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सुखोई-30MKI को रूसी लंबी दूरी की मिसाइल से लैस करने की तैयारी, रक्षा मंत्रालय करेगा प्रस्ताव पर विचार

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Digital Desk
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📍 भोपाल
सुखोई-30MKI को रूसी लंबी दूरी की मिसाइल से लैस करने की तैयारी, रक्षा मंत्रालय करेगा प्रस्ताव पर विचार

7 सितंबर 2026। भारत अपनी वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान Su-30MKI की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI विमानों को रूस की RVV-BD लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव पर रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। RVV-BD को लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है और इसकी अधिकतम मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर बताई जाती है। रिपोर्टों में इसकी गति को हाइपरसोनिक श्रेणी में भी बताया गया है।

क्या है RVV-BD मिसाइल?
RVV-BD को रूस की R-37M एयर-टू-एयर मिसाइल का एक्सपोर्ट वर्जन माना जाता है। यह लंबी दूरी से दुश्मन के महत्वपूर्ण हवाई प्लेटफॉर्म को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है। इनमें फाइटर जेट के अलावा एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर जैसे विमान शामिल हैं।

इस तरह की मिसाइल का इस्तेमाल दुश्मन के लड़ाकू विमानों की मुख्य सुरक्षा व्यवस्था से दूर रहकर उसके हाई-वैल्यू एयरक्राफ्ट को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

पुतिन की भारत यात्रा से पहले चर्चा तेज
रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा करने वाले हैं। इससे भारत-रूस रक्षा सहयोग से जुड़े प्रस्तावों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान को भी भारत के सामने पेश कर चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले महीने मॉस्को में हुई भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के दौरान Su-57 की संभावित बिक्री से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल थे।

'सुपर सुखोई' से बढ़ रही Su-30MKI की ताकत
भारतीय वायुसेना पहले से ही अपने Su-30MKI बेड़े के आधुनिकीकरण पर काम कर रही है। 'सुपर सुखोई' कार्यक्रम के तहत इन विमानों के एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अन्य प्रणालियों को अपग्रेड किया जा रहा है।

Su-30MKI को भारत में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर-लॉन्च वर्जन को ले जाने के लिए भी संशोधित किया गया है। इससे यह विमान लंबी दूरी के हवाई हमले और रणनीतिक अभियानों के लिए और अधिक सक्षम हुआ है।

चीन और पाकिस्तान की चुनौती
भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की जरूरत क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों के कारण भी बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने तिब्बत क्षेत्र में भारतीय सीमा के करीब अपने J-20 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। वहीं पाकिस्तान को चीन के J-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिलने की संभावनाओं की भी रिपोर्टें सामने आती रही हैं।

ऐसे माहौल में भारतीय वायुसेना के लिए लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारतीय वायुसेना की रीढ़ है Su-30MKI
Su-30MKI भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना के पास करीब 258 Su-30MKI विमान हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) नासिक स्थित अपनी सुविधा में अतिरिक्त विमानों का निर्माण भी कर रहा है, जिनका उद्देश्य दुर्घटनाओं में नष्ट हुए विमानों की भरपाई करना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ पिछले वर्ष हुए सैन्य टकराव, जिसे भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया था, के दौरान भी Su-30MKI विमानों ने भारतीय हवाई अभियानों में भूमिका निभाई थी। इन विमानों ने भारतीय फॉर्मेशन को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ ब्रह्मोस मिसाइलों के इस्तेमाल वाले अभियानों में भी हिस्सा लिया था।

यदि RVV-BD को Su-30MKI के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इससे भारतीय लड़ाकू विमानों की लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो सकती है।

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