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भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण

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Digital Desk
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📍 भोपाल
भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण

पोखरण 23 सितंबर 2026। भारत ने स्वदेशी Long-Range Unmanned Strike Technology की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नोएडा स्थित Defence Technology कंपनी IG Defence ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपने KAL Long-Range One-Way Attack Drone का परीक्षण पूरा किया है। कंपनी के अनुसार इस परीक्षण में ड्रोन के Airframe, Propulsion, Avionics, Navigation और Mission Systems के एकीकृत संचालन को validate किया गया।

KAL को एक ऐसे Unmanned Strike Platform के रूप में विकसित किया गया है, जो एक निर्धारित लक्ष्य के खिलाफ One-Way Mission के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी के अनुसार इसकी अधिकतम घोषित रेंज 1,000 किलोमीटर, endurance 7 से 8 घंटे और payload capacity 50 किलोग्राम तक है। इसका operating altitude 5,000 मीटर तक बताया गया है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 1,000 किलोमीटर की दूरी KAL की design specification है, न कि पोखरण में हुए इस परीक्षण में वास्तव में तय की गई दूरी। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने कितनी दूरी तय की और कितनी देर उड़ान भरी, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी तरह परीक्षण में live payload के इस्तेमाल की भी पुष्टि सार्वजनिक रिपोर्टों में नहीं हुई है।

Vehicle-Mounted Platform से लॉन्च
पोखरण परीक्षण के दौरान KAL को vehicle-mounted launch platform से उड़ाया गया। यह configuration इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि road-mobile launch system किसी fixed launch facility पर निर्भरता कम कर सकता है और operational deployment में अलग-अलग स्थानों से system को इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ा सकता है।

KAL में autonomous navigation के लिए multi-band GNSS और Inertial Navigation System यानी INS का संयोजन इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य निर्धारित mission profile के अनुसार drone को autonomous flight capability देना है।

AI और Battle Management System से जुड़ाव
KAL की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक इसका संभावित integration architecture है। IG Defence के अनुसार इसे कंपनी के GRID Battle Management System के साथ integrate किया जा सकता है।

कंपनी GRID को AI-enabled C5ISRT architecture के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें Command, Control, Communications, Computers, Cyber, Intelligence, Surveillance, Reconnaissance और Targeting जैसे elements को एक integrated framework में जोड़ने का उद्देश्य है।

यही वह हिस्सा है जो KAL को केवल एक लंबी दूरी वाले drone से आगे ले जाता है। आधुनिक युद्ध में सिर्फ platform की range महत्वपूर्ण नहीं है। Sensors, communication networks, intelligence और command systems के साथ unmanned platforms का integration भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है।

आधुनिक युद्ध में क्यों महत्वपूर्ण है Long-Range Drone?
Russia-Ukraine युद्ध और अन्य हालिया संघर्षों ने दिखाया है कि Long-Range One-Way Attack Drones आधुनिक युद्ध में किस तरह इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ऐसे systems अपेक्षाकृत कम लागत वाले unmanned platforms के जरिए लंबी दूरी तक strike missions करने और air-defence systems पर लगातार दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं।

इसी वजह से दुनिया की कई सेनाएं केवल traditional fighter aircraft और missiles पर निर्भर रहने के बजाय drones, autonomous systems, counter-drone technology और electronic warfare पर भी तेजी से ध्यान दे रही हैं।

भारत में भी unmanned warfare ecosystem को आगे बढ़ाने के लिए हाल में IAF Dronathon-2026 आयोजित किया गया था। PIB के अनुसार यह कार्यक्रम 14 से 16 सितंबर 2026 तक पोखरण में हुआ, जिसमें UAS और Counter-UAS technologies के साथ autonomous operations, swarm technologies और electronic warfare पर भी focus किया गया।

भारत के लिए अगला चरण क्या होगा?
KAL का पोखरण परीक्षण अपने आप में किसी operational induction या भारतीय सशस्त्र बलों में deployment की घोषणा नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में IG Defence ने अभी किसी भारतीय सैन्य order की घोषणा नहीं की है। कंपनी ने यह भी कहा है कि system को international market के लिए पेश किया जा सकता है, लेकिन किसी भी export के लिए भारत सरकार की आवश्यक मंजूरियां और export clearances जरूरी होंगी।

फिर भी इसका development भारत के तेजी से बदलते indigenous unmanned warfare ecosystem की दिशा को दिखाता है। आने वाले वर्षों में battlefield में केवल fighter jets, tanks और missiles ही निर्णायक systems नहीं होंगे। Autonomous drones, AI-enabled command systems, electronic warfare, counter-UAS और cyber capabilities भी military architecture का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।

KAL का परीक्षण इसी बड़े बदलाव की एक कड़ी है। 1,000 किलोमीटर की घोषित design range और autonomous operation capability अगर आगे के परीक्षणों में operational requirements को पूरा करती है, तो भारत के indigenous long-range unmanned systems ecosystem के लिए इसका महत्व बढ़ सकता है। फिलहाल, Pokhran trial ने कम से कम यह स्पष्ट किया है कि भारतीय private defence industry long-range unmanned strike technology के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

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