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भोपाल-देवास रोड पर अब बिना रुके कटेगा टोल, फंदा प्लाजा पर बैरियर-लेस सिस्टम का ट्रायल

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Digital Desk
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📍 भोपाल
भोपाल-देवास रोड पर अब बिना रुके कटेगा टोल, फंदा प्लाजा पर बैरियर-लेस सिस्टम का ट्रायल

5 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में टोल वसूली की व्यवस्था अब एक बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रही है। भोपाल-देवास रोड स्थित फंदा टोल प्लाजा पर प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (Single Lane Free Flow - SLFF) का पायलट परीक्षण शुरू किया गया है। नई व्यवस्था सफल रहती है तो वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने या बूम बैरियर खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वाहन टोल लेन से गुजरते समय लगातार गति में रह सकेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सिस्टम करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों की पहचान और टोल प्रक्रिया को संभालने के लिए तैयार किया गया है।

अभी सिर्फ एक लेन में हो रहा परीक्षण
फिलहाल बैरियर-लेस टोलिंग का ट्रायल फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में किया जा रहा है। इस चरण में सिस्टम की विश्वसनीयता, वाहन की पहचान, वाहन की श्रेणी निर्धारित करने और टोल भुगतान की प्रक्रिया को परखा जा रहा है। परीक्षण के परिणामों के आधार पर आगे इसका विस्तार किया जाएगा।

मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू कर रहा है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी अधिकारियों को पायलट के परिणामों के आधार पर तकनीक की उपयोगिता, कार्यक्षमता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधा का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।

कैसे काम करेगा बैरियर-लेस टोल सिस्टम?
मौजूदा टोल प्लाजा में वाहन को बैरियर के सामने गति कम करनी पड़ती है और कई बार पूरी तरह रुकना पड़ता है। नई व्यवस्था में बूम बैरियर की जगह तकनीक आधारित सिस्टम वाहन की पहचान करेगा।

इसमें मुख्य रूप से FASTag/RFID रीडर, हाई-रिजॉल्यूशन ANPR कैमरे, वाहन डिटेक्शन और क्लासिफिकेशन सेंसर तथा लेन कंट्रोल और ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। वाहन के गुजरते ही सिस्टम उसकी पहचान और श्रेणी निर्धारित करेगा तथा संबंधित FASTag खाते से टोल राशि की प्रक्रिया पूरी होगी।

यानी वाहन चालक के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि टोल देने के लिए गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं होगी।

FASTag में पैसे नहीं हुए तो क्या होगा?
नई व्यवस्था में एक अहम सवाल यह है कि अगर FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं हुआ तो क्या होगा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसी स्थिति में सिस्टम वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर ई-चालान जारी कर सकता है। गलत रजिस्ट्रेशन विवरण या किसी तकनीकी समस्या के कारण तत्काल टोल वसूली नहीं हो पाने की स्थिति में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक बकाया राशि निर्धारित समय में जमा नहीं करने पर नियमों के अनुसार जुर्माने और वसूली की कार्रवाई हो सकती है।

इसलिए नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों के लिए FASTag का सक्रिय और पर्याप्त बैलेंस में रहना पहले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

1 जनवरी 2027 से पूरे भोपाल-देवास मार्ग पर लागू करने की तैयारी
अगर फंदा टोल प्लाजा का पायलट सफल रहता है, तो 1 जनवरी 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में बैरियर-लेस टोलिंग लागू करने की योजना है। इस मार्ग के तीन टोल प्लाजा फंदा, अमलाहा और भौरासा बताए गए हैं।

इसके बाद मध्य प्रदेश के दूसरे उपयुक्त टोल प्लाजा पर भी इस तकनीक को लागू करने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।

वाहन चालकों को क्या फायदा होगा?
बैरियर-लेस टोलिंग का उद्देश्य केवल टोल वसूली को डिजिटल बनाना नहीं है। इसके पीछे ट्रैफिक की गति बनाए रखना भी एक बड़ा लक्ष्य है।

इसके लागू होने से:
टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार कम हो सकती है।
बार-बार ब्रेक लगाने और दोबारा गति बढ़ाने की जरूरत घटेगी।
यात्रा के समय में बचत हो सकती है।
ईंधन की खपत कम होने की उम्मीद है।
टोल प्लाजा पर ट्रैफिक फ्लो ज्यादा सुचारु हो सकता है।
टोल भुगतान की प्रक्रिया ज्यादा स्वचालित होगी।

सरकार का उद्देश्य टोल प्लाजा पर अनावश्यक रुकावट और भीड़ को कम करके वाहनों को लगातार गति में रखना है।

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