🔴 TRENDING NOW!
भारतीय संस्कृति में सिर्फ पर्यटन नहीं, तीर्थाटन की भावना महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुमार सानू, शंकर महादेवन और जावेद अली ‘सा रे गा मा पा 2026’ के दिवाली स्पेशल एपिसोड में जमाएंगे सुरों की महफिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान में हुए शामिल उज्जैन के गौरव की “गिर गाय राधा” ने बनाया रिकार्ड, प्रतिदिन 19 लीटर से अधिक दूध देकर प्रदेश में हासिल किया सर्वाधिक दूध देने वाली गाय का स्थान प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर स्कोडा ऑटो इंडिया ने 350 से अधिक ग्राहक संपर्क केंद्रों का आंकड़ा पार किया, 193 शहरों तक पहुँच का विस्तार किया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निभाया वादा, हनुमान अंश फिल्म के बुंदेली गायक सुनील लोधी के आंखों का उपचार शुरू सीएम डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने लिए अहम फैसले, डेवलपमेंट-इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्वीकार किए 23 हजार 300 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए उप पुलिस अधीक्षकों को दिए कर्तव्य मंत्र, कहा- रील से ज्यादा रियल प्रॉब्लम करें सॉल्व सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- किसी की सगी नहीं हो सकती कांग्रेस

आईआईटी पटना ने विकसित किया हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर, स्मार्ट मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव तकनीक को मिलेगा नया आयाम

👤
prativad
👁 574 व्यूज
📍 भोपाल
आईआईटी पटना ने विकसित किया हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर, स्मार्ट मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव तकनीक को मिलेगा नया आयाम
नई दिल्ली 3 अगस्त 2026। आईआईटी पटना के वैज्ञानिकों ने एक अभिनव हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर विकसित किया है, जो मैग्नेटोरियोलॉजिकल (एमआर) द्रवों के व्यवहार का पहले से अधिक सटीक विश्लेषण करने में सक्षम है। यह नई तकनीक चिकित्सा, एयरोस्पेस, रक्षा, स्वचालन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्मार्ट द्रवों के उपयोग को नई गति दे सकती है।

एमआर द्रव ऐसे "स्मार्ट फ्लूइड्स" हैं, जिनकी चिपचिपाहट चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आते ही तेजी से बढ़ जाती है। इस परिवर्तन के कारण ये द्रव लगभग ठोस जैसी स्थिति में आ जाते हैं और विद्युतचुंबकीय नियंत्रण के माध्यम से बल संचारित कर सकते हैं। यही विशेषता इन्हें ब्रेक, क्लच, शॉक एब्जॉर्बर, डैम्पर, कंपन नियंत्रण प्रणाली, एक्चुएटर और चिकित्सा उपकरणों में उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती है।

हालांकि, वास्तविक परिस्थितियों में इन द्रवों के संपीड़न और कतरनी (शियर) व्यवहार को समझना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए आईआईटी पटना के वैज्ञानिकों ने नैनो आयरन पाउडर आधारित एमआर द्रव तैयार किए और एक विशेष हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर विकसित किया।

प्रोफेसर चिरंजीत सरकार के नेतृत्व में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से तैयार इस उपकरण की मदद से चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति और अनुपस्थिति दोनों स्थितियों में एमआर द्रवों के रियोलॉजिकल (प्रवाह एवं विरूपण) तथा ट्राइबोलॉजिकल (घर्षण एवं घिसाव) गुणों का विभिन्न भारों पर परीक्षण किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने इस हाइब्रिड रियोमीटर में एमआर नमूने के क्षेत्र में कम प्रवाह के साथ उच्च तीव्रता वाला स्थिर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न कर लौह-आधारित एमआर द्रवों पर संपीड़न और कतरनी दोनों प्रकार के प्रयोग किए। परीक्षणों से पता चला कि यह प्रोटोटाइप पारंपरिक परीक्षण तकनीकों की तुलना में एमआर द्रवों के व्यवहार की अधिक व्यापक और सटीक जानकारी उपलब्ध कराता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक केवल स्मार्ट द्रवों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पॉलिमर, औषधि निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, सौंदर्य प्रसाधन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों में उपयोग होने वाली सामग्रियों के विस्कोइलास्टिक गुणों के अध्ययन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Rheologica Acta में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के अनुसार, परीक्षण प्रौद्योगिकी में यह प्रगति भविष्य की ऊर्जा-कुशल और अनुकूली तकनीकों के लिए उच्च प्रदर्शन वाले स्मार्ट मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव विकसित करने में शोधकर्ताओं और उद्योगों को नई संभावनाएं प्रदान करेगी।
Tags :