1 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश जल्द ही देश की पहली 'वल्चर वॉकिंग सफारी' शुरू करने जा रहा है। यह अनूठी इको-टूरिज्म पहल पन्ना, रीवा, शिवपुरी, ओरछा और गांधी सागर के वन क्षेत्रों में शुरू की जाएगी, जहां पर्यटकों को प्राकृतिक आवास में गिद्धों को करीब से देखने और उनके संरक्षण की कहानी जानने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार के अनुसार, वर्ष 2026 की वन्यजीव गणना में मध्य प्रदेश में करीब 12,000 गिद्ध दर्ज किए गए हैं, जो देश में इनकी सबसे बड़ी आबादी है। इसी उपलब्धि के कारण मध्य प्रदेश को अब 'वल्चर स्टेट' के रूप में भी पहचान मिल रही है।
यह सफारी पारंपरिक जीप सफारी से अलग होगी। इसमें पर्यटक प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट और स्थानीय ग्रामीण गाइडों के साथ पैदल ट्रैकिंग करते हुए विंध्य क्षेत्र की नदी घाटियों और बलुआ पत्थर की ऊंची चट्टानों तक पहुंचेंगे, जहां गिद्ध बड़ी संख्या में बसेरा करते हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है। प्राकृतिक सफाईकर्मी माने जाने वाले गिद्ध मृत पशुओं का तेजी से निपटान कर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में अहम योगदान देते हैं।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) ने वन विभाग और स्थानीय संरक्षण समूहों के सहयोग से इस परियोजना को विकसित किया है। इसके तहत स्थानीय युवाओं को इको-गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार मिलेगा और वे गिद्धों के घोंसलों व प्रजनन स्थलों की सुरक्षा में भी भागीदारी निभाएंगे।
सफारी के दौरान पर्यटक बघेली होमस्टे में ठहरकर स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक भोजन और ग्रामीण जीवन का अनुभव भी ले सकेंगे। वहीं पन्ना में पहले से संचालित 'वॉक विद पारधी' कार्यक्रम के जरिए स्थानीय पारधी समुदाय के अनुभवी ट्रैकर्स जंगल और वन्यजीवों से जुड़ा अपना पारंपरिक ज्ञान पर्यटकों के साथ साझा करेंगे।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद वन्यजीव पर्यटन का दायरा केवल बाघों तक सीमित न रखकर गिद्ध जैसे महत्वपूर्ण जीवों की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। उनका मानना है कि स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जितने जरूरी शीर्ष शिकारी हैं, उतने ही महत्वपूर्ण प्रकृति के सफाईकर्मी गिद्ध भी हैं।















