नई दिल्ली 6 अगस्त 2026। केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में डिजिटल सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में डेटा सेंटर क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन के तहत आधुनिक तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना तैयार की जा रही है।
लोकसभा में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि डेटा सेंटर डिजिटल इंडिया की रीढ़ हैं और देश में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) के विस्तार से नई क्षमता विकसित करने की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है।
सरकार के अनुसार, भारत में अधिकांश डेटा सेंटर निजी कंपनियों द्वारा विकसित, संचालित और स्वामित्व में हैं। कंपनियां डेटा सेंटर स्थापित करने से पहले बाजार की मांग, बिजली की उपलब्धता, संचालन लागत, कुशल मानव संसाधन और दीर्घकालिक व्यावसायिक संभावनाओं जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करती हैं। इसी आधार पर विभिन्न राज्यों में डेटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि डेटा सेंटर क्षेत्र में घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों की रुचि बढ़ी है, हालांकि केंद्र सरकार इस क्षेत्र में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए कोई प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं देती।
देश में मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और गुजरात प्रमुख डेटा सेंटर हब बन चुके हैं। वर्ष 2020 में जहां कुल स्थापित क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1,575 मेगावाट हो गई है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य भी नए डेटा सेंटर निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
सरकार ने बताया कि डेटा सेंटरों में पानी की खपत इस्तेमाल की जाने वाली कूलिंग तकनीक पर निर्भर करती है। भूजल के उपयोग और औद्योगिक जल दोहन का नियमन जल शक्ति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।
उद्योग अब पारंपरिक प्रणालियों की जगह अधिक ऊर्जा और जल दक्ष तकनीकों को अपना रहा है। इनमें डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। एआई आधारित उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम के लिए क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम और हाई-डेंसिटी रैक का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बिजली और पानी दोनों की खपत कम हो रही है।
सरकार का कहना है कि इन नई तकनीकों के उपयोग से डेटा सेंटरों की जल उपयोग दक्षता (Water Usage Efficiency - WUE) में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है और एआई आधारित डिजिटल अवसंरचना को अधिक टिकाऊ बनाया जा रहा है।















