शंघाई 3 अक्टूबर 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अगली बड़ी दौड़ अब सिर्फ चैटबॉट और भाषा मॉडल तक सीमित नहीं रह गई है। दुनिया की प्रमुख तकनीकी शक्तियां अब ऐसी मशीनें विकसित करने में जुटी हैं जो अपने आसपास की दुनिया को देख सकें, परिस्थितियों को समझ सकें, निर्णय ले सकें और वास्तविक दुनिया में काम कर सकें। इस क्षेत्र को Physical AI या Embodied AI कहा जा रहा है।
चीन इस क्षेत्र में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। ह्यूमनॉइड रोबोट, रोबोट डॉग, औद्योगिक रोबोट, रोबोटैक्सी, ड्रोन, रोबोटिक हाथ और उन्हें नियंत्रित करने वाले AI मॉडल, इन सभी क्षेत्रों में चीन ने बड़ा औद्योगिक आधार तैयार किया है। 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित AI Supremacy की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सबसे बड़ी ताकत केवल रोबोट बनाने वाली कंपनियां नहीं, बल्कि उनके पीछे मौजूद विशाल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई-चेन नेटवर्क है।
चीन की असली ताकत रोबोट नहीं, पूरी सप्लाई चेन
चीन दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक-रोबोट बाजार है। 2024 में चीन में करीब 2.95 लाख नए औद्योगिक रोबोट लगाए गए, जो उस वर्ष दुनिया के बाकी हिस्सों की कुल नई इंस्टॉलेशन से भी अधिक थे। इस बड़े घरेलू बाजार ने स्थानीय कंपनियों को रोबोटिक्स तकनीक विकसित करने और लागत घटाने का अवसर दिया।
आज चीन में रोबोट बनाने के लिए जरूरी मोटर, सेंसर, मैग्नेट, कंट्रोल सिस्टम, गियर, प्रिसिजन रिड्यूसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य पार्ट्स के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय निर्माता मौजूद हैं।
यही कारण है कि चीनी कंपनियां नए रोबोट मॉडल को अपेक्षाकृत तेजी से विकसित और कम लागत पर तैयार कर पा रही हैं।
2015 में शुरू की गई Made in China 2025 रणनीति में रोबोटिक्स और हाई-एंड मशीन टूल्स को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया था। इसके बाद चीन ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ घरेलू कंपनियों को वैल्यू चेन में ऊपर ले जाने पर जोर दिया।
Unitree ने ह्यूमनॉइड रोबोट की कीमत घटाई
चीन की Unitree इस बदलाव का प्रमुख उदाहरण है। कंपनी ने पहले कम लागत वाले रोबोट डॉग विकसित किए और बाद में ह्यूमनॉइड रोबोट के क्षेत्र में प्रवेश किया।
Unitree का G1 ह्यूमनॉइड रोबोट चीन में करीब 99,000 युआन की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ था। बाद में इसकी विज्ञापित शुरुआती कीमत लगभग 85,000 युआन यानी करीब 13,000 डॉलर तक आ गई।
कंपनी के अनुसार, 2025 में उसने 5,000 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट भेजे। हालांकि इन रोबोटों का बड़ा हिस्सा अभी रिसर्च, शिक्षा, प्रदर्शन और अन्य सीमित व्यावसायिक उपयोगों में है।
Unitree का उदाहरण दिखाता है कि चीन रोबोटिक्स में केवल अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने पर नहीं, बल्कि तकनीक को सस्ता और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रहा है।
UBTech और AgiBot की अलग रणनीतियां
चीन की दूसरी प्रमुख कंपनी UBTech ने ह्यूमनॉइड रोबोट के साथ-साथ अपनी निर्माण क्षमता को भी मजबूत किया है। कंपनी के Walker S2 जैसे रोबोट औद्योगिक वातावरण के लिए बनाए गए हैं और कंपनी के मुताबिक यह रोबोट कुछ मिनटों में अपनी बैटरी बदल सकता है।
UBTech ने 2026 में एक औद्योगिक पार्ट्स निर्माता में नियंत्रक हिस्सेदारी भी हासिल की। इससे कंपनी को रोबोट के लिए जरूरी इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंपोनेंट्स की सप्लाई पर अधिक नियंत्रण मिलता है।
