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बदल जाएगी संस्कारधानी की सूरत, सीएम डॉ. मोहन ने जबलपुर के लिए खोला सौगातों का पिटारा

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 70

362.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 'अमृत 1.0' सीवेज परियोजना का शुभारंभ
सीएम डॉ. मोहन ने किया बने तीन बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण
सिविल लाइन में स्थापित हुई आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बनी अलग पहचान
जबलपुर में 11 लाख पौधरोपण अभियान का शुभारंभ

जबलपुर 1 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 अगस्त को जबलपुर के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया। उन्होंने यहां 362.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 'अमृत 1.0' सीवेज परियोजना का शुभारंभ किया, कठौंदा, ललपुर और तेवर में बने तीन बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण किया। उन्होंने सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी, गुरंदी में 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बने नए मछली बाजार का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पीएम स्वनिधि के हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड भी प्रदान किए। इतना ही नहीं, उन्होंने जबलपुर में इमारती लकड़ियों से फर्नीचर निर्माण के लिए फर्नीचर कलस्टर स्थापित करने और सांदीपनि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जबलपुर फर्नीचर निर्माण का नया केंद्र बनेगा। कार्यक्रम में 'कैच द रेन' अभियान के तहत 11 लाख पौधरोपण महाअभियान का भी शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आकाशवाणी को नई पहचान दी और युवाओं को संचार तकनीक से परिचित कराया। देश की 80 करोड़ आबादी को नि:शुल्क राशन, पक्का मकान, नि:शुल्क शौचालय, हर घर नल से जल, आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 5 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिल रही है। रेहड़ी वाले छोटे व्यापारियों को पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत लाभ मिल रहा है। आज जबलपुर के अनेक हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड प्रदान किए गए हैं। हर गरीब के जीवन में सुख का सूरज निकले, राज्य सरकार सहयोग की भावना से कार्य कर रही है। सरकार का अर्थ सहकार और सहकार का अर्थ परिवार की सहायता करना है।

ऋषि-मुनियों के समान हैं पेड़
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुनिया के सामने भारत वसुधैब कुटुम्बकम का एक आदर्श उदाहरण है। भारतीय परंपरा प्राचीनकाल से इसी भाव से आगे बढ़ती रही है। प्रकृति के साथ रिश्ता बनाने के लिए आज जबलपुर से 11 लाख पौधे लगाने के लिए पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया है। पेड़ हमारे जीवन में ऋषि-मुनियों के समान हैं, जिनसे हमें स्वच्छ हवा मिलती है। वृक्षारोपण के लिए नई मियावाकी पद्धति से एक एकड़ भूमि पर 12 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। यह क्षेत्र तीन साल में सघन वन बन जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां हरे-भरे सघन वन हैं। नदियां जंगलों को आबाद रखती हैं। लोगों को जल मिलता है। सभी को खुशहाली और आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। नर्मदा नदी से गुजरात और राजस्थान को भी समृद्धि मिलती है। मध्यप्रदेश की जलराशि गंगा बेसिन और यमुना नदी से माध्यम से गंगा सागर तक जाकर समुद्र में मिलती हैं। चंबल और सोन जैसी नदियां गंगा-यमुना की धारा को रफ्तार देती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी गई है। वहीं, गुरंदी में मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों की सुविधा के लिए 2.5 करोड़ रुपये की लागत से पक्के मत्स्य बाजार का लोकार्पण किया गया है। खुले में मछली बिकने से इसे नहीं खाने वालों को बड़ी कठिनाई होती है। दूसरी ओर, खाने वालों के लिए खानपान की शुद्धता पर असर पड़ता है।

यूसीसी की दिशा में आगे बढ़े हम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के बाद कांग्रेस ने समाज को वोट बैंक के चश्मे से देखा। धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश की गई। रहीम और रसखान की रचनाएं देखिए, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रण मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश में कहीं कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। यह बदलते दौर का भारत है। मध्यप्रदेश सरकार ने इसी भावना से हिंदू और मुस्लिम सहित सभी वर्गों के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। यूसीसी लागू करने के लिए राज्य सरकार ने 3 करोड़ से अधिक एसएमएस भेजे, जिसके बाद 10 लाख से अधिक सुझाव समिति के पास आए। इन सुझावों में 74 प्रतिशत मुस्लिम बहनों ने यूसीसी लागू करने का समर्थन किया। एक जैसे हैं, वैसे ही सभी हैं। इसी भावना से एक समान कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़े हैं।

देश के लिए हमारे काम बने मॉडल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग देश में सबसे अच्छा काम करने वाला विभाग है। हमारे द्वारा लागू कई काम देश में लागू हो रहे हैं। मध्यप्रदेश ने ब्रिटिशकाल के राजमार्ग कानून और फायर सेफ्टी एक्ट में संशोधन किया। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रतीक हैं। हमारे बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा मिले, इसीलिए प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बनाए गए हैं। युवाओं का भविष्य संवारने के लिए दो साल में 10 हजार शिक्षक और पुलिस विभाग में 18 हजार पदों पर भर्ती की गई है। सभी विभागों के लगभग ढाई लाख से अधिक शासकीय सेवकों को पदोन्नति दी गई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पुलिस विभाग में ही 25 हजार अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए। देश की आजादी के बाद केवल सागर और उज्जैन में ही विश्वविद्यालय थे। लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। वर्तमान समय में 75 से अधिक विश्वविद्यालय हो चुके हैं। हमारी यूनिवर्सिटी ऐसी बनें, जहां विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता के साथ शिक्षा मिले। भविष्य में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी एक प्रकार से प्रदेश के एम्स की तर्ज पर विकसित होगी और यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

और निखरेगी संस्कारधानी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर के समग्र विकास के लिए अधिकारी मेट्रोपोलिटन सिटी का ड्राफ्ट तैयार करें। सरकार एक साल के अंदर जबलपुर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएगी। यहां चारों दिशा में नैसर्गिक सौंदर्य है। मदन महल के पास एक बड़ा जू (चिड़ियाघर) बनाया जाएगा, जो देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट तो पहले से है, अब तो चीता भी मध्यप्रदेश में जीता है। यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश मगरमच्छ, घड़ियाल, गिद्ध, तेंदुआ जैसे वन्यजीवों के मामले में भी अग्रणी राज्य है। एशिया महाद्वीप से चीता विलुप्त हो गया था, लेकिन मध्यप्रदेश की धरती पर आते ही उनकी संख्या 20 से बढ़कर 52 हो गए। उन्होंने कहा कि यह हमारे सहअस्तित्व की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। हम जीयो और जीने दो की भावना के साथ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। प्रदेश की धरती से 100 साल पहले हाथी लुप्त हो गए थे। अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। असम से जंगली भैंसे लाए गए हैं। भविष्य में गैंडे और किंग कोबरा जैसे जीवों को भी लाकर बसाया जाएगा। वनों की समृद्धि के लिए और पर्यटन से रोजगार के अवसर दिलवाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।

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