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भारत को मिली 24x7 निगरानी की नई ताकत, EOS-05 सैटेलाइट से अब अंतरिक्ष से लगातार नजर

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Digital Desk
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📍 भोपाल
भारत को मिली 24x7 निगरानी की नई ताकत, EOS-05 सैटेलाइट से अब अंतरिक्ष से लगातार नजर

श्रीहरिकोटा 5 सितंबर 2026। भारत ने अंतरिक्ष निगरानी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च किया है, जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारतीय क्षेत्र पर लंबे समय तक लगातार नजर रखने में सक्षम होगा। EOS-05 नाम का यह उपग्रह प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी से लेकर कृषि, मौसम और रणनीतिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
EOS-05 को शुक्रवार सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद उपग्रह को निर्धारित ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया।

एक ही क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की क्षमता
ISRO के अनुसार, EOS-05 का प्रमुख उद्देश्य भारतीय क्षेत्र की लगातार निगरानी (Persistent Monitoring) करना है। इससे पहले इस्तेमाल किए जा रहे कई अर्थ-इमेजिंग सैटेलाइट अपेक्षाकृत निचली कक्षाओं में रहते हैं और किसी स्थान की दोबारा तस्वीर लेने के लिए उन्हें उस क्षेत्र के ऊपर से फिर गुजरना पड़ता है।

इसके विपरीत, जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में काम करने वाला EOS-05 किसी बड़े क्षेत्र पर लंबे समय तक नजर बनाए रख सकता है। इसकी कैमरा प्रणाली को किसी खास इलाके की ओर मोड़कर चयनित स्थानों की तस्वीरें भी ली जा सकती हैं।

ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन के मुताबिक, सैटेलाइट लगातार निगरानी कर सकता है और जरूरत के अनुसार किसी विशेष स्थान की तस्वीर भी ली जा सकती है।

सीमा सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका
EOS-05 की क्षमता का रणनीतिक और सैन्य महत्व भी है। लगातार और अधिक तेजी से मिलने वाली सैटेलाइट तस्वीरें भारत को संवेदनशील सीमा क्षेत्रों पर निगरानी मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

सेवानिवृत्त भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल अरुण साहनी के अनुसार, लगातार निगरानी से सीमावर्ती इलाकों में जमीन की स्थिति, संसाधनों और सैन्य गतिविधियों में होने वाले बदलावों का तेजी से पता लगाया जा सकता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को संभावित घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिक समय मिल सकता है।

विशेष रूप से पाकिस्तान और चीन से लगी संवेदनशील सीमाओं पर ऐसी तकनीक भारत की निगरानी क्षमता को मजबूत कर सकती है।

बाढ़, चक्रवात और जंगल की आग पर भी नजर
EOS-05 का इस्तेमाल केवल रक्षा और सुरक्षा के लिए नहीं होगा। यह तेजी से बदलने वाली प्राकृतिक घटनाओं की निगरानी में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

सैटेलाइट से मिलने वाली लगातार तस्वीरों का इस्तेमाल:

बाढ़ की निगरानी
चक्रवात और तूफानों की स्थिति पर नजर
जंगल की आग का पता लगाने
मौसम पूर्वानुमान
आपदा चेतावनी
कृषि निगरानी
प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी
जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

आपदा के दौरान जमीन से मिलने वाली सूचनाओं के साथ सैटेलाइट इमेजरी को जोड़ने से राहत और बचाव एजेंसियों को प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति तेजी से समझने में मदद मिल सकती है।

GSLV से लॉन्च हुआ भारत का सबसे भारी सैटेलाइट
2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 अब तक GSLV द्वारा ट्रांसफर ऑर्बिट में भेजा गया भारत का सबसे भारी सैटेलाइट है।

यह मिशन GSLV की 19वीं उड़ान थी और 2026 में ISRO का पहला सफल कक्षीय प्रक्षेपण भी रहा। इससे पहले जनवरी में PSLV-C62 मिशन के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण मिशन सफल नहीं हो पाया था।

भारत ने 2021 में भी जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में अर्थ-इमेजिंग सैटेलाइट भेजने का प्रयास किया था, लेकिन उस मिशन में GSLV के क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई समस्या के कारण सफलता नहीं मिली थी।

EOS-05 की सफलता इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की लगातार पृथ्वी निगरानी क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाती है। इससे आपदा प्रबंधन, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पहले से अधिक तेजी से और बार-बार उपग्रह तस्वीरें उपलब्ध हो सकेंगी।

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