वहीं AgiBot ने अलग-अलग कामों के लिए अलग रोबोट विकसित करने पर जोर दिया है। इसके रोबोट शॉपिंग सहायता, गाइडिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग जैसे कार्यों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
कंपनी ने 2025 में 5,100 से ज्यादा ह्यूमनॉइड शिपमेंट की जानकारी दी थी।
अब असली मुकाबला रोबोट के शरीर का नहीं, दिमाग का
ह्यूमनॉइड रोबोट का सबसे कठिन हिस्सा केवल दो पैर, दो हाथ और सेंसर बनाना नहीं है। असली चुनौती यह है कि रोबोट नई परिस्थितियों में खुद निर्णय लेकर काम कर सके।
इसके लिए कंपनियां Vision-Language-Action यानी VLA मॉडल, World Action Model और Reinforcement Learning जैसी तकनीकों पर काम कर रही हैं।
AgiBot ने वास्तविक रोबोटों से लाखों कार्यों के प्रयासों का डेटा एकत्र किया है। Galbot ने सिमुलेशन के जरिए अरबों सिंथेटिक फ्रेम का इस्तेमाल करके रोबोटिक ग्रास्पिंग मॉडल को प्रशिक्षित किया। Alibaba की DAMO Academy भी Qwen मॉडल पर आधारित रोबोटिक सिस्टम विकसित कर रही है।
इसका अर्थ है कि भविष्य का रोबोट सिर्फ एक मशीन नहीं होगा। उसके पास एक AI मॉडल, सेंसर डेटा, प्रशिक्षण डेटा और लगातार अपडेट होने वाला सॉफ्टवेयर सिस्टम भी होगा।
चीन में बन रहे हैं 'Robot Training Grounds'
Physical AI में डेटा उतना ही महत्वपूर्ण है जितना रोबोट का हार्डवेयर।
चीन में अब ऐसे विशेष प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं जहां रोबोटों को वास्तविक परिस्थितियों जैसे घर, दुकान, गोदाम और फैक्ट्री में काम करने का अभ्यास कराया जाता है।
इन केंद्रों में इंसान VR हेडसेट और कंट्रोलर के जरिए रोबोट को काम करना सिखाते हैं। कैमरे और सेंसर रोबोट की हरकत, जोड़ के कोण और पकड़ की ताकत जैसे डेटा रिकॉर्ड करते हैं।
जून 2026 के अंत तक चीन में ऐसे 70 से अधिक रोबोट ट्रेनिंग ग्राउंड संचालित होने की जानकारी दी गई थी, जबकि 46 अन्य निर्माणाधीन या नियोजित थे।
यह चीन के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़त हो सकती है क्योंकि उसके पास एक ही देश में बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियां, रोबोट निर्माता और वास्तविक औद्योगिक काम मौजूद हैं। यानी रोबोट को केवल लैब में नहीं, बल्कि वास्तविक उत्पादन वातावरण में प्रशिक्षित और परीक्षण किया जा सकता है।
रोबोट बेचने के बाद भी कमाई का नया मॉडल
रोबोटिक्स उद्योग में एक और बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। कंपनियां केवल रोबोट बेचकर पैसा कमाने के बजाय उसके सॉफ्टवेयर और नई क्षमताओं से लगातार आय हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
भविष्य में कोई ग्राहक रोबोट खरीदने के बाद नई 'स्किल' डाउनलोड कर सकता है। उदाहरण के लिए एक रोबोट को पैकिंग, सफाई, खाना बनाने या किसी खास औद्योगिक कार्य के लिए नया सॉफ्टवेयर दिया जा सकता है।
यह मॉडल स्मार्टफोन ऐप की तरह हो सकता है, जहां हार्डवेयर एक बार खरीदा जाता है और नई क्षमताओं के लिए सॉफ्टवेयर या सब्सक्रिप्शन का भुगतान किया जाता है।
अरबों डॉलर का निवेश, लेकिन कारोबार की असली परीक्षा बाकी
Physical AI कंपनियों में निवेश तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध डेटा के अनुसार जनवरी 2025 से सितंबर 2026 के बीच चीन के Embodied AI क्षेत्र में सैकड़ों कंपनियों से जुड़े सैकड़ों फंडिंग राउंड सामने आए।
Galbot ने लगभग 7 अरब युआन की फंडिंग जुटाई है। Spirit AI ने 670 मिलियन डॉलर से अधिक जुटाए। XPeng ने भी अपनी रोबोटिक्स गतिविधियों के लिए 900 मिलियन डॉलर से अधिक जुटाने की घोषणा की।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल भी है: क्या रोबोट वास्तव में उतना उपयोगी काम कर रहे हैं जितनी उम्मीद निवेशक कर रहे हैं?
