2 सितंबर 2026। रूस के प्रमुख बैंक स्बेरबैंक ने भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में नई दिल्ली में दो बिज़नेस टावर खरीदे हैं। बैंक का कहना है कि इन टावरों को भविष्य में रूस-भारत व्यापार और सहयोग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
व्लादिवोस्तोक में आयोजित Eastern Economic Forum के दौरान स्बेरबैंक ने इस योजना की जानकारी दी। बैंक के अनुसार, ‘समिट टावर्स’ परियोजना का निर्माण 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है।
TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, स्बेरबैंक के फर्स्ट डिप्टी चेयरमैन अलेक्जेंडर वेद्याखिन ने कहा कि यह सौदा भारत में बैंक के व्यापक विस्तार की रणनीति का हिस्सा है। इसमें बैंकिंग के साथ रियल एस्टेट सेक्टर में भी निवेश शामिल है।
करीब 500,000 वर्ग फुट में फैले हैं दोनों टावर
बैंक ने इस खरीद की आधिकारिक कीमत सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि, भारतीय मीडिया की पहले की रिपोर्टों में कहा गया था कि स्बेरबैंक ने दक्षिण दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित भारत बिज़नेस पार्क में दो ऑफिस टावर लगभग 210 मिलियन डॉलर यानी करीब 20 अरब रुपये में खरीदे थे।
यह परियोजना सरकारी निर्माण कंपनी NBCC (India) Limited द्वारा विकसित की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों टावरों का कुल क्षेत्रफल लगभग 5 लाख वर्ग फुट है।
भारत बिज़नेस पार्क नई दिल्ली की प्रमुख रिंग रोड के सामने स्थित है और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, भीकाजी कामा प्लेस के व्यावसायिक क्षेत्र तथा हयात होटल के आसपास है। परियोजना के आठ में से पांच टावर पहले ही नीलामी के जरिए बेचे जा चुके हैं।
दिल्ली में रूसी बिज़नेस सेंटर की भी योजना
स्बेरबैंक ने जून में नई दिल्ली में एक ‘रशियन बिज़नेस सेंटर’ स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की थी। इस केंद्र के माध्यम से भारत में काम कर रही रूसी कंपनियों को बैंकिंग सेवाओं के अलावा कानूनी, टैक्स और ऑडिट से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।
स्बेरबैंक पिछले 15 वर्षों से भारत में सक्रिय है। बैंक के कार्यालय नई दिल्ली और मुंबई में हैं, जबकि बेंगलुरु में उसका एक आईटी हब भी मौजूद है। बैंक आने वाले समय में भारत के 10 स्थानों तक अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रहा है।
भारत-रूस व्यापार को नई रफ्तार देने की तैयारी
स्बेरबैंक का यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और रूस अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 59.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
दोनों देशों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने, कारोबारी संपर्क बढ़ाने और कंपनियों के बीच नियमित संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।
दिल्ली में बनने वाला यह नया ट्रेड और सहयोग हब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।