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ममता खेड़े की पुस्तक 'लोकावतरण" हुई लोकार्पित

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Digital Desk
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📍 भोपाल
ममता खेड़े की पुस्तक 'लोकावतरण" हुई लोकार्पित

'लोकावतरण' वैदिक शास्त्रों और लोक दोनों की आपसी समृद्धि का प्रतीक है–संतोष चौबे

26 अगस्त 2026। सुप्रसिद्ध कवि, अनुवादक, लोक विदुषी तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. ममता खेड़े की पुस्तक "लोकावतरण " का लोकार्पण 26 अगस्त को प्रशासन अकादेमी, भोपाल के सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार, चिंतक, विश्वरंग के निदेशक श्री संतोष चौबे ने कहा कि शास्त्रों का लोक बोलियों में लोकावतरण शास्त्रों और लोक दोनों की आपसी समृद्धि का प्रतीक है। वर्तमान समय में इन्हें अनवरत समृद्ध करते रहते की महती आवश्यकता है। ममता खेड़े जी ने वैदिक सूक्तों का न सिर्फ निमाड़ी में वरन हिंदी में भी बहुत सुंदर और भावप्रधान लोकावतरण किया है। उन्होंने यह बहुत कठिन और विरल कार्य संभव किया है। हमारे वेदों के ज्ञान में समावेशी और सहयोगात्मक दृष्टिकोण भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल है। ममता जी की पुस्तक में वैदिक सूक्तों को लोक बोली में पढ़ते हुए एक आध्यात्मिक शक्ति हमारे अंतर्मन में प्रवेश कर हमें भीतर तक भींगो जाती है।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ विचारक, चिंतक और प्रशासनिक अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 'लोकावतरण' में डॉ. ममता खेड़े द्वारा प्रत्येक सूक्त में हर मंत्र को सर्वप्रथम संस्कृत में यथावत् लिखा गया, फिर निमाड़ी में भावान्तर प्रस्तुत किया गया और फिर निमाड़ी का हिंदी में अनुवाद किया गया, इस तरह वेद के प्रसाद को भाषा की त्रिवेणी में प्रस्तुत करने का यह श्रमसाध्य मंगलकारी प्रयास हमें लोक और आध्यात्म की अनुभूति प्रदान करता हैं।

विशिष्ट अतिथि श्री शिवनारायण मिश्र, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति पवित्र नदियों के किनारों–घाटों पर विकसित और पल्लवित हुई है। ममता जी ने वैदिक सूक्तों का संस्कृत से लोक बोली निमाड़ी और हिंदी भाषा में अनुवाद सही अर्थों में लोक में अध्यात्म का अवतरण है। इस पुस्तक में वैदिक सूक्तों की चमक और खनक संपूर्ण लोक की सौंधी महक के साथ उपस्थित हैं।

प्रशासन अकादमी के निदेशक श्री मुजीबुर्रहमान जी ने ममता खेड़े जी को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक एक दार्शनिक पुस्तक है। ममता जी की इस पुस्तक ने हम सभी को गौरवांवित होने का अवसर प्रदान किया है।

'लोकावतरण' पुस्तक की लेखिका डॉ. ममता खेड़े ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुस्तक की यात्रा बहुत लंबी कहानी है। यह पुस्तक अपनी जिज्ञासाओं का अपनी बोली में रूपांतरण करने का प्रयास भर है। इस भावांतर में ना तो वेदविद् होने का दावा है, न ही संस्कृत के अधिकार का। इन वैदिक कविताओं की शैली और स्वर लोक शैली के मूल स्वर के निकट अनुभव हुए। भावांतर करते हुए अपनी बोली के रस का पूनः आस्वाद किया तथा वेद-वाणी के मौलिक सौंदर्य का रसपान भी– इन सभी रचनाओं से मेरा प्राप्य यही है। 

डॉ. ममता खेड़े ने आगे कहा कि आम जनमानस में वेद बहुत कठिन और जटिल विचार है। ये रचनाएँ वेदों की मौलिक चिंतन प्रणाली के सहज और भावगम्य पहलू को सबके लिए खोल देने का प्रयास भर है। हर कोई एक–एक सूक्त एक–एक मंत्र से अपने लिए, अपने युग के लिए अपना प्राप्य प्राप्त कर सकता है। जिसकी दृष्टि में जितना विस्तार है, श्रुति भगवती का उतना प्रसाद उसे प्राप्त होता है। इस अवसर पर डॉ. ममता खेड़े ने इस अवसर लोकार्पित पुस्तक से वैदिक सूक्तों का संस्कृत, निमाड़ी और हिंदी में बहुत सुंदर पाठ किया।

लोकार्पण समारोह के सूत्रधार कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि डॉ. ममता खेड़े ने 'लोकावतरण' में वैदिक सूक्तों का निमाड़ी बोली और हिंदी भाषा  में लोक के उजास से दमकते अर्थ के साथ भावान्तरण प्रस्तुत किया है। संभवतः यह भारतीय ज्ञान परंपरा के लोक विस्तार में बोली को लेकर किया गया अद्वितीय रचनात्मक कार्य है। इस पुस्तक का प्रकाशन आईसेक्ट पब्लिकेशन ने किया है। 

वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी ने अतिथियों का स्वागत पुष्पदल भेंटकर किया एवं स्वागत वक्तव्य देते हुए 'लोकावतरण' पुस्तक को एक विशिष्ट ग्रंथ के रूप में परिभाषित किया।

आभार आईसेक्ट पब्लिकेशन के वरिष्ठ प्रबंधक श्री महीप निगम द्वारा व्यक्त किया गया।

राष्ट्रीय वनमाली सृजन पीठ, आईसेक्ट पब्लिकेशन, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय तथा विश्वरंग फाउंडेशन के संयोजन में परिकल्पितइस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सहित्यकारों,  साहित्यप्रेमियों, प्रशासन अकादमी के अधिकारियों, आर.एन.टी.यू. एवं एस.जी.एस.यू. के प्राध्यापकों आदि ने रचनात्मक भागीदारी की।

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