नई दिल्ली 12 अगस्त 2026। भारतीय वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक नया ढांचा विकसित किया है, जो कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की उन छिपी अवस्थाओं की पहचान कर सकता है, जिन्हें ट्यूमर के दोबारा होने, शरीर में फैलने और उपचार के प्रति प्रतिरोध से जोड़ा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में व्यक्ति आधारित और अधिक सटीक कैंसर उपचार विकसित करने में मदद कर सकती है।
यह शोध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत संचालित एस.एन. बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र के शोधकर्ताओं ने अशोक विश्वविद्यालय के सहयोग से किया है। शोध का नेतृत्व डॉ. शुभाशीष हलदर ने किया।
तीन अवस्थाओं में कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की पहचान
शोधकर्ताओं ने ACSCEND (AI-based Cancer Stem-like Cell Profiler and Neoplasm Deconvoluter) नामक AI ढांचा विकसित किया है। यह पारंपरिक तरीकों से अलग कैंसर स्टेमनेस का केवल एक स्कोर देने के बजाय स्टेम-लाइक कोशिकाओं की तीन विकासात्मक अवस्थाओं की पहचान करता है।
इनमें प्लुरिपोटेंट-लाइक, मल्टीपोटेंट-लाइक और यूनिपोटेंट-लाइक कोशिकाएं शामिल हैं। इससे ट्यूमर के भीतर मौजूद अलग-अलग कोशिकीय अवस्थाओं और उनकी विविधता को अधिक बारीकी से समझने में मदद मिलती है।
यह प्रणाली सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग से प्राप्त हाई-रिजॉल्यूशन जानकारी को डीप लर्निंग के साथ जोड़कर पारंपरिक बल्क ट्यूमर RNA सीक्वेंसिंग डेटा का विश्लेषण करती है। इसका फायदा यह है कि उन हजारों मरीजों के नमूनों में भी संभावित कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं का अध्ययन किया जा सकता है, जहां सिंगल-सेल प्रयोग उपलब्ध नहीं हैं।
25 हजार से अधिक ट्यूमर नमूनों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने ACSCEND की तुलना मौजूदा कम्प्यूटेशनल तरीकों से की और अलग-अलग डेटासेट तथा सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म पर इसके बेहतर प्रदर्शन का दावा किया। इसके बाद TCGA और PRECOG जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कैंसर डेटाबेस से 25,000 से अधिक ट्यूमर नमूनों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि जिन ट्यूमर में प्लुरिपोटेंट-लाइक कैंसर स्टेम कोशिकाओं की गतिविधि अधिक थी, उनमें मरीजों के जीवित रहने की संभावना कम थी। ऐसे मामलों में ट्यूमर के दोबारा होने का जोखिम अधिक और आधुनिक इम्यूनोथेरेपी का प्रभाव अपेक्षाकृत कम पाया गया।
नए दवा लक्ष्य खोजने में मदद
शोधकर्ताओं के अनुसार, ACSCEND केवल इन खतरनाक कोशिकाओं की पहचान ही नहीं करता, बल्कि उन आणविक प्रक्रियाओं को भी समझने में मदद करता है, जो कैंसर कोशिकाओं को जीवित रहने, बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होने और प्रतिरक्षा तंत्र से बचने में सक्षम बनाती हैं।
इन निष्कर्षों से भविष्य में ऐसे मरीजों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिनमें कैंसर दोबारा होने का खतरा अधिक है। साथ ही, नई दवाओं के लक्ष्यों की पहचान और मरीज की जैविक विशेषताओं के अनुरूप अधिक सटीक उपचार विकसित करने की दिशा में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
‘ऑन्कोमार्क’ पर आधारित नई तकनीक
ACSCEND शोधकर्ताओं के पहले विकसित AI प्लेटफॉर्म ‘ऑन्कोमार्क’ पर आधारित है। ऑन्कोमार्क ने बड़े पैमाने पर कोशिकीय डेटा में कैंसर के विकास से जुड़े जैविक संकेतों की पहचान करने में 99 प्रतिशत से अधिक सटीकता प्रदर्शित की थी।
नया शोध इस दिशा को आगे बढ़ाते हुए कैंसर की उन दुर्लभ कोशिकाओं पर केंद्रित है, जो संख्या में बेहद कम होने और लगातार अपना स्वरूप बदलने के कारण पारंपरिक तकनीकों से पहचानना मुश्किल होती हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, AI आधारित ऐसी तकनीकें भविष्य में कैंसर के जोखिम का आकलन, उपचार की प्रतिक्रिया का अनुमान और मरीज के अनुरूप उपचार रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, इस तरह के AI उपकरणों को नियमित क्लिनिकल उपचार में शामिल करने से पहले व्यापक चिकित्सकीय सत्यापन की आवश्यकता होगी।















