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'बोल कांवड़िया, बोल बम...' सीएम डॉ. मोहन ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल, बजाया डमरू

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📍 भोपाल
'बोल कांवड़िया, बोल बम...' सीएम डॉ. मोहन ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल, बजाया डमरू
जबलपुर के रांझी में निकली संस्कार कांवड़ यात्रा
ढोल-नगाड़ों पर झूम उठा भक्तों का सैलाब
प्रदेश के मुखिया ने दिया सकारात्मक जीवन जीने का संदेश

जबलपुर 10 अगस्त 2026। 'बोल कांवड़िया, बोल बम...' जयकारा जब गूंजा तो भक्तों का रोम-रोम रोमांचित हो उठा। भक्त ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूम उठे। लगातार बजते ढोल-नगाड़ों ने माहौल को और उत्साह से भर दिया। दरअसल, मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर का माहौल 10 अगस्त को पूरी तरह भक्तिमय रहा। यहां के रांझी में संस्कार कांवड़ यात्रा निकाली गई। इस कांवड़ यात्रा में प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए। उन्होंने फूलों की बारिश कर कांवड़ियों का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने खुद कांवड़ उठाई, उत्साह से डमरू भी बजाया और दादा गुरु के साथ कांवड़ यात्रा में पैदल भी चले। इस दौरान कई जन-प्रतिनिधि भी उनके साथ थे।

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज सावन मास का पवित्र सोमवार है। आज मां नर्मदा का आशीर्वाद सबको मिल रहा है। भगवान भोलेनाथ को जल अर्पण करने के लिए कांवड़िये मां नर्मदा का जल लेकर जा रहे हैं। कांवड़ियों का सैलाब समुद्र की लहर के समान दिखाई दे रहा है। जहां तक नजर जा रही है, वहां तक कांवड़िये ही कांवड़िये दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कह कि ये कांवड़िये अपनी साधना-भक्ति-संकल्प लेकर मां नर्मदा का जल लेकर निकले हैं। मां नर्मदा भी अपने भक्तों के साथ जल के रूप में इस यात्रा में शामिल हैं।

धर्म के लिए सबकुछ कर रही सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांवड़ यात्रा तो बहुत देखीं, लेकिन इतनी बड़ी कांवड़ यात्रा में पहली बार देख रहा हूं। यह पवित्र महीना सावन भगवान भोलेनाथ की भक्ति का महीना है। यह कांवड़िये दादा गुरु के नेतृत्व में पूरे भक्ति भाव के साथ यात्रा में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार धार्मिक पर्यटन के लिए, श्रद्धालुओं के लिए, सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के कार्य कर रही है। हमारी सरकार एक तरफ इन कांवड़ यात्रियों को पूरी सुविधाएं देने का प्रयास कर रही है, दो दूसरी तरफ देव स्थानों को भी सुविधायुक्त कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की जड़ों में सनातन संस्कृति है। सनातन संस्कृति आत्म अनुशासन, प्रगति और उल्लास का मार्ग प्रशस्त करती है। सनातन संस्कृति जीवन की चुनौतियों से संघर्ष करना सिखाती है।

जीवन का मर्म केवल खाना-पीना नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज इस यात्रा में शामिल संत ये संदेश भी देते हैं कि जीवन में खाने-पीने के बजाए, पवित्र मार्ग पर चल कर परमात्मा तक पहुंचा जा सकता है। दादा गुरु ने जीवन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है कि जल के आधार पर भी जीवन गुजारा जा सकता है। दादा गुरु नर्मदा के जल के भरोसे जीवन को चलायमान किए हुए हैं। उनका आशीर्वाद हम सभी को मिलता रहे। नर्मदा के कण-कण में शंकर है। मैं इस यात्रा के लिए सभी को बधाई देता हूं।
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