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भारत स्वस्तिक यात्रा की तुलजापुर में रामकथा ने माँ तुलजा भवानी की आध्यात्मिक विरासत का किया स्मरण

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📍 भोपाल
भारत स्वस्तिक यात्रा की तुलजापुर में रामकथा ने माँ तुलजा भवानी की आध्यात्मिक विरासत का किया स्मरण

महाराष्ट्र के सबसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक में मोरारी बापू की रामकथा में आस्था, धर्म और भारत की चिरंतन आध्यात्मिक परंपराओं पर हुआ चिंतन

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तुलजापुर, महाराष्ट्र, 14 अक्टूबर, 2026। भारत स्वस्तिक यात्रा के अंतर्गत पूज्य मोरारी बापू की रामकथा का आयोजन 14 अक्टूबर को महाराष्ट्र के तुलजापुर में हुआ। इस आयोजन के साथ यात्रा महाराष्ट्र के उस पवित्र केंद्र तक पहुँची, जो राज्य के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में गहराई से रचा-बसा है। प्राचीन तुलजा भवानी मंदिर के लिए प्रसिद्ध तुलजापुर महाराष्ट्र की धार्मिक चेतना में विशेष स्थान रखता है और परंपरागत रूप से आदिशक्ति, अर्थात् दिव्य स्त्री शक्ति की उपासना से जुड़ा हुआ है।

तुलजापुर में आयोजित रामकथा ने सनातन धर्म के साझा मूल्यों के माध्यम से भारत की विविध आध्यात्मिक परंपराओं को जोड़ने के भारत स्वस्तिक यात्रा के व्यापक प्रयास को एक नई दिशा दी। कन्याकुमारी से केदारनाथ की ओर बढ़ती यह यात्रा प्रत्येक पड़ाव पर उन मान्यताओं, पवित्र स्थलों और जीवंत परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रही है, जिन्होंने सदियों से भारत की सभ्यतागत विरासत को आकार दिया है।

इस आध्यात्मिक परिदृश्य में तुलजापुर का विशिष्ट स्थान है। यहाँ की आराध्य देवी माँ तुलजा भवानी को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है। महिषासुर का वध करने वाली महिषासुरमर्दिनी के रूप में उनकी पूजा की जाती है। इस मंदिर को परंपरागत रूप से महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में गिना जाता है। आज भी यहाँ देवी का आशीर्वाद, संरक्षण और शक्ति प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहाँ नवरात्रि का वार्षिक उत्सव क्षेत्र में शक्ति उपासना की जीवंत और चिरस्थायी परंपरा को दर्शाता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ अपने ऐतिहासिक और भक्तिपरक संबंध के कारण भी तुलजापुर का महाराष्ट्र की स्मृतियों में विशेष स्थान है। परंपरागत मान्यता है कि शिवाजी महाराज माँ तुलजा भवानी को अपनी कुलदेवता मानते थे। देवी और शिवाजी महाराज को जोड़ने वाली यह भक्तिपरंपरा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग रही है। यह आस्था, साहस, कर्तव्य और धर्म की रक्षा के संकल्प को एक सूत्र में पिरोती है।

भारत स्वस्तिक यात्रा के अंतर्गत पूज्य मोरारी बापू की ततुलजापुर में उपस्थिति इस बात पर चिंतन का अवसर बनी कि पवित्र स्थल केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते। अपने मंदिरों, कथाओं, तीर्थयात्राओंऔर सामुदायिक परंपराओततुलजापुर में उपस्थिति इस बात पर चिंतन का अवसर बनी कि पवित्र स्थल केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते। अपने मंदिरों, कथाओं, तीर्थयात्राओंऔरधर्म की निरंतर प्रासंगिकता पर होने वाले व्यापक विमर्श से जोड़ना है।

पूज्य मोरारी बापू ने कहा,

“स्वस्तिक यज्ञकुंड मंगल और सामूहिक कल्याण का प्रतीक है, जिसकी विशेषता उसके चार कोनों वाला स्वरूप है। यज्ञकुंड के स्वरूप अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कल्याणकारी स्वस्तिक यज्ञकुंड सबके कल्याण की भावना का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने रामचरितमानस में वर्णित चार मतों—साधु मत, लोक मत, वेद मत और वेदों के सार—की चर्चा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साधु मत को लोक मत से पहले स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि प्रभु श्रीराम के समय में लोक मत के कारण ही माता सीता को दूसरी बार वनवास सहना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग स्मरण कराता है कि जनमत का मार्गदर्शन संतों की विवेकपूर्ण दृष्टि और धर्म के सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने वेद मत और वैदिक ज्ञान के सार की भी चर्चा की, जो हमारी सामूहिक समझ और आचरण का मार्गदर्शन करना चाहिए।

उन्होंने स्वस्तिक के विभिन्न अर्थों और महत्त्व पर विचार करते हुए गोंडल के महाराजा भगवतसिंहजी से जुड़े विश्वकोशीय ग्रंथ ‘भगवद्गोमंडल’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माँ तुलजा भवानी और छत्रपति शिवाजी महाराज के कारण तुलजापुर हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना में विशेष स्थान रखता है। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए शिवाजी महाराज के संकल्प और तलवार के माध्यम से माँ तुलजा भवानी के दिव्य आशीर्वाद से जुड़ी चिरस्थायी परंपरा का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन सिखाता है कि आस्था के साथ साहस, प्रतिबद्धता और अपनी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का उत्तरदायित्व भी आवश्यक है।”

तुलजापुर का पवित्र तीर्थक्षेत्र केवल माँ तुलजा भवानी के मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं है। कल्लोल तीर्थ, गोमुख तीर्थ और पापनाशी तीर्थ यहाँ की पारंपरिक तीर्थयात्रा का हिस्सा हैं। वहीं घाटशिला मंदिर और कालभैरव मंदिर देवी से जुड़ी व्यापक पवित्र परंपराओं तथा रक्षक आध्यात्मिक मान्यताओं को दर्शाते हैं। ये सभी स्थल मिलकर यह बताते हैं कि भारत में तीर्थयात्रा मंदिरों, जलस्रोतों, स्थानीय आख्यानों और अनुष्ठानों को एक परस्पर जुड़ी हुई पवित्र परंपरा में समाहित करती है।

भारत स्वस्तिक यात्रा का आयोजन संतकृपा सनातन संस्थान द्वारा पूज्य मोरारी बापू के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

मिराज ग्रुप के चेयरमैन एवं संतकृपा सनातन संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी मदन पालीवाल ने कहