🔴 TRENDING NOW!
इस दिवाली, कैडबरी सेलिब्रेशंस के साथ हर नोक-झोंक में छिपी मिठास का जश्न मनाएं W.i.S.H. ने 'कसूर' और 'दूरी' के साथ शुरू किया एक नया अध्याय नवरात्रि 2026: प्याज और लहसुन क्यों नहीं खाते भक्त? जानिए धार्मिक मान्यताएं और खान-पान से जुड़े कारण AI से दवा खोजने की दिशा में भारत की बड़ी पहल, पेप्ट्रिस को ₹86 करोड़ की वित्तीय सहायता आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि कालड़ी में मोरारी बापू की रामकथा ताज लेकफ्रंट में सतपुड़ा के पारंपरिक व्यंजनों का सात दिवसीय फूड फेस्टिवल संपन्न मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र, स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से मिला 10 हितग्राहियों को मालिकाना हक AI से आगे सुपरइंटेलिजेंस की दुनिया: क्या .si डोमेन बन सकता है डिजिटल पहचान का नया विकल्प? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिया सख्त एक्शन, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग निलंबित AI एजेंट्स में भी जेंडर बायस: एक ही काम के लिए महिला एजेंट को पुरुष से 10.25% कम भुगतान

AI से दवा खोजने की दिशा में भारत की बड़ी पहल, पेप्ट्रिस को ₹86 करोड़ की वित्तीय सहायता

👤
Digital Desk
👁 127 व्यूज
📍 भोपाल
AI से दवा खोजने की दिशा में भारत की बड़ी पहल, पेप्ट्रिस को ₹86 करोड़ की वित्तीय सहायता

12 अक्टूबर 2026। वीआईजीओआर कार्यक्रम के तहत चार AI-आधारित प्रायोगिक दवाओं के विकास में आएगी तेजी, तीन वर्षों में क्लिनिकल डेवलपमेंट के अगले चरण तक पहुंचाने का लक्ष्य

नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से नई दवाओं की खोज और विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने बेंगलुरु स्थित पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड के तहत ₹86 करोड़ की वित्तीय सहायता के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस परियोजना का नाम ‘वीआईजीओआर: AI से खोजे गए मॉलिक्यूल्स को लैब से क्लिनिक तक’ रखा गया है। इसकी कुल लागत ₹172 करोड़ है। परियोजना का उद्देश्य AI की मदद से खोजे गए चार प्रायोगिक दवा उम्मीदवारों को उन्नत प्री-क्लिनिकल विकास और क्लिनिकल परीक्षण की तैयारी के अगले चरण तक पहुंचाना है। इसके लिए तीन वर्षों की विकास योजना बनाई गई है। टीडीबी की वित्तीय सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण (OCD) के माध्यम से दी जाएगी।

चार प्रायोगिक दवाओं पर होगा काम
वीआईजीओआर कार्यक्रम के तहत चार दवा उम्मीदवारों को आगे विकसित किया जाएगा। ये अलग-अलग चिकित्सकीय जरूरतों पर केंद्रित हैं।
PEPR111: न्यूरोमस्कुलर विकारों और कैंसर से संबंधित लक्ष्यों पर केंद्रित।
PEPRX101: बालों के झड़ने यानी एलोपेसिया के उपचार की संभावनाओं पर केंद्रित।
PEPR202: न्यूरोपैथी से संबंधित उपचार के लिए विकसित किया जाएगा।
PEPR112: परियोजना विवरण के अनुसार, मधुमेह से संबंधित एक चिकित्सकीय लक्ष्य पर केंद्रित।

परियोजना के अनुसार, इन चारों दवा उम्मीदवारों का वर्तमान प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (TRL) 4 है। इन्हें TRL-6 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उन्नत प्री-क्लिनिकल अध्ययन, दवा के फॉर्मूलेशन का विकास, नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप परीक्षणों की तैयारी और शुरुआती क्लिनिकल विकास गतिविधियों पर काम किया जाएगा।

हालांकि, किसी दवा उम्मीदवार को विकास के अगले चरण तक पहुंचाना उसके प्रभावी या सुरक्षित उपचार साबित होने के समान नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिक परीक्षणों और नियामकीय मूल्यांकन में सफल होना आवश्यक है।

दवा खोज में AI की बढ़ती भूमिका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दवा अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। AI आधारित प्लेटफॉर्म बड़ी मात्रा में वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण कर संभावित दवा अणुओं की पहचान करने, रोगों से जुड़े जैविक तंत्र को समझने और नए उपचार विकल्प तलाशने में मदद कर सकते हैं।

