगा।
वीमेंस फोरम के पहले ग्लोबल मीटिंग के लिए फ्रांस के बाहर भारत का चयन इस बात का प्रतीक है कि भारत वैश्विक नवाचार शक्ति के रूप में उभर रहा है और अधिक समावेशी एवं न्यायपूर्ण समृद्धि के भविष्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बन चुका है।
वीमेंस फोरम फॉर द इकोनॉमी एंड सोसाइटी के बारे में
वर्ष 2005 में स्थापित वीमेंस फोरम फॉर द इकोनॉमी एंड सोसाइटी महिलाओं के नेतृत्व और अर्थव्यवस्था तथा समाज में उनके योगदान को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है। अपने कार्यक्रमों, शोध और विभिन्न पहलों के माध्यम से यह उद्योग जगत, सरकारी संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज को साथ लाकर सतत विकास, नवाचार और उत्तरदायी नेतृत्व को प्रोत्साहित करता है।
इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईएफसीसीआई) के बारे में
इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईएफसीसीआई) भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों को अपने व्यावसायिक विस्तार में सहयोग प्रदान करता है तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह निवेश, व्यापार और दोनों देशों के व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।















