नई दिल्ली 30 जुलाई 2026। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है। जून 2026 में यह कमजोर स्तर पर थी, जबकि जुलाई में इसकी तीव्रता बढ़कर मध्यम स्तर तक पहुंच गई है। विभाग का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच अल नीनो और मजबूत होकर "बहुत तीव्र" श्रेणी तक पहुंच सकता है।
आईएमडी ने स्पष्ट किया कि "सुपर एल नीनो" नाम से कोई आधिकारिक श्रेणी न तो विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और न ही भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है। परिचालन स्तर पर अल नीनो की घटनाओं को भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि के आधार पर कमजोर, मध्यम, मजबूत और बहुत मजबूत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
विभाग के अनुसार, वर्ष के अंतिम महीनों में अल नीनो के और अधिक मजबूत होने की संभावना है। हालांकि इसका भारतीय क्षेत्र और मानसून पर वास्तविक प्रभाव महासागर और वायुमंडल की संयुक्त परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, क्योंकि अल नीनो मौसम को प्रभावित करने वाले कई कारकों में से केवल एक है।
आईएमडी ने बताया कि वह अल नीनो समेत सभी प्रमुख जलवायु संकेतकों की लगातार निगरानी कर रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को नियमित रूप से मौसमी, मासिक और विस्तारित अवधि के मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके अलावा, विभाग प्रतिदिन अगले सात दिनों के लिए प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान (Impact-Based Forecast) और जोखिम-आधारित चेतावनियां भी जारी करता है, ताकि आपदा प्रबंधन एजेंसियां और प्रशासन समय रहते आवश्यक तैयारियां कर सकें।
यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।















