वॉशिंगटन 14 अगस्त 2026। अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ युवाओं में कथित लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े नुकसान को लेकर दायर 3,000 से अधिक मुकदमों को रोकने की मेटा और टिकटॉक की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। सैन फ्रांसिस्को स्थित नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने कंपनियों की अपील खारिज कर दी है।
मेटा और टिकटॉक ने अमेरिकी कानून के सेक्शन 230 का हवाला देते हुए इन मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान कंपनियों को कुछ मामलों में जवाबदेही से सुरक्षा देता है, लेकिन उन्हें मुकदमे से पूरी तरह छूट नहीं देता।
इन मुकदमों में मेटा, गूगल, टिकटॉक, स्नैप और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर आरोप है कि उनके प्लेटफॉर्म के डिजाइन और फीचर्स बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए बनाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इससे सोशल मीडिया की लत, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
मामले व्यक्तियों के अलावा स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स, अमेरिकी राज्यों और स्थानीय प्रशासन ने भी दायर किए हैं। हालांकि, अदालत के ताजा फैसले का अर्थ यह नहीं है कि कंपनियां नुकसान के लिए दोषी साबित हो गई हैं। अब इन मामलों में आगे कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई जारी रह सकेगी।
कोर्ट ने मेटा की उस अपील को भी खारिज कर दिया जिसमें 29 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर एक अलग मामले की कार्यवाही में देरी की मांग की गई थी। इस मामले में राज्यों ने आरोप लगाया है कि मेटा ने बच्चों का डेटा अनुचित तरीके से एकत्र किया और ऐसे फीचर्स का इस्तेमाल किया जो युवा यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर बनाए रखते हैं। मेटा ने आरोपों से इनकार किया है।
यह फैसला मार्च में आए एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के बाद आया है। लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने सोशल मीडिया की लत से जुड़े एक मामले में मेटा और गूगल को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया था और एक 20 वर्षीय महिला को 6 मिलियन डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था। दोनों कंपनियों ने फैसले में गलत काम से इनकार किया है और उसे चुनौती दी है।
दुनियाभर में बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर नियम भी सख्त किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगाने वाला कानून लागू किया है। इंडोनेशिया और मलेशिया ने भी नाबालिगों के लिए प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि ब्रिटेन और फ्रांस में भी उम्र सीमा को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
अमेरिकी अदालत का यह फैसला सोशल मीडिया कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्लेटफॉर्म डिजाइन, बच्चों की सुरक्षा और कथित डिजिटल लत को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब बड़े स्तर पर आगे बढ़ सकती है।















