नई दिल्ली 30 जुलाई 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए जा रहे डीपफेक ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने कानूनी और तकनीकी ढांचे को और मजबूत किया है। सरकार ने बताया है कि डीपफेक की पहचान और रोकथाम के लिए 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जबकि देशभर में साइबर सुरक्षा जागरूकता के लिए 6,650 कार्यशालाओं के माध्यम से 11.37 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सरकार एआई आधारित डीपफेक से उत्पन्न खतरों के प्रति सजग है और नागरिकों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय तथा जवाबदेह साइबर स्पेस सुनिश्चित करने के लिए कई कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं।
सरकार के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, निजता का उल्लंघन, भ्रामक जानकारी फैलाने और संगठित साइबर अपराध जैसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है। आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को डीपफेक सहित भ्रामक और गैरकानूनी सामग्री को रोकने तथा हटाने के लिए उचित सावधानी बरतना अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने बताया कि फरवरी 2026 में आईटी नियमों में संशोधन कर एआई जनित सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और मेटाडेटा अनिवार्य किया गया है ताकि उपयोगकर्ता ऐसी सामग्री की पहचान कर सकें। इसके साथ ही गैरकानूनी एआई सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। संवेदनशील शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा भी कम की गई है।
संशोधित नियमों में बिना सहमति के साझा की गई अंतरंग तस्वीरों, बाल यौन शोषण सामग्री, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक एआई जनित सामग्री को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। सोशल मीडिया मध्यस्थों को ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के लिए तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।
डीपफेक का पता लगाने के लिए इंडियाएआई मिशन के तहत कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित "साक्ष्य" फ्रेमवर्क, ऑडियो-विजुअल जालसाजी पहचान प्रणाली तथा आईआईटी खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन परियोजना प्रमुख पहलों में शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (आईएसईए) परियोजना के तहत आयोजित 6,650 कार्यशालाओं में स्कूल और कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और आम नागरिकों सहित 11.37 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया है। साइबर सुरक्षा और डीपफेक से बचाव के लिए बहुभाषी जागरूकता सामग्री भी व्यापक स्तर पर प्रसारित की जा रही है।















