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मार्क ज़करबर्ग से माफ़ी की मांग, पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर संसद समिति ने मेटा से मांगा जवाब

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मार्क ज़करबर्ग से माफ़ी की मांग, पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर संसद समिति ने मेटा से मांगा जवाब
नई दिल्ली 4 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन वाला वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के संस्थापक एवं CEO Mark Zuckerberg से सार्वजनिक माफ़ी की मांग की है। समिति ने इस घटना को गंभीर बताते हुए मेटा की जवाबदेही तय करने की बात कही है।

सूत्रों के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के नियमन पर चर्चा हुई। बैठक में मेटा, यूट्यूब, एक्स (X), स्नैपचैट, गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के प्रतिनिधि शामिल हुए।

समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने कहा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने की घटना पर मार्क ज़करबर्ग को माफ़ी मांगनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो मेटा को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली "सेफ हार्बर" कानूनी सुरक्षा पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे निर्धारित नियमों और सावधानियों का पालन करें।

बैठक के दौरान मेटा के प्रतिनिधियों ने समिति के सामने स्वीकार किया कि वीडियो हटाया जाना एक तकनीकी या मानवीय त्रुटि का परिणाम था और इसके लिए खेद भी व्यक्त किया। हालांकि, समिति के कई सदस्यों ने इसे केवल माफ़ी तक सीमित रखने के बजाय जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा बताया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सांसदों ने वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की। समिति ने मेटा से यह भी पूछा कि उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक और विवादित सामग्री के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

भारत मेटा के लिए सबसे बड़ा बाजार है, जहां फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के संयुक्त उपयोगकर्ताओं की संख्या 1.15 अरब से अधिक बताई जाती है।

इसी बीच, भारत सरकार ने हाल के महीनों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट मॉडरेशन संबंधी नियम और कड़े किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अदालत या सरकार द्वारा चिन्हित अवैध सामग्री को अब तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले इसके लिए 36 घंटे की समय-सीमा निर्धारित थी।
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