लेकिन कंप्यूटर मॉडल के जरिए किसी अणु की पहचान करना और उसे वास्तविक मरीजों के उपचार के लिए उपयोगी दवा में बदलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। संभावित दवा की प्रभावशीलता, सुरक्षा और उपयुक्त खुराक का आकलन करने के लिए प्रयोगशाला परीक्षण, प्री-क्लिनिकल अध्ययन और आवश्यकतानुसार मानव क्लिनिकल परीक्षण करना पड़ता है।

वीआईजीओआर कार्यक्रम इसी अंतर को कम करने की दिशा में काम करेगा। पेप्ट्रिस अपने AI आधारित दवा खोज प्लेटफॉर्म के साथ वैज्ञानिक सत्यापन और स्थापित दवा विकास प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करेगी। कंपनी विकास संबंधी गतिविधियों में सहयोग के लिए वैश्विक कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (CRO) नेटवर्क की मदद भी लेगी।

तीन वर्षों में विकास के अगले चरण तक पहुंचाने का लक्ष्य
इस परियोजना में चारों दवा उम्मीदवारों को एक समन्वित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ाने की योजना है। इसके अंतर्गत उन्नत प्री-क्लिनिकल अध्ययन, जांचाधीन नई दवा (IND) के लिए आवश्यक तैयारियां, फॉर्मूलेशन विकास और क्लिनिकल परीक्षण शुरू करने से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं।

इस तरह की परियोजनाओं में पर्याप्त वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि AI से संभावित दवा की पहचान के बाद उसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने और नियामकीय प्रक्रियाओं के अनुरूप विकसित करने में समय, विशेषज्ञता और संसाधनों की जरूरत पड़ती है।

यह पहल उन बीमारियों के लिए नए उपचार विकल्प विकसित करने की संभावनाओं को आगे बढ़ा सकती है, जिनमें चिकित्सा संबंधी जरूरतें अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं। हालांकि, इन दवा उम्मीदवारों की वास्तविक उपयोगिता का पता आगे के परीक्षणों के परिणामों से ही चलेगा।

टीडीबी ने क्या कहा?
टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि फार्मास्युटिकल अनुसंधान में AI का इस्तेमाल नई दवाओं की पहचान और विकास के तरीकों को बदलने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि आशाजनक खोजों को प्रमाणित उपचारों में बदलने के लिए निरंतर निवेश, कठोर वैज्ञानिक मूल्यांकन और व्यवस्थित विकास प्रक्रिया जरूरी है।

उनके अनुसार, RDI फंड के माध्यम से टीडीबी ऐसी प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं को समर्थन दे रहा है, जो नवाचार और क्लिनिकल विकास के बीच की दूरी कम करने में मदद कर सकती हैं। इससे भारत में जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल अनुसंधान और AI आधारित स्वास्थ्य नवाचार की क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

पेप्ट्रिस के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधि के अनुसार, टीडीबी का सहयोग वीआईजीओआर कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और AI से खोजे गए दवा अणुओं को महत्वपूर्ण प्री-क्लिनिकल चरणों तक पहुंचाने में मदद करेगा।

कंपनी का दृष्टिकोण AI आधारित खोज को प्रयोगात्मक सत्यापन और स्थापित दवा विकास प्रक्रियाओं के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य संभावित दवा उम्मीदवारों को आगे के वैज्ञानिक मूल्यांकन और क्लिनिकल विकास के लिए तैयार करना है।

भारत के फार्मा और AI क्षेत्र के लिए क्या मायने हैं?
भारत पहले से ही वैश्विक जेनेरिक दवा उत्पादन और फार्मास्युटिकल विनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अब AI आधारित दवा खोज और अनुसंधान में निवेश बढ़ने से देश के लिए नए चिकित्सकीय उत्पाद विकसित करने की संभावनाएं खुल सकती हैं।

₹172 करोड़ की वीआईजीओआर परियोजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हालांकि, इसकी सफलता केवल AI तकनीक या वित्तीय निवेश से तय नहीं होगी। चारों दवा उम्मीदवारों के परीक्षण परिणाम, सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामकीय मंजूरी यह निर्धारित करेंगे कि इनमें से कौन-सी दवा भविष्य में मरीजों तक पहुंच पाएगी।

Tags :