×

रूसी कैंसर वैक्सीन के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक, पहले मरीज में दिखा मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 62

मॉस्को 31 जुलाई 2026। रूस में विकसित की गई पर्सनलाइज़्ड मेलेनोमा कैंसर वैक्सीन 'नियोनकोवैक' (Neooncovac) के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक बताए जा रहे हैं। वैक्सीन लेने वाले पहले मरीज की हालत सामान्य है और जांच में कैंसर से लड़ने के लिए जरूरी इम्यून रिस्पॉन्स विकसित होने के संकेत मिले हैं।

गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के साइंटिफिक डायरेक्टर अलेक्जेंडर गिंज़बर्ग के मुताबिक, नियोनकोवैक लेने वाला पहला मरीज फिलहाल ठीक महसूस कर रहा है और उसका इलाज जारी है। उन्होंने रूसी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती को बताया कि मरीज में इम्यूनोलॉजिकल रिस्पॉन्स के परिणाम "बहुत अच्छे" रहे हैं।

अप्रैल में दिया गया था पहला डोज
नियोनकोवैक का पहला डोज अप्रैल में 60 वर्षीय एक मरीज को दिया गया था। मरीज को स्टेज-3 मेलेनोमा के साथ मेटास्टेसिस की समस्या है और उसका इलाज मॉस्को स्थित हर्ज़ेन मॉस्को ऑन्कोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट में चल रहा है।

गिंज़बर्ग के अनुसार, मरीज के शरीर में ऐसे इम्यून कंपोनेंट्स विकसित हो रहे हैं जो ट्यूमर और मेटास्टेसिस से मुकाबला करने में भूमिका निभा सकते हैं। मरीज को आगे वैक्सीन की दो और खुराक दिए जाने की उम्मीद है। उपचार के दौरान उसके इम्यून रिस्पॉन्स की लगातार निगरानी की जाएगी।

10 और मरीजों के लिए तैयार हो रही वैक्सीन
गामालेया इंस्टीट्यूट अब 10 अन्य मरीजों के लिए पर्सनलाइज़्ड मेलेनोमा वैक्सीन तैयार कर रहा है। बताया गया है कि इन वैक्सीन को तैयार होने में करीब डेढ़ से तीन महीने का समय लग सकता है।

पर्सनलाइज़्ड वैक्सीन का मतलब है कि इसे प्रत्येक मरीज के कैंसर की आनुवंशिक विशेषताओं के आधार पर तैयार किया जाता है। इसके लिए मरीज के ट्यूमर और स्वस्थ टिश्यू के नमूनों का जेनेटिक विश्लेषण किया जाता है। इसके आधार पर ऐसी वैक्सीन तैयार करने की कोशिश की जाती है जो मरीज की इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित करे।

कैंसर के इलाज का अलग तरीका
नेशनल मेडिकल रिसर्च सेंटर ऑफ रेडियोलॉजी के प्रमुख आंद्रे कप्रिन के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य केवल कैंसर पर सीधे हमला करना नहीं है, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें खत्म करने के लिए सक्रिय करना है।

रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले साल देश में विकसित दो पर्सनलाइज़्ड कैंसर उपचारों को मंजूरी दी थी। इनमें एडवांस्ड मेलेनोमा के लिए mRNA आधारित नियोनकोवैक और कोलोरेक्टल कैंसर के लिए पेप्टाइड आधारित 'ओन्कोपेप्ट' (Oncopept) शामिल हैं।

ओन्कोपेप्ट पर भी काम जारी
रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, ओन्कोपेप्ट लेने वाले मरीजों में भी जरूरी इम्यून रिस्पॉन्स विकसित होने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा गामालेया इंस्टीट्यूट पैंक्रियाटिक कैंसर, किडनी कैंसर और नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के लिए भी इसी तरह की पर्सनलाइज़्ड कैंसर उपचार तकनीक पर काम कर रहा है।

हालांकि, नियोनकोवैक के मौजूदा परिणाम अभी शुरुआती स्तर के हैं। इम्यून रिस्पॉन्स का विकसित होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इससे अकेले यह साबित नहीं होता कि वैक्सीन कैंसर को प्रभावी रूप से ठीक कर देती है। इसकी वास्तविक प्रभावशीलता और सुरक्षा का आकलन अधिक मरीजों और लंबे समय के क्लिनिकल डेटा के आधार पर ही किया जा सकेगा।

Related News

Global News