कई ह्यूमनॉइड रोबोट अभी भी 'human in the loop' मॉडल पर निर्भर हैं। यानी जब रोबोट किसी समस्या में फंसता है तो इंसान उसे दूर से नियंत्रित या निर्देशित करता है।
इस स्थिति में रोबोट की वास्तविक आर्थिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि एक इंसान कितने रोबोटों की निगरानी कर सकता है। अगर हर रोबोट के लिए लगातार एक इंसान चाहिए, तो ऑटोमेशन से होने वाली लागत बचत सीमित हो सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा भी बन रही है बड़ा मुद्दा
Physical AI अब केवल औद्योगिक या घरेलू तकनीक नहीं रह गया है। अमेरिका और चीन दोनों सैन्य उपयोगों के लिए रोबोटिक्स की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका में सेना ने ह्यूमनॉइड सिस्टम के लिए xTechHumanoid कार्यक्रम चलाया है। चीन में भी सैन्य दस्तावेजों और रिपोर्टों में ह्यूमनॉइड तथा रोबोटिक सिस्टम के संभावित उपयोग पर चर्चा हुई है।
हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार चीन की सेना में हथियारबंद ह्यूमनॉइड रोबोटों की नियमित operational deployment की पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा का दूसरा पहलू नागरिक रोबोटों से जुड़ा है। सेंसर, कैमरा, माइक्रोफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले रोबोट बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र कर सकते हैं। इसलिए भविष्य में रोबोटिक्स में साइबर सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और रिमोट कंट्रोल महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।
अमेरिका के लिए चुनौती सिर्फ चीनी रोबोट नहीं
चीन और अमेरिका के बीच Physical AI की प्रतिस्पर्धा का एक जटिल पहलू सप्लाई चेन है।
कई अमेरिकी रोबोट कंपनियां भी चीनी निर्मित कंपोनेंट्स पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रही हैं। विशेष रूप से मोटर, प्रिसिजन कंपोनेंट्स और रेयर-अर्थ मैग्नेट महत्वपूर्ण हैं।
International Energy Agency के अनुसार 2024 तक दुनिया के हाई-स्ट्रेंथ रेयर-अर्थ मैग्नेट उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 94 प्रतिशत थी।
इसलिए केवल चीनी रोबोटों को बाजार से बाहर करना और पूरी चीनी सप्लाई चेन से अलग होना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं।
क्या चीन दुनिया के अधिकांश ह्यूमनॉइड बनाएगा?
AI Supremacy की रिपोर्ट में उद्धृत Morgan Stanley के अनुमान के अनुसार 2050 तक दुनिया में 1 अरब से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट हो सकते हैं।
यह अनुमान वास्तविकता बनता है या नहीं, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन अगर ह्यूमनॉइड रोबोट का बाजार बड़े पैमाने पर विकसित होता है, तो चीन के पास इसके निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआती आधार मौजूद है।
कारण स्पष्ट हैं: विशाल औद्योगिक क्षमता, बड़ी सप्लाई चेन, प्रशिक्षित तकनीकी श्रमबल, बड़े घरेलू बाजार, रोबोटिक्स में बढ़ता निवेश और वास्तविक फैक्ट्रियों में AI मॉडल के परीक्षण की सुविधा।
फिर भी अंतिम सफलता का फैसला रोबोटों की संख्या से नहीं होगा। असली सवाल यह होगा कि वे कितनी विश्वसनीयता से काम कर सकते हैं, कितनी कम मानवीय निगरानी चाहिए और ग्राहक उनके लिए कितना भुगतान करने को तैयार हैं।
Physical AI की अगली दौड़ इसलिए केवल 'किस देश के पास सबसे ज्यादा रोबोट हैं' की दौड़ नहीं होगी। यह हार्डवेयर, AI मॉडल, डेटा, सॉफ्टवेयर, ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन की संयुक्त प्रतिस्पर्धा होगी।
और इस दौड़ में चीन ने अपने लिए काफी मजबूत शुरुआती आधार तैयार कर लिया है।