31 अगस्त 2026। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की सतह के नीचे एक विशाल थर्मल एनोमली यानी तापमान में असामान्य अंतर का पता लगाया है। नई रिसर्च के अनुसार, मंगल के दक्षिणी गोलार्ध के नीचे मौजूद मैंटल का तापमान उत्तरी हिस्से की तुलना में 400 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है।
इस खोज ने मंगल के उत्तर और दक्षिण के बीच मौजूद रहस्यमयी अंतर को समझने की दिशा में नई संभावनाएं पैदा की हैं। वैज्ञानिक पहले से जानते हैं कि मंगल की सतह दोनों गोलार्धों में एक जैसी नहीं है। उत्तरी हिस्से में अपेक्षाकृत निचले और समतल मैदान हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध ऊंचे, गड्ढों वाले और मोटी परत वाले क्षेत्रों से बना है।
नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने मंगल के अंदरूनी हिस्से में भी इसी तरह की बड़ी असमानता के संकेत पाए हैं।
तीन नासा मिशनों के डेटा का किया विश्लेषण
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) के पूर्व शोधकर्ता और वर्तमान में एरिज़ोना यूनिवर्सिटी से जुड़े अलेक्जेंडर बर्न के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने नासा के तीन अंतरिक्ष मिशनों के पुराने डेटा का विश्लेषण किया।
इनमें मार्स ग्लोबल सर्वेयर, मार्स ओडिसी और मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर से प्राप्त आंकड़े शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने इन अंतरिक्ष यानों की कक्षा में गति के दौरान होने वाले बेहद छोटे बदलावों का अध्ययन किया। ये बदलाव मंगल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र और ग्रह के अंदर मौजूद पदार्थों की संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
टीम ने बर्न द्वारा विकसित ‘टाइडल टोमोग्राफी’ तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक में मंगल पर सूर्य के बदलते गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को भी ध्यान में रखते हुए ग्रह के अंदरूनी तापमान और संरचना का मॉडल तैयार किया गया।
दक्षिणी मैंटल उत्तर से 200 से 400 डिग्री ज्यादा गर्म
रिसर्च के अनुसार, मंगल के दक्षिणी गोलार्ध के नीचे मौजूद मैंटल उत्तरी हिस्से की तुलना में लगभग 200 से 400 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि दक्षिणी हिस्से के कुछ क्षेत्र इतने गर्म हो सकते हैं कि वहां का पदार्थ अभी भी आंशिक रूप से पिघली हुई अवस्था में मौजूद हो।
यह खोज मंगल के भूगर्भीय इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह भी पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लाल ग्रह कितने समय तक ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय रहा और वहां जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां कितने समय तक मौजूद रही होंगी।
मंगल की सतह भी दो अलग-अलग दुनिया जैसी
मंगल की सतह पर उत्तर और दक्षिण के बीच पहले से ही बड़ा अंतर देखा गया है।
उत्तरी गोलार्ध में निचले मैदानी इलाके हैं, जबकि दक्षिणी हिस्से की क्रस्ट औसतन लगभग 25 किलोमीटर अधिक मोटी है। दक्षिणी क्षेत्र में ऊंचे और गड्ढों से भरे इलाके पाए जाते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तरी निचले इलाकों में कभी विशाल महासागर भी मौजूद रहा हो सकता है।
रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक अमीरहोसैन बघेरी के अनुसार, उत्तर और दक्षिण के बीच मौजूद अंतर को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन प्रक्रियाओं की जानकारी मिल सकती है, जिन्होंने मंगल के जल-विज्ञान और पानी वाले बेसिनों के निर्माण को प्रभावित किया।
इनसाइट मिशन की खोज को भी मिल सकता है जवाब
दक्षिणी हिस्से में अधिक तापमान की यह नई खोज नासा के इनसाइट लैंडर से मिले कुछ रहस्यमयी संकेतों को भी समझाने में मदद कर सकती है।
इनसाइट मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया था कि मंगल के दक्षिणी हिस्से में भूकंपीय तरंगें अपेक्षाकृत तेजी से कमजोर हो जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका एक कारण वहां का अधिक तापमान हो सकता है।
नई थर्मल एनोमली दक्षिणी मंगल में पाए गए आयरन वाले खनिजों से जुड़ी चुंबकीय विसंगतियों को समझने में भी मदद कर सकती है।
क्या विशाल टक्कर ने बदल दिया था मंगल का अंदरूनी ढांचा?
वैज्ञानिकों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंगल के उत्तर और दक्षिण के बीच इतनी बड़ी असमानता आखिर पैदा कैसे हुई।
एक प्रमुख संभावना यह है कि करीब चार अरब वर्ष पहले मंगल के उत्तरी हिस्से में किसी विशाल खगोलीय पिंड की टक्कर हुई हो। इस टक्कर से एक विशाल इम्पैक्ट बेसिन बना होगा, जिसके कारण उत्तरी हिस्से से बड़ी मात्रा में गर्मी बाहर निकल गई होगी।
इससे उत्तरी मैंटल दक्षिणी हिस्से की तुलना में तेजी से ठंडा हो गया होगा।
दूसरी ओर, दक्षिणी हिस्से की मोटी क्रस्ट ने ढक्कन की तरह काम करते हुए अंदर की गर्मी को लंबे समय तक बाहर निकलने से रोका होगा।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई दिशा
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में अधिक सटीक ग्रेविटी डेटा मिलने पर मंगल के अंदरूनी ढांचे की त्रि-आयामी तस्वीर तैयार की जा सकेगी।
टाइडल टोमोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में बुध ग्रह से लेकर बृहस्पति के बड़े चंद्रमाओं तक अन्य खगोलीय पिंडों के अध्ययन में भी किया जा सकता है।
अलेक्जेंडर बर्न के अनुसार, ग्रहों की आंतरिक संरचना को समझने से उनके निर्माण और विकास की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से जाना जा सकता है।
हालांकि मंगल के उत्तर-दक्षिण विभाजन का असली कारण अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी तय नहीं है कि सतह पर दिखाई देने वाली असमानता और ग्रह के अंदर मौजूद तापमान का अंतर एक ही घटना का परिणाम हैं या नहीं।
मंगल की इस विशाल थर्मल विसंगति पर आधारित रिसर्च को 27 अगस्त को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में प्रकाशित किया गया था। यह खोज लाल ग्रह के भूगर्भीय इतिहास और उसके अंदर छिपे रहस्यों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।