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पहली गैर-जीएमओ हाइब्रिड बीज किस्मों के शुभारंभ के साथ भारत ने पॉपकॉर्न मक्का खेती में रचा नया कीर्तिमान

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📍 भोपाल
पहली गैर-जीएमओ हाइब्रिड बीज किस्मों के शुभारंभ के साथ भारत ने पॉपकॉर्न मक्का खेती में रचा नया कीर्तिमान

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, आंध्र प्रदेश के माननीय राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गॉरमेट पॉपकॉर्निया के अनुसंधान फार्म में विकसित भारत की अपनी गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न हाइब्रिड किस्मों—कृष्णा459 और गोदावरी234—के शुभारंभ को देखा।
कृष्णा459 और गोदावरी234 भारत के किसानों को समर्पित हैं। ये कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं और आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगे।
मूल्यवर्धित अनुबंध खेती से लेकर अपने बीज के स्वामित्व तक—गॉरमेट पॉपकॉर्निया की यह पहल भारत के पॉपकॉर्न किसानों के लिए पूर्ण और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम है।

मुसुनुरु, आंध्र प्रदेश, 24 अगस्त 2026: भारत के पॉपकॉर्न उद्योग के लिए एक दशक से अधिक समय से प्रतीक्षित महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कृष्णा459 और गोदावरी234 का शुभारंभ किया। ये भारत की पहली उच्च-विस्तार क्षमता वाली गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज किस्में हैं, जिन्हें दुनिया की बेहतरीन मक्का किस्मों के अनुरूप पॉपिंग गुणवत्ता प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इनका शुभारंभ मुसुनुरु स्थित गॉरमेट पॉपकॉर्निया के कारखाने में किया गया। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नज़ीर और आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में देश के आठ राज्यों से आए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों और साझेदारों को सम्मानित किया गया।

यह शुभारंभ भारत के किसानों के साथ गॉरमेट पॉपकॉर्निया की दीर्घकालिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण अगला कदम है। कंपनी ने किसानों को पारंपरिक कमोडिटी मक्का खेती से हटाकर मूल्यवर्धित, अनुबंध आधारित पॉपकॉर्न मक्का खेती की ओर बढ़ाया, जिसमें विशेष फसल के लिए सुनिश्चित खरीद और बेहतर मूल्य की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कृष्णा459 और गोदावरी234 के साथ किसानों को अब इससे भी अधिक महत्वपूर्ण लाभ—स्वदेशी आनुवंशिक तकनीक पर स्वामित्व—प्राप्त होगा। आयातित हाइब्रिड बीजों पर निर्भर रहने के बजाय किसान अब भारत में विकसित, परीक्षण किए गए और स्वामित्व वाले हाइब्रिड की खेती कर सकेंगे, जिन्हें बेहतर उपज, प्रोसेसर-ग्रेड गुणवत्ता और अपनी फसल से पैदा होने वाले मूल्य में किसानों की अधिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।

“आज हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक छोटा लेकिन दृढ़ कदम उठा रहे हैं—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक बीज है। इस स्वदेशी हाइब्रिड से खेती किया गया हर एक एकड़ ऐसा एकड़ है, जिसे अब आयातित विकल्प की आवश्यकता नहीं होगी। और ऐसे प्रत्येक एकड़ से होने वाली बचत हमारे अपने किसानों की आय और देश के आर्थिक विकास में पुनर्निवेश होगी।”

— श्री सी. पी. राधाकृष्णन, माननीय उपराष्ट्रपति, भारत

वर्षों से भारत में सिनेमाघरों और प्रीमियम रिटेल में बिकने वाला उच्च गुणवत्ता वाला पॉपकॉर्न काफी हद तक अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से आयातित बीज और अनाज पर निर्भर रहा है। कृष्णा459 और गोदावरी234 आयात पर इस निर्भरता का स्वदेशी समाधान प्रस्तुत करते हैं। भारत के प्रमुख मक्का अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी में पांच फसल मौसमों के दौरान विकसित और परीक्षण की गईं ये दोनों हाइब्रिड किस्में प्रमुख आयातित किस्मों के समान दाने के आकार और पॉपिंग क्षमता प्रदान करती हैं। साथ ही, इनमें भारतीय किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप कीट सहनशीलता, कम अवधि में तैयार होने और बेहतर उपज जैसी विशेषताएं हैं। दोनों हाइब्रिड मिलकर कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में गॉरमेट पॉपकॉर्निया के अब तक के सबसे महत्वपूर्ण योगदान का प्रतिनिधित्व करते हैं।

“यह हाइब्रिड ठीक उसी प्रकार के कृषि-तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, जिसकी हमारी ‘स्वर्णांध्र 2047’ की परिकल्पना मांग करती है—ऐसी तकनीक जो किसान का स्थान न ले, बल्कि उसे सशक्त बनाए। जब हमारे किसान सफल होंगे, तो आंध्र प्रदेश सफल होगा और जब आंध्र प्रदेश सफल होगा, तो भारत विकसित भारत के लक्ष्य के और करीब पहुंचेगा।”

— श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, माननीय मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

 

