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भोपाल डिजिटल तरीके से डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण में भारत में सबसे आगे: होम क्रेडिट इंडिया ग्रेट इंडिया वॉलट स्टडी 2026

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Digital Desk
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📍 भोपाल
भोपाल डिजिटल तरीके से डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण में भारत में सबसे आगे: होम क्रेडिट इंडिया ग्रेट इंडिया वॉलट स्टडी 2026

गुरुग्राम, 23 अगस्त 2026। देश की प्रमुख कंज्यूमर फाइनेंस कंपनी होम क्रेडिट इंडिया ने आज अपनी सालाना रिपोर्ट द ग्रेट इंडियन वॉलट 2026 का चौथा संस्करण जारी किया, जिसकी थीम है, टैक्स राहत से लेकर असली बदलाव तक, कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च। जीआईडब्ल्यू 4.0 स्टडी में यह साफ दिखा है कि लोगों की सोच में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसकी वजह है कर्ज तक ज्यादा पहुंच और जीएसटी सुधारों के बाद मिली आर्थिक राहत। इन दोनों वजहों से रोजमर्रा के घरेलू खर्च का बोझ कुछ कम हुआ है, लोगों का आर्थिक भरोसा मजबूत हुआ है, और अपना घर खरीदना अब भी लोगों का सबसे बड़ा लंबी अवधि का आर्थिक लक्ष्य बना हुआ है।

होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग एंड पीपल ऑफिसर आशीष तिवारी ने कहा, "जब हमने 2023 में 'द ग्रेट इंडियन वॉलट स्टडी' शुरू की थी, तब हम भारत की आर्थिक सोच को समझना चाहते थे। हमने पाया कि यह एक ऐसा देश है जो मकसद के साथ चलता है और वित्तीय मामलों में अत्यंत विवेकशील है। इस साल के निष्कर्ष अत्यंत उल्लेखनीय एवं महत्वपूर्ण रुझान दर्शाते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, जीएसटी के बाद कीमतों में हुए बदलाव से मिली असली राहत, और साथ में सही आर्थिक टूल का इस्तेमाल, लोगों के लिए संपत्ति निर्माण एवं व्यावसायिक विस्तार का मार्ग आसान बना रहा है।"

होम क्रेडिट इंडिया ग्रेट इंडिया वॉलट स्टडी 2026 के मुताबिक भोपाल डिजिटल तरीके से पैसों को संभालने के मामले में भारत का सबसे आगे रहने वाला शहर बनकर उभरा है, जहां लोग तकनीक की मदद से पैसों का हिसाब-किताब रखने, अनुशासन के साथ बचत करने और लगातार बढ़ते निवेश को लेकर काफी भरोसा दिखा रहे हैं। सर्वे में शामिल 96% लोगों का मानना है कि डिजिटल टूल उन्हें अपने आर्थिक लक्ष्य पूरे करने में मदद करते हैं, जो सर्वे में शामिल सभी शहरों में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, 67% लोग अपने मासिक खर्च पूरा करने के बाद बचत कर पा रहे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 8 प्रतिशत अंक ज्यादा है, और यह दिखाता है कि लोग आर्थिक तौर पर पहले से ज्यादा मजबूत हो रहे हैं।

भोपाल में लोगों की औसत मासिक घरेलू आमदनी 29,000 रुपये है, जबकि मासिक खर्च 17,000 रुपये है, और घरेलू खर्च में इनका हिस्सा 63% है। पिछले साल के मुकाबले इस शहर में निवेश में 29 अंकों की, जरूरी खर्च में 7 अंकों की और बचत में 7 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो यह दिखाता है कि लोग अब लंबी अवधि की आर्थिक योजना बनाने और पैसा बनाने की तरफ काफी तेजी से बढ़ रहे हैं।

जरूरी मासिक खर्च में सर्वाधिक हिस्सा खाद्यान्न व ग्रॉसरी का है, जो कुल खर्च का 27% है, इसके बाद परिवहन(18%), किराया (17%), बच्चों की पढ़ाई (15%), मेडिकल खर्च (10%), बिजली-पानी जैसे बिल (6%), रसोई गैस (4%) और मोबाइल बिल (3%) का नंबर आता है।

अपनी मर्जी से किए जाने वाले खर्च में फैशन और कपड़े (33%) सबसे ऊपर हैं, इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (21%), पर्यटन व यात्राएं (20%), घरेलू उपकरण (15%) और घर की सजावट (4%) का नंबर आता है। आगे की बात करें तो लोगों का सबसे बड़ा आर्थिक सपना है घर खरीदना (37%), इसके बाद अपना कारोबार शुरू करना (29%), बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत (12%), पुराने कर्ज चुकाना (12%) और गाड़ी खरीदना (9%) आता है।

इन सपनों को पूरा करने के लिए लोगों ने बताया कि सही ब्याज दर और लचीली किश्तों वाला कर्ज (33%) सबसे बड़ा सहारा है, इसके बाद लाइफ इंश्योरेंस (9%), हेल्थ इंश्योरेंस (8%), फिक्स्ड डिपॉजिट (6%), सोने में निवेश (5%) और म्यूचुअल फंड व एसआईपी (3%) का नंबर आता है।

भोपाल में जीएसटी से जुड़े बदलावों को लेकर जागरूकता भी काफी अच्छी है। 71% लोगों का मानना है कि जीएसटी से जुड़े बदलावों की वजह से परिवार की भलाई पर खर्च करना पहले से बेहतर हुआ है। लोगों ने बताया कि उन्हें टू-व्हीलर (26%) और कार (26%) पर साफ तौर पर बचत हुई है। जीएसटी 2.0 के बाद 14% लोग अच्छी क्वालिटी के खाने पर और 9% लोग हेल्थकेयर पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं, जो दिखाता है कि डिजिटल तरीके से पैसों को संभालने के साथ-साथ लोग परिवार की भलाई पर भी पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

द ग्रेट इंडियन वॉलट 4.0 स्टडी 18 से 55 साल की उम्र के कर्जदारों के बीच की गई, जो भारत के 17 बड़े शहरों और अलग-अलग आमदनी वर्ग व पेशों से जुड़े थे।

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