🔴 TRENDING NOW!
भारत में AI रेगुलेशन की तैयारी: एक महीने में आएगा कंसल्टेशन पेपर, Deepfake और साइबर सुरक्षा पर फोकस भारत में Starlink की देरी पर मस्क का बड़ा आरोप, ‘ओलिगार्क्स’ पर लगाया रोकने का आरोप मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से प्रदेश के आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक पहचान: मुख्य सचिव बर्णवाल पर्यटन की दृष्टि से असीम संभावनाओं का केंद्र है मध्यप्रदेश - मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM) 2026 का सातवां संस्करण भोपाल में बुधवार से; मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ नई स्‍कोडा स्‍लेविया जो कहे सबकुछ — स्टाइल, दमदार खूबियों और आत्मविश्वास के साथ 50 लाख बच्चों ने बुना 'मेरे सपनों का भारत,' सीएम डॉ. मोहन ने विजेताओं को दिए पुरस्कार, कहा- बच्चों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध सरकार सीएम डॉ. मोहन ने एसआईआर को बताया जरूरी, कहा- भ्रम या अफवाह पर नागरिक न दें ध्यान Good News: कूनो में KJP21 ने दिया 5 शावकों को जन्म, सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई एशियन गेम्स के 85 में से 29 पदकों में रिलायंस फाउंडेशन का योगदान, नीता अंबानी ने दी बधाई

भारत में AI रेगुलेशन की तैयारी: एक महीने में आएगा कंसल्टेशन पेपर, Deepfake और साइबर सुरक्षा पर फोकस

👤
Digital Desk
👁 186 व्यूज
📍 भोपाल
भारत में AI रेगुलेशन की तैयारी: एक महीने में आएगा कंसल्टेशन पेपर, Deepfake और साइबर सुरक्षा पर फोकस

8 अक्टूबर 2026। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार अब इसके लिए व्यापक नियामकीय ढांचे की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि AI के भविष्य के नियमन पर एक Consultation Paper अगले एक महीने के भीतर जारी किया जाएगा।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब AI का इस्तेमाल स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, कारोबार और डिजिटल सेवाओं में तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर Deepfake, AI-generated misinformation, साइबर हमलों, डेटा गोपनीयता और AI के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।

AI Safety और Cybersecurity होंगे प्रमुख मुद्दे
अश्विनी वैष्णव के अनुसार प्रस्तावित Consultation Paper में AI Safety, Cybersecurity, AI के फायदे और इसके संभावित नुकसान जैसे प्रमुख विषयों पर विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य केवल AI के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिससे तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सके और उसके जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके।

सरकार विशेष रूप से Deepfake जैसी तकनीक से पैदा होने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान दे रही है। AI के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या वीडियो वास्तविक जैसा बनाना आसान हो गया है। इससे पहचान की चोरी, धोखाधड़ी, बदनाम करने वाली सामग्री और गलत सूचना फैलाने जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।

भारत का मॉडल केवल कानून आधारित नहीं होगा
भारत पहले ही AI Governance के लिए एक व्यापक नीति दृष्टिकोण विकसित कर चुका है। सरकार ने फरवरी 2026 में जारी India AI Governance Guidelines में AI के लिए एक principle-based और techno-legal framework की दिशा में कई सिफारिशें रखी थीं। इसमें AI Governance Group, Technology & Policy Expert Committee और AI Safety Institute जैसे संस्थागत तंत्र विकसित करने की सिफारिश शामिल है।

इन दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि AI से जुड़े सभी जोखिमों को केवल नए कानून बनाकर हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीकी सुरक्षा उपायों, मानकों, साइबर सुरक्षा प्रणालियों और विशेषज्ञ संस्थानों की भी जरूरत होगी।

सरकार ने AI से जुड़े मामलों में bias, deepfake detection, content authentication, data protection, copyright और liability जैसे मुद्दों पर भी नियामकीय अंतर की पहचान करने की जरूरत बताई है।

Deepfake पर पहले से सख्त किए जा चुके हैं नियम
AI Regulation की नई प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भारत ने AI-generated और synthetically generated content से जुड़े नियमों को मजबूत किया है।

फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव के जरिए सोशल मीडिया और अन्य intermediaries के लिए AI-generated content से जुड़े अतिरिक्त दायित्व तय किए गए। सरकार के अनुसार प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी AI-generated content को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होंगे और वैध AI-generated content के लिए स्पष्ट labeling तथा traceable metadata जैसी व्यवस्थाओं पर काम करना होगा।

इसमें impersonation, बच्चों के लिए हानिकारक सामग्री, non-consensual intimate imagery और अन्य गैरकानूनी AI-generated content जैसे मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

AI के फायदे भी सरकार के एजेंडे में
सरकार का कहना है कि AI को केवल जोखिम की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। 8 अक्टूबर को World Bank की World Development Report 2026: The Promise of Artificial Intelligence की भारत में लॉन्चिंग के दौरान अश्विनी वैष्णव ने AI के जरिए कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों पर जोर दिया।

सरकार के अनुसार AI का इस्तेमाल उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने और सेवाओं की पहुंच बेहतर करने में मदद कर सकता है। रिपोर्ट में भी विकासशील देशों में AI के प्रभावी इस्तेमाल के लिए बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा, कौशल और मजबूत संस्थानों को महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।

Startups, Researchers और Students के लिए AI की पहुंच
वैष्णव ने यह भी कहा कि सरकार AI को startups, academia, researchers और students के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना है कि AI से वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब इसका इस्तेमाल व्यापक स्तर पर उत्पादकता और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया जाए।

इससे साफ है कि प्रस्तावित AI Regulation का एक महत्वपूर्ण हिस्सा innovation और regulation के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित हो सकता है।

आगे क्या होगा?
अगले एक महीने में Consultation Paper जारी होने के बाद सरकार संभवतः विभिन्न stakeholders से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित करेगी। इसके बाद AI से जुड़े अलग-अलग जोखिमों, जिम्मेदारियों और नियामकीय जरूरतों के आधार पर आगे की व्यवस्था तैयार की जा सकती है।

भारत के सामने चुनौती यह है कि AI की तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है। इसलिए ऐसा regulatory framework तैयार करना होगा जो आज के Deepfake और cybersecurity risks को संबोधित करने के साथ-साथ आने वाले समय में अधिक autonomous और agentic AI systems से पैदा होने वाली चुनौतियों से भी निपट सके।

भारत ने अब तक AI के लिए innovation, accessibility, safety और techno-legal governance पर जोर दिया है। आगामी Consultation Paper यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कि इन सिद्धांतों को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा।

Tags :