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भारत की अगली रक्षा लड़ाई सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमानों से नहीं, AI और Cyber Security से भी होगी

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Digital Desk
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📍 भोपाल
भारत की अगली रक्षा लड़ाई सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमानों से नहीं, AI और Cyber Security से भी होगी

BEL के ₹648 करोड़ के नए ऑर्डर में Cyber Security और AI Software शामिल, बदल रही है भारत की Defence Technology की तस्वीर

बेंगलुरु 18 सितंबर 2026। युद्ध का मैदान तेजी से बदल रहा है। अब किसी देश की सैन्य ताकत का आकलन केवल उसके पास मौजूद मिसाइलों, टैंकों, युद्धपोतों या लड़ाकू विमानों की संख्या से नहीं किया जा सकता। आधुनिक युद्ध में सेंसर, सुरक्षित संचार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, Artificial Intelligence और Cyber Security भी उतने ही महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

भारत में भी रक्षा तकनीक का यह बदलाव अब केवल नीति या भविष्य की योजना तक सीमित नहीं है। इसका एक ताजा उदाहरण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के नए रक्षा ऑर्डरों में दिखाई देता है।

BEL ने 18 सितंबर 2026 को बताया कि उसे 26 अगस्त के पिछले disclosure के बाद ₹648 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डरों में Laser-based IR Jammer, Communication Equipment, Cyber Security Solution, Thermal Imager, Transducer, AI-based Software Solution, TR Modules, upgrades, spares और services शामिल हैं।

अब हथियार के साथ उसका डिजिटल दिमाग भी जरूरी
इन ऑर्डरों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण संकेत AI और Cyber Security से जुड़े हिस्से हैं।

एक आधुनिक सैन्य प्रणाली केवल किसी लक्ष्य पर हमला करने या उसकी निगरानी करने तक सीमित नहीं रहती। उसे लगातार डेटा हासिल करना, उसका विश्लेषण करना, दूसरे सिस्टम से सुरक्षित तरीके से संवाद करना और साइबर हमलों से खुद को बचाना पड़ता है।

यही कारण है कि आने वाले समय में किसी रक्षा प्रणाली की क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उसके software, sensors, communication network और cyber resilience पर निर्भर करेगा।

BEL के नए ऑर्डरों में एक साथ AI-based software और Cyber Security solutions का शामिल होना इसी व्यापक बदलाव की ओर संकेत करता है।

Laser Jammer से Cyber Security तक एक ही तस्वीर
BEL के ऑर्डर में शामिल Laser-based IR Jammer और communication equipment जहां इलेक्ट्रॉनिक तथा सैन्य ऑपरेशन से जुड़े हैं, वहीं Cyber Security और AI software डिजिटल युद्धक्षेत्र की दूसरी परत को दिखाते हैं।

इसका मतलब यह है कि भविष्य की defence architecture कई अलग-अलग तकनीकों का संयोजन होगी।

एक तरफ sensors और thermal imagers दुश्मन या लक्ष्य से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएंगे। दूसरी तरफ communication systems इस जानकारी को सुरक्षित तरीके से पहुंचाएंगे। AI software बड़े पैमाने पर मिलने वाले डेटा को process करने में भूमिका निभा सकता है और Cyber Security systems पूरे digital ecosystem को हमलों से बचाने में मदद करेंगे।

यानी युद्ध प्रणाली का hardware और software अब अलग-अलग दुनिया नहीं रह गए हैं।

AI क्यों बन रहा है Defence का अहम हिस्सा?
युद्ध के दौरान कुछ सेकंड का फैसला भी महत्वपूर्ण हो सकता है। आधुनिक सैन्य अभियानों में बड़ी मात्रा में data sensors, radars, cameras, communication systems और दूसरे स्रोतों से आता है।

AI आधारित systems इस data को तेजी से process करने, patterns पहचानने और decision-support उपलब्ध कराने में उपयोग किए जा सकते हैं।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि AI अपने आप सैन्य निर्णय लेने लगेगा। वास्तविक रक्षा प्रणालियों में मानव नियंत्रण, operational protocols और सुरक्षा मानकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।

