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एन्थ्रोपिक ने AI के गलत इस्तेमाल से जुड़े बायोलॉजिकल हथियार जोखिम के पांच मामले बताए

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Digital Desk
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📍 भोपाल
एन्थ्रोपिक ने AI के गलत इस्तेमाल से जुड़े बायोलॉजिकल हथियार जोखिम के पांच मामले बताए

11 सितंबर 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच जैविक हथियारों और खतरनाक जैविक अनुसंधान में AI के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ रही है। अमेरिकी AI कंपनी एन्थ्रोपिक (Anthropic) ने अपनी नई थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट में ऐसे पांच मामलों का खुलासा किया है, जिनमें शोधकर्ताओं ने कंपनी के AI मॉडल Claude का इस्तेमाल संवेदनशील और संभावित रूप से खतरनाक बायोलॉजिकल रिसर्च में करने की कोशिश की।

कंपनी के मुताबिक, कुछ मामलों में ऐसे अनुसंधान से संबंधित गतिविधियां सामने आईं जिनका इस्तेमाल खतरनाक रोगजनकों की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता था। एन्थ्रोपिक ने इसे AI के बढ़ते जैविक जोखिम का गंभीर संकेत बताया है।

पांच मामलों ने बढ़ाई चिंता
एन्थ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में अलग-अलग प्रकार के संवेदनशील जैविक अनुसंधान शामिल थे। इनमें एक मामला एक सैन्य अनुसंधान संस्थान से जुड़ा था, जहां गेन-ऑफ-फंक्शन प्रकार के शोध की योजना सामने आई। ऐसे अनुसंधान में किसी रोगजनक की कुछ क्षमताओं को बदलने या बढ़ाने का जोखिम हो सकता है।

एक अन्य मामले में एक शोधकर्ता ने खतरनाक बर्ड फ्लू वायरस और उसके स्तनधारी जीवों के अनुकूल होने की क्षमता से जुड़े शोध के दौरान Claude का इस्तेमाल किया। अन्य मामलों में चेचक से संबंधित वायरस और खतरनाक टॉक्सिन से जुड़े संवेदनशील अनुसंधान का भी उल्लेख किया गया है।

एन्थ्रोपिक ने हालांकि यह दावा नहीं किया कि इन सभी शोधकर्ताओं का निश्चित उद्देश्य जैविक हथियार बनाना ही था। कंपनी ने कहा कि वैध वैज्ञानिक अनुसंधान और संभावित दुरुपयोग के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो सकता है।

AI सुरक्षा प्रतिबंधों को चकमा देने की कोशिश
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ उपयोगकर्ताओं ने AI की सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार करने की कोशिश भी की। इनमें अपनी पहचान छिपाना, अलग-अलग देशों के नेटवर्क के जरिए ट्रैफिक भेजना और सुरक्षा नियंत्रणों को बायपास करने वाली सेवाओं का इस्तेमाल करना शामिल था।

एन्थ्रोपिक ने बताया कि संबंधित अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई है और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने के लिए इस्तेमाल की जा रही सेवाओं को भी बंद किया गया है।

कंपनी ने चेतावनी दी कि भविष्य में AI की क्षमताएं बढ़ने के साथ ऐसे दुरुपयोग का जोखिम भी बढ़ सकता है। खास तौर पर ऐसे लोग, जिनके पास पहले से वैज्ञानिक विशेषज्ञता है, AI की मदद से जटिल अनुसंधान को अधिक तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।

AI की बढ़ती क्षमता बनी चुनौती
एन्थ्रोपिक का कहना है कि उसके पुराने AI मॉडल इतने सक्षम नहीं थे कि जैविक अनुसंधान में विशेषज्ञ लोगों को इस स्तर की सहायता दे सकें। लेकिन नए और अधिक शक्तिशाली मॉडल के साथ कंपनी के लिए यह भरोसा देना मुश्किल होता जा रहा है कि AI का इस्तेमाल खतरनाक अनुसंधान में नहीं किया जा सकता।

यह चिंता ऐसे समय सामने आई है जब वैज्ञानिक अनुसंधान में AI और बायोटेक्नोलॉजी का मेल तेजी से बढ़ रहा है। हाल के प्रयोगों ने भी यह दिखाया है कि AI जैविक डिजाइन और वायरस से संबंधित अनुसंधान में शोधकर्ताओं की क्षमता बढ़ा सकता है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि AI आधारित बायोलॉजी के संभावित फायदे बड़े हैं, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था भी जरूरी है।

साइबर हमलों और हथियारों में भी AI के दुरुपयोग का खतरा
एन्थ्रोपिक की रिपोर्ट केवल जैविक खतरों तक सीमित नहीं है। इसमें Claude के संभावित दुरुपयोग से जुड़े साइबर हमले, निगरानी, प्रोपेगैंडा, धोखाधड़ी और पारंपरिक हथियारों से संबंधित गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।

कंपनी के अनुसार, AI अब केवल सवालों के जवाब देने वाला सिस्टम नहीं रह गया है। इसकी बढ़ती क्षमता इसे जटिल कार्यों में उपयोगी बनाती है, लेकिन यही क्षमता गलत हाथों में सुरक्षा जोखिम भी पैदा कर सकती है।

AI से मानव अस्तित्व पर खतरे की बहस तेज
एन्थ्रोपिक की रिपोर्ट के सामने आने से कुछ दिन पहले कंपनी के रिसर्चर इवान हुबिंगर ने AI के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि अगले दशक में AI के कारण मानवता के पूरी तरह खत्म होने की संभावना 10 प्रतिशत से अधिक हो सकती है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुपरइंटेलिजेंस को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के लिए अभी पर्याप्त स्पष्ट योजना मौजूद है या नहीं।

इसी बीच एन्थ्रोपिक के एक अन्य रिसर्चर जैकब कॉक्सन के इस्तीफे ने भी AI सुरक्षा को लेकर बहस को हवा दी। उन्होंने एन्थ्रोपिक और OpenAI पर AI से जुड़े बड़े सभ्यतागत जोखिमों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया था।

इन घटनाओं से एक बड़ा सवाल सामने आता है: AI जितना शक्तिशाली होता जाएगा, उतनी ही तेजी से उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा। आने वाले वर्षों में AI सुरक्षा, बायोसिक्योरिटी और मानव नियंत्रण के बीच संतुलन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियों में शामिल हो सकता है।

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