🔴 TRENDING NOW!
भारतीय संस्कृति में सिर्फ पर्यटन नहीं, तीर्थाटन की भावना महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुमार सानू, शंकर महादेवन और जावेद अली ‘सा रे गा मा पा 2026’ के दिवाली स्पेशल एपिसोड में जमाएंगे सुरों की महफिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान में हुए शामिल उज्जैन के गौरव की “गिर गाय राधा” ने बनाया रिकार्ड, प्रतिदिन 19 लीटर से अधिक दूध देकर प्रदेश में हासिल किया सर्वाधिक दूध देने वाली गाय का स्थान प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर स्कोडा ऑटो इंडिया ने 350 से अधिक ग्राहक संपर्क केंद्रों का आंकड़ा पार किया, 193 शहरों तक पहुँच का विस्तार किया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निभाया वादा, हनुमान अंश फिल्म के बुंदेली गायक सुनील लोधी के आंखों का उपचार शुरू सीएम डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने लिए अहम फैसले, डेवलपमेंट-इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्वीकार किए 23 हजार 300 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए उप पुलिस अधीक्षकों को दिए कर्तव्य मंत्र, कहा- रील से ज्यादा रियल प्रॉब्लम करें सॉल्व सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- किसी की सगी नहीं हो सकती कांग्रेस

सिंगापुर PM की ₹26.6 करोड़ सैलरी से मोदी की ₹20 लाख कमाई तक, हर्ष गोयनका की पोस्ट पर छिड़ी बहस

👤
Digital Desk
👁 758 व्यूज
📍 भोपाल
सिंगापुर PM की ₹26.6 करोड़ सैलरी से मोदी की ₹20 लाख कमाई तक, हर्ष गोयनका की पोस्ट पर छिड़ी बहस

9 सितंबर 2026। दुनिया के अलग-अलग देशों के शीर्ष नेताओं की सालाना सैलरी की तुलना करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक पदों की आय, सरकारी सुविधाओं और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर ऑनलाइन बहस छेड़ दी है। बिजनेस टाइकून हर्ष गोयनका ने एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की सालाना सैलरी भारतीय रुपये में बताई गई है।

गोयनका द्वारा साझा की गई सूची में सिंगापुर के प्रधानमंत्री सबसे ऊपर हैं। उनकी सालाना सैलरी करीब ₹26.6 करोड़ बताई गई है। इसके बाद हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव की करीब ₹6.83 करोड़, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की ₹5.76 करोड़, अमेरिका के राष्ट्रपति की ₹3.8 करोड़ और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की करीब ₹2.19 करोड़ सालाना आय बताई गई है।

वहीं, सूची के निचले हिस्से में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम आता है। पोस्ट में दोनों की सालाना सैलरी करीब ₹20-21 लाख बताई गई है।

गोयनका ने इस तुलना के साथ सवाल उठाया कि लगभग समान स्तर की जिम्मेदारी वाले राजनीतिक पदों के लिए अलग-अलग देशों में वेतन में इतना बड़ा अंतर क्यों है।

सिर्फ सैलरी से नहीं बनती पूरी तस्वीर
सोशल मीडिया पर पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि किसी नेता की आर्थिक स्थिति का आकलन केवल बेसिक सैलरी के आधार पर करना सही नहीं होगा। नेताओं को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं, सुरक्षा, आवास, यात्रा और अन्य लाभ भी तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ यूजर्स ने AI चैटबॉट Grok से विभिन्न देशों के नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं की तुलना भी कराई।

सिंगापुर में प्रधानमंत्री के लिए वेतन के साथ आधिकारिक कार्यालय और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। यात्रा के मामले में भी सरकारी व्यवस्था के साथ कमर्शियल फ्लाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है।

हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव को सरकारी आवास, आधिकारिक वाहन और सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति को अतिरिक्त भत्ते के साथ सरकारी वाहन और ड्राइवर की सुविधा मिलती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति को मिलने वाली सुविधाएं इससे कहीं व्यापक हैं। इनमें व्हाइट हाउस में सरकारी आवास, एयर फोर्स वन, कैंप डेविड, सुरक्षा व्यवस्था और कार्यकाल के बाद पेंशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को 10 डाउनिंग स्ट्रीट और चेकर्स जैसे सरकारी आवास तथा सुरक्षा व्यवस्था मिलती है। चीन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री को भी उच्च स्तर की सुरक्षा, सरकारी आवास, वाहन और आधिकारिक विमान जैसी सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

सैलरी की तुलना में अर्थव्यवस्था का कितना असर?
बहस का एक बड़ा हिस्सा दोनों देशों की आर्थिक परिस्थितियों पर केंद्रित रहा। कुछ यूजर्स ने कहा कि नेताओं की सैलरी की तुलना करते समय संबंधित देश की प्रति व्यक्ति आय और जीवन-यापन की लागत को भी ध्यान में रखना चाहिए।

सिंगापुर की प्रति व्यक्ति आय भारत की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में वहां प्रधानमंत्री की सैलरी का स्तर भारतीय राजनीतिक व्यवस्था से सीधे तुलना करने पर पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।

कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि सिंगापुर जैसे देशों में शीर्ष राजनीतिक पदों की सैलरी इस सोच के तहत तय की जाती है कि प्रतिभाशाली लोगों को निजी क्षेत्र में मिलने वाली संभावित आय के मुकाबले सार्वजनिक सेवा के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन दिया जाए।

इसे 'Opportunity Cost' यानी अवसर लागत से भी जोड़कर देखा गया। तर्क यह है कि किसी व्यक्ति के लिए राजनीति में आने का आर्थिक विकल्प अलग-अलग देशों में अलग हो सकता है।

भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठा
सोशल मीडिया बहस में कुछ यूजर्स ने सरकारी वेतन और वास्तविक संपत्ति के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया। कुछ टिप्पणियों में भ्रष्टाचार और कथित अघोषित संपत्ति का जिक्र करते हुए कहा गया कि केवल आधिकारिक वेतन की तुलना से राजनीतिक पदों की वास्तविक आर्थिक तस्वीर नहीं समझी जा सकती।

हालांकि, ऐसे दावों को किसी आधिकारिक प्रमाण के बिना सामान्य तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

क्या सिर्फ वेतन की तुलना सही पैमाना है?
हर्ष गोयनका की पोस्ट ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा किया है। दुनिया के नेताओं की सैलरी में भारी अंतर दिखाई देता है, लेकिन इन आंकड़ों को समझने के लिए प्रति व्यक्ति आय, देश की अर्थव्यवस्था, जीवन-यापन की लागत, सरकारी सुविधाओं, सुरक्षा और पद की जिम्मेदारियों को भी साथ देखना जरूरी है।

इसलिए ₹26.6 करोड़ बनाम ₹20 लाख की तुलना अपने आप में चौंकाने वाली जरूर है, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं बताती। असली तुलना तब होगी जब वेतन के साथ यह भी देखा जाए कि संबंधित देश अपने शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को कौन-कौन सी सुविधाएं देता है और उस वेतन का राष्ट्रीय आय के मुकाबले अनुपात कितना है।

Tags :