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भ्रामक और धोखाधड़ी वाले मोबाइल ऐप पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 3,718 ऐप ब्लॉक

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 125

नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026। केंद्र सरकार ने साइबर अपराध और भ्रामक मोबाइल ऐप के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। गृह मंत्रालय के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के जरिए अब तक धोखाधड़ी वाले ऋण ऐप समेत 3,718 मोबाइल ऐप ब्लॉक किए जा चुके हैं।

गृह राज्य मंत्री बांदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि देश में साइबर अपराध से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है।

साइबर अपराध की शिकायत के लिए पोर्टल
I4C के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक सभी प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) के तहत कार्रवाई को तेज करने के लिए सहयोग पोर्टल भी शुरू किया है। इसके जरिए संबंधित सरकारी एजेंसियां सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थों को नोटिस भेजकर गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल की जा रही सूचना, डेटा या संचार लिंक को हटाने अथवा निष्क्रिय करने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं।

सरकार के मुताबिक, 30 जून 2026 तक I4C ने IT Act की धारा 69(A) और 79(3)(ख) के तहत कुल 3,718 मोबाइल ऐप ब्लॉक किए हैं। इनमें धोखाधड़ी वाले लोन ऐप भी शामिल हैं।

32.80 लाख से ज्यादा शिकायतें, 11,158 करोड़ रुपये की रकम बचाई
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर तत्काल कार्रवाई के लिए I4C के तहत नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) वर्ष 2021 में शुरू की गई थी।

इस प्रणाली के जरिए 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय राशि बचाई गई है। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी की सूचना मिलते ही कार्रवाई करना और जालसाजों को रकम निकालने या दूसरी जगह ट्रांसफर करने से रोकना है।

25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन पर रोक
I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10 सितंबर 2024 को संदिग्ध पहचानकर्ताओं का रजिस्टर शुरू किया था।

30 जून 2026 तक बैंकों से मिले 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं और 32.08 लाख लेयर-1 संदिग्ध खातों से जुड़ा डेटा साझा किया गया। सरकार के अनुसार, इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप 25,698 करोड़ रुपये के लेन-देन को रोका गया।

इसके अलावा, पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर सरकार ने 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक किए हैं।

साइबर फ्रॉड की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया तेज
साइबर अपराध की शिकायतों के निपटारे में एकरूपता और तेजी लाने के लिए गृह मंत्रालय ने CFCFRMS के लिए व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है।

इस व्यवस्था में शिकायतों की जांच, बैंकों के साथ समन्वय, शिकायतों का निपटारा, बैंक खातों पर अस्थायी रोक हटाना और धोखाधड़ी से बरामद रकम को वास्तविक दावेदारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को मानकीकृत किया गया है।

अप्रैल 2026 से धन वापसी प्रारूप और शिकायत निवारण मॉड्यूल भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी में फंसी रकम पीड़ितों को जल्द वापस दिलाना और बैंक खातों को फ्रीज करने या रकम पर लगाए गए ग्रहणाधिकार से जुड़ी शिकायतों का समय पर निपटारा करना है।

जागरूकता अभियान भी तेज
सरकार साइबर अपराधों से बचाव के लिए देशभर में जागरूकता अभियान भी चला रही है। इनमें कॉलर ट्यून, SMS अभियान, टीवी और रेडियो प्रचार, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, सिनेमा हॉल में विज्ञापन और रेलवे स्टेशनों तथा हवाई अड्डों पर डिजिटल डिस्प्ले शामिल हैं।

I4C अपने CyberDost सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहा है। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से साइबर सुरक्षा जागरूकता सप्ताह, छात्रों के लिए हैंडबुक, IPL जैसे बड़े आयोजनों के दौरान अभियान और विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रचार भी किया जा रहा है।

सरकार का फोकस अब केवल साइबर अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्जी ऐप की पहचान, संदिग्ध खातों और सिम कार्ड पर रोक, लेन-देन को तत्काल रोकने और पीड़ितों को रकम वापस दिलाने की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत करने पर है।

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