BEL की अपनी research दिशा भी इस बदलाव को दर्शाती है। कंपनी ने अपने Annual Report में Artificial Intelligence, Data Analytics, Cyber Forensics, Robotics, Quantum Communication, Photonics-based Electronic Warfare और Quantum Radar जैसी emerging technologies में काम का उल्लेख किया है।

Cyber Attack भी अब Defence Threat है
आज किसी रक्षा प्रतिष्ठान पर हमला केवल मिसाइल या बम से नहीं किया जाना जरूरी है।

यदि किसी सैन्य communication network, command system, surveillance infrastructure या critical digital system को cyber attack के जरिए बाधित किया जाता है, तो उसका असर वास्तविक सैन्य क्षमता पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि Cyber Security अब IT विभाग का विषय भर नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य preparedness का हिस्सा बन चुका है।

भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश तेजी से digitally connected defence ecosystem की ओर बढ़ रहा है।

जितनी ज्यादा defence systems networking और software पर निर्भर होंगी, उतनी ही ज्यादा आवश्यकता secure architecture, encryption, threat detection, cyber forensics और rapid recovery mechanisms की होगी।

भारत की Defence Strategy में बड़ा बदलाव
भारत ने पिछले वर्षों में indigenous defence production पर काफी जोर दिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का defence production लगभग ₹1.8 लाख करोड़ रहा, जिसमें DPSUs का योगदान लगभग ₹1.29 लाख करोड़ बताया गया।

इस बदलाव का अगला चरण केवल ज्यादा हथियार बनाना नहीं, बल्कि ज्यादा intelligent और digitally secure defence systems विकसित करना हो सकता है।

BEL के हालिया ऑर्डर इसी दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संकेत हैं।

कंपनी को इससे पहले भी radar warning और jamming systems, fighter aircraft के लिए fire detection and warning systems, high-energy laser और software solutions जैसे क्षेत्रों में ऑर्डर मिल चुके हैं।

आने वाले युद्ध में "कौन ज्यादा हथियार रखता है" से आगे सवाल होगा

भविष्य के युद्ध में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि किस देश के पास कितनी मिसाइलें हैं।

सवाल यह भी होगा:
किसके sensors ज्यादा तेजी से जानकारी जुटाते हैं?
कौन सा network cyber attack के बाद भी operational रह सकता है?
कौन सा AI system battlefield data को तेजी से analyse कर सकता है?
कौन communication infrastructure को सुरक्षित रख सकता है?
कौन electronic warfare में adversary के systems को disrupt कर सकता है?
और सबसे महत्वपूर्ण, कौन इन सभी technologies को एक integrated defence architecture में जोड़ सकता है?

यहीं से AI, Cyber Security और Electronic Warfare रक्षा क्षमता के नए स्तंभ बनते हैं।

भारत के लिए संदेश साफ है
BEL के ₹648 करोड़ के नए ऑर्डर को सिर्फ एक और defence procurement announcement के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

इसमें शामिल technologies यह दिखाती हैं कि भारत का defence technology ecosystem धीरे-धीरे traditional platforms से software-defined, networked और cyber-secure systems की तरफ बढ़ रहा है।

मिसाइल और fighter aircraft अब भी किसी भी आधुनिक सैन्य शक्ति के महत्वपूर्ण हिस्से रहेंगे। लेकिन उनके पीछे मौजूद sensors, communication networks, software, AI और Cyber Security systems increasingly उनकी operational effectiveness को प्रभावित करेंगे।

यानी अगली रक्षा लड़ाई आसमान, जमीन और समुद्र के साथ-साथ cyberspace और data में भी लड़ी जाएगी।

और इस नए युद्धक्षेत्र में सिर्फ हथियार होना पर्याप्त नहीं होगा। सिस्टम को देखना, समझना, सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर milliseconds में प्रतिक्रिया देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

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