गॉरमेट पॉपकॉर्निया के साथ आठ राज्यों में लगभग 40,000 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे 17,500 से अधिक किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। प्रति एकड़ औसतन 4.5 टन गीले भुट्टे की उपज और प्रोसेसर-ग्रेड मानकों के अनुरूप पॉपिंग गुणवत्ता के साथ, कृष्णा459 और गोदावरी234 की खेती करने वाले किसानों को सुनिश्चित खरीद और अनुबंध मूल्य का लाभ मिलेगा, जो अब तक मुख्य रूप से आयातित अनाज के लिए उपलब्ध था। इससे छोटे और सीमांत किसान परिवारों की आय में प्रत्यक्ष और दीर्घकालिक सुधार होने की उम्मीद है। यह देशभर के किसानों की वृद्धि और समृद्धि के प्रति गॉरमेट पॉपकॉर्निया की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।

“यह किसी कंपनी की कहानी नहीं है—यह आठ राज्यों के 17,500 से अधिक किसानों की कहानी है, जिन्होंने विश्वास किया कि इससे बेहतर फसल संभव है। कृष्णा459 और गोदावरी234 हमारे प्रति उनके विश्वास का उत्तर और गॉरमेट पॉपकॉर्निया के साथ साझेदारी करने वाले प्रत्येक किसान के प्रति हमारी श्रद्धांजलि हैं। आज हम उस क्षण के साक्षी बन रहे हैं, जिसका भारतीय कृषि लंबे समय से इंतजार कर रही थी—वह दिन जब भारत की अपनी मिट्टी, भारत के अपने विज्ञान और भारत के अपने किसानों ने देश के पहले गैर-जीएमओ, उच्च-विस्तार क्षमता वाले पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज को जन्म दिया। मेरे लिए और गॉरमेट पॉपकॉर्निया की पूरी टीम के लिए यह केवल एक कॉर्पोरेट उपलब्धि नहीं है; यह आत्मनिर्भर भारत के विजन को समर्थन देने वाला कदम है।”

— श्री एस.बी.पी. पट्टाभि रामा राव, प्रबंध निदेशक, गॉरमेट पॉपकॉर्निया

भारतीय अर्थव्यवस्था को भी इससे महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत का पॉपकॉर्न मक्का बाजार 2014-15 में लगभग 50,000 टन से बढ़कर 2025-26 में करीब 1.3 लाख टन हो गया है। वहीं, घरेलू उत्पादन अब देश की कुल मांग का लगभग 70 प्रतिशत पूरा कर रहा है। यह उस बाजार में बड़ा बदलाव है, जो कभी लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर था। स्थानीय उत्पादन में वृद्धि से अकेले 2025-26 में अनुमानित ₹810 करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। कृष्णा459 और गोदावरी234 जैसे हाइब्रिड के व्यापक स्तर पर खेती में आने के साथ भारत 2030 तक पॉपकॉर्न के आयात को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे इस आर्थिक मूल्य को विदेश भेजने के बजाय भारतीय खेतों और गांवों में बनाए रखने में मदद मिलेगी।

“मैंने अपना पूरा जीवन नेब्रास्का में पॉपकॉर्न उगाते हुए बिताया है और मैं कह सकता हूं कि गॉरमेट पॉपकॉर्निया ने यहां जो विकसित किया है, वह हमारे यहां उगाए जाने वाले किसी भी पॉपकॉर्न के बराबर है। भारत के पास अब वह आनुवंशिक तकनीक, किसान और उत्पादन क्षमता है, जिसके बल पर वह दुनिया के प्रमुख पॉपकॉर्न उत्पादक देशों में शामिल हो सकता है। हमें इस यात्रा का हिस्सा होने पर गर्व है।”

— श्री नॉर्म क्रुग, संस्थापक एवं सीईओ, प्रेफर्ड पॉपकॉर्न, अमेरिका

अब तक भारत मुख्य रूप से दुनिया के अन्य हिस्सों में विकसित उच्च गुणवत्ता वाली पॉपकॉर्न आनुवंशिक तकनीक का उपभोक्ता रहा है। कृष्णा459 और गोदावरी234 द्वारा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय किस्मों के समान गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के साथ भारत उच्च गुणवत्ता वाले पॉपकॉर्न के आयातक से उसके उत्पादक देश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश के पास विशाल कृषि भूमि और किसानों का ऐसा आधार है, जो भविष्य में भारत को पारंपरिक पॉपकॉर्न उत्पादक देशों के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बना सकता है।

भारत के उन करोड़ों लोगों के लिए, जो सिनेमाघरों, घरों या यात्रा के दौरान पॉपकॉर्न का आनंद लेते हैं, अनुभव में कोई बदलाव नहीं होगा। वही बड़ा, हल्का और स्वादिष्ट पॉपकॉर्न पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। बदलाव केवल इतना होगा कि अब यह भारतीय खेत, भारतीय हाइब्रिड और ऐसी आपूर्ति श्रृंखला से आएगा, जो वैश्विक शिपिंग लागत, शुल्क और आपूर्ति बाधाओं के प्रति कहीं कम संवेदनशील होगी।

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