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OCD को लेकर बड़ी वैज्ञानिक खोज, शोधकर्ताओं ने पहचाने 36 जोखिम वाले जीन

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Digital Desk
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📍 भोपाल
OCD को लेकर बड़ी वैज्ञानिक खोज, शोधकर्ताओं ने पहचाने 36 जोखिम वाले जीन

4 सितंबर 2026। ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर यानी OCD को लेकर वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है। शोधकर्ताओं ने OCD और लंबे समय तक रहने वाले टिक डिसऑर्डर से जुड़े 36 ऐसे जीन की पहचान की है, जो बीमारी के जोखिम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यह अध्ययन Nature Neuroscience में 1 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने करीब 4,000 लोगों के पूरे एक्सोम सीक्वेंसिंग डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन में OCD, chronic tic disorders और दोनों स्थितियों से प्रभावित लोगों को शामिल किया गया था।

पहली बार इतने जीन की पहचान

OCD और chronic tic disorders को काफी हद तक आनुवंशिक यानी hereditary माना जाता है। हालांकि, अब तक इन बीमारियों से सीधे तौर पर जुड़े बहुत कम जीन की पहचान हो सकी थी।

नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने 36 high-confidence risk genes की पहचान की है। इनमें कुछ ऐसे जीन भी हैं जिनका संबंध पहले से OCD और दूसरे neurodevelopmental disorders से सामने आया है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन जीन में होने वाले दुर्लभ बदलाव कुछ लोगों में बीमारी का जोखिम काफी बढ़ा सकते हैं।

OCD और टिक डिसऑर्डर के बीच कनेक्शन

OCD में व्यक्ति को बार-बार आने वाले अनचाहे विचार या मानसिक छवियां परेशान कर सकती हैं। इन विचारों से पैदा होने वाली बेचैनी कम करने के लिए व्यक्ति बार-बार कुछ व्यवहार या मानसिक क्रियाएं कर सकता है।

दूसरी ओर, chronic tic disorders में बार-बार अनियंत्रित शारीरिक गतिविधियां या आवाजें निकालने की समस्या हो सकती है। Tourette syndrome इसका एक जाना-पहचाना उदाहरण है।

नई रिसर्च में सामने आया कि दोनों स्थितियों में कई genetic risk factors साझा हैं। अध्ययन में पहचाने गए 36 जीन में से बड़ी संख्या OCD और tic disorders दोनों से जुड़े पाए गए।

दिमाग के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ा संकेत

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि इन जोखिम वाले जीन की गतिविधि मस्तिष्क के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों में दिखाई देती है। इनमें cortex, striatum और cerebellum से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।

यह संकेत देता है कि OCD और tic disorders के पीछे केवल एक अकेली जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मस्तिष्क के कई नेटवर्क और जैविक pathways की भूमिका हो सकती है।

ऑटिज्म और स्किजोफ्रेनिया से भी संबंध

रिसर्च का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कुछ identified genes का संबंध autism spectrum disorder और schizophrenia जैसे अन्य neurodevelopmental और psychiatric disorders से भी पाया गया।

इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के पीछे कुछ साझा जैविक mechanisms किस तरह काम करते हैं।

क्या इससे OCD का नया इलाज संभव होगा?

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन जीन की पहचान भविष्य में बीमारी के biological mechanisms को समझने और नई दवाओं या targeted treatments की खोज में मदद कर सकती है।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इन 36 जीन की खोज के आधार पर तुरंत कोई नया इलाज उपलब्ध हो जाएगा। यह रिसर्च मुख्य रूप से बीमारी के genetic और biological आधार को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अध्ययन में पाया गया कि दुर्लभ और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले genetic variants प्रभावित लोगों के एक छोटे हिस्से में मौजूद थे और कुछ मामलों में उनका प्रभाव काफी बड़ा था।

OCD को लेकर सोच बदल सकती है यह खोज

OCD को लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य की समस्या के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन नई genetic research इसके पीछे मौजूद जटिल biological mechanisms को समझने की तस्वीर को और स्पष्ट कर रही है।

वैज्ञानिकों के लिए अगली चुनौती यह पता लगाना होगी कि इन जीन में बदलाव मस्तिष्क के विकास और neural circuits को किस तरह प्रभावित करते हैं। यही जानकारी भविष्य में अधिक सटीक और व्यक्ति-विशेष के अनुरूप उपचार विकसित करने में मदद कर सकती है।

फिलहाल 36 जीन की यह खोज OCD और tic disorders की जैविक जड़ों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम मानी जा रही है।

स्रोत: Nature Neuroscience, 1 सितंबर 2026; Reuters.

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