🔴 TRENDING NOW!
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रज्ज्वलित विकास के दीपक का प्रकाश देशभर में फैल रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव अमेरिकी खुफिया एजेंसी NSA का बड़ा प्लान, AI और चीन पर रहेगा खास फोकस मेटा और टिकटॉक को बड़ा झटका, सोशल मीडिया की लत से जुड़े 3,000 से ज्यादा मुकदमे आगे बढ़ेंगे BRICS में दुनिया की बढ़ती दिलचस्पी, पुतिन बोले: स्वतंत्र रास्ता बना रहा आकर्षण AI से स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तक: शी जिनपिंग ने BRICS सहयोग बढ़ाने के लिए पेश कीं 5 बड़ी पहल सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दी सौगात, खातों में ट्रांसफर किए 1835 करोड़ सागर जहरीली शराब कांड: एक और आरोपी का शॉर्ट एनकाउंटर, हथियार-जिंदा कारतूस बरामद करीना कपूर की ‘दायरा’ और कुणाल खेमू की ‘वाइब’ को मिला A सर्टिफिकेट, 18 सितंबर को होगा बॉक्स ऑफिस मुकाबला स्टील स्लैग से बनेंगी मजबूत और सस्ती सड़कें, लागत में 40% तक कमी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा और जिम्मेदारी के 25 वर्षों के प्रति आभार का प्रकटीकरण है सेवा संकल्प अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मेटा और टिकटॉक को बड़ा झटका, सोशल मीडिया की लत से जुड़े 3,000 से ज्यादा मुकदमे आगे बढ़ेंगे

👤
Digital Desk
👁 103 व्यूज
📍 भोपाल
मेटा और टिकटॉक को बड़ा झटका, सोशल मीडिया की लत से जुड़े 3,000 से ज्यादा मुकदमे आगे बढ़ेंगे

अमेरिकी अपील कोर्ट ने कंपनियों की याचिका खारिज की, बच्चों और किशोरों को कथित नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर अब आगे बढ़ेगी कानूनी कार्रवाई

सैन फ्रांसिस्को 14 सितंबर 2026। अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ चल रहे हजारों मुकदमों को रोकने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। सैन फ्रांसिस्को स्थित नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने मेटा और टिकटॉक की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही सोशल मीडिया की लत और बच्चों व किशोरों को कथित नुकसान पहुंचाने से जुड़े 3,000 से अधिक संघीय मुकदमों के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

इन मामलों में मेटा, टिकटॉक, गूगल, स्नैप और दूसरी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों पर आरोप लगाया गया है कि उनके प्लेटफॉर्म में मौजूद कुछ फीचर्स यूजर्स, खासकर बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन फीचर्स के कारण सोशल मीडिया की लत, डिप्रेशन, एंग्जायटी और दूसरी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

सेक्शन 230 से नहीं मिली मुकदमों से सुरक्षा

मेटा और टिकटॉक ने अमेरिकी कानून के सेक्शन 230 का हवाला देते हुए इन मुकदमों को रोकने की कोशिश की थी। यह कानून ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट से जुड़े कुछ मामलों में कानूनी सुरक्षा देता है।

हालांकि, अपील कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर सेक्शन 230 का इस्तेमाल मुकदमों को रोकने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, यह कानून कंपनियों को कुछ मामलों में जवाबदेही से सुरक्षा दे सकता है, लेकिन उन्हें मुकदमे से पूरी तरह छूट नहीं देता।

हालांकि, अदालत के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि मेटा, टिकटॉक या दूसरी कंपनियां कथित नुकसान के लिए दोषी साबित हो गई हैं। अब इन मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह तय होगा कि कंपनियों की वास्तविक जिम्मेदारी बनती है या नहीं।

29 राज्यों के मामले में भी मेटा को राहत नहीं

अदालत ने मेटा की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने 29 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर एक अलग मामले में कार्यवाही में देरी की मांग की थी।

इस मामले में राज्यों ने आरोप लगाया है कि मेटा ने बच्चों का डेटा अनुचित तरीके से एकत्र किया, युवा यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाले फीचर्स का इस्तेमाल किया और अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया।

इस मामले में बुधवार से जूरी चयन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। मेटा ने इन आरोपों से इनकार किया है।

पहले भी कंपनियों को लग चुका है झटका

सोशल मीडिया की कथित लत को लेकर टेक कंपनियों के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में यह पहला बड़ा झटका नहीं है। मार्च में लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने सोशल मीडिया की लत से जुड़े एक मामले में मेटा और गूगल को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

जूरी ने 20 वर्षीय एक महिला को 60 लाख डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था। महिला ने आरोप लगाया था कि बचपन में ही उसे इंस्टाग्राम और यूट्यूब की लत लग गई थी। मेटा और गूगल ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और उस फैसले को चुनौती दी है।

बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर बढ़ रही सख्ती

अमेरिका में चल रही इन कानूनी लड़ाइयों के बीच दुनिया के कई देशों में भी बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर नियम सख्त किए जा रहे हैं। सरकारों की चिंता सोशल मीडिया की लत, हानिकारक कंटेंट, बच्चों के डेटा और उम्र की सही तरीके से जांच न होने को लेकर है।

ऑस्ट्रेलिया ने पिछले दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने पर रोक लगाने वाला कानून लागू किया। इसके बाद इंडोनेशिया और मलेशिया ने भी नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पाबंदियां बढ़ाई हैं।

ब्रिटेन ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाने की योजना घोषित की है। वहीं फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

अमेरिकी अदालत का ताजा फैसला ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया कंपनियों के कारोबार में बच्चों और किशोरों की भूमिका तथा उनकी ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में कानूनी और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

Tags :