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विकिपीडिया प्रचार का माध्यम बन गया है, CIA ने भी किए संपादन: सह-संस्थापक लैरी सैंगर

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 115

9 अगस्त 2026। विकिपीडिया के सह-संस्थापक और अब इसके प्रमुख आलोचक लैरी सैंगर ने ऑनलाइन विश्वकोश की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि विकिपीडिया समय के साथ एक वैचारिक मंच में बदल गया है और इसकी सामग्री पर बड़े भाषा मॉडल यानी AI की बढ़ती निर्भरता समस्या को और गंभीर बना सकती है।



जर्मन अखबार बर्लिनर ज़ाइटुंग को दिए एक हालिया साक्षात्कार में सैंगर ने कहा कि विकिपीडिया की शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण कुछ खास वैचारिक दृष्टिकोणों का प्रभाव बढ़ा है। उनके अनुसार, प्लेटफॉर्म अब "वैश्विकतावादी, अकादमिक, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील" विचारों के पक्ष में झुका हुआ दिखाई देता है।



सैंगर ने दावा किया कि विकिपीडिया को शुरुआत से ही प्रभावशाली सूचना और प्रचार माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावना थी। उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म की गुमनाम संपादन व्यवस्था के कारण यह पता लगाना मुश्किल है कि किसी लेख में बदलाव किसने किया, लेकिन उनके अनुसार ऐसे प्रमाण मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने भी विकिपीडिया के लेखों में संपादन किए हैं।



CIA और FBI के संपादन का दावा

विकिपीडिया के गुमनाम संपादनों को लेकर विवाद 2007 में उस समय चर्चा में आया था, जब प्रोग्रामर वर्जिल ग्रिफिथ ने WikiScanner नाम का एक टूल विकसित किया था। यह टूल गुमनाम विकिपीडिया संपादनों को संबंधित संस्थानों के IP पतों से जोड़ने का प्रयास करता था।



उस समय की रिपोर्टों में CIA, FBI, कंपनियों और सरकारी संस्थानों से जुड़े IP पतों से किए गए संपादनों की पहचान किए जाने का दावा किया गया था। इनमें इराक युद्ध में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े हताहतों के आंकड़ों में किए गए बदलाव भी शामिल बताए गए थे।



हालांकि, किसी IP पते से किसी संस्था का जुड़ाव यह अपने आप साबित नहीं करता कि संपादन उसी संस्था के आधिकारिक निर्देश पर किया गया था। इसलिए इन घटनाओं को CIA या FBI की आधिकारिक नीति के प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में देखना सावधानी की मांग करता है।



AI के दौर में बढ़ सकता है प्रभाव

सैंगर की सबसे बड़ी चिंता अब AI को लेकर है। उनका कहना है कि बड़े भाषा मॉडल तथ्यात्मक सवालों के जवाब तैयार करते समय विकिपीडिया समेत इंटरनेट पर उपलब्ध स्रोतों से बड़ी मात्रा में जानकारी हासिल करते हैं। ऐसे में यदि किसी स्रोत में लगातार वैचारिक पक्षपात मौजूद है, तो उसका प्रभाव AI द्वारा तैयार किए गए जवाबों में भी दिखाई दे सकता है।



उन्होंने कहा कि विकिपीडिया की मौजूदा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी इसे पहले से ही कमजोर बनाती है और AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह समस्या और महत्वपूर्ण हो सकती है।



सैंगर ने विकिपीडिया में व्यापक सुधारों की भी मांग की है। इनमें वरिष्ठ पदाधिकारियों की सार्वजनिक पहचान, अनुशासनात्मक कार्रवाई में उचित प्रक्रिया, लेखों की सार्वजनिक रेटिंग और नीति निर्धारण के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।



विकिपीडिया की निष्पक्षता पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

विकिपीडिया की राजनीतिक और वैचारिक निष्पक्षता को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। इसके आलोचक आरोप लगाते रहे हैं कि संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर प्लेटफॉर्म हमेशा अपनी घोषित तटस्थता बनाए रखने में सफल नहीं रहा।



टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख Elon Musk भी कई बार विकिपीडिया की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने एक समय मजाकिया अंदाज में इसके नाम को बदलने की बात कही थी और प्लेटफॉर्म को लेकर सार्वजनिक बहस भी छेड़ी थी।



रूस की ओर से भी विकिपीडिया पर पश्चिम-केंद्रित दृष्टिकोण रखने के आरोप लगाए गए हैं। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने 2024 में कहा था कि प्लेटफॉर्म अक्सर घटनाओं की पश्चिमी व्याख्या को प्राथमिकता देता है और कुछ मामलों में गलत या मनगढ़ंत जानकारी भी प्रकाशित करता है।



हालांकि, विकिपीडिया पर लगाए गए राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे मौजूद हैं। इसलिए किसी एक राजनीतिक या वैचारिक पक्ष के आरोप को विकिपीडिया की पूरी सामग्री के बारे में अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।



AI के तेजी से बढ़ते दौर में यह बहस अब केवल विकिपीडिया की विश्वसनीयता तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि AI मॉडल किन स्रोतों को "विश्वसनीय" मानते हैं और इंटरनेट पर मौजूद संभावित पूर्वाग्रह भविष्य के AI जवाबों को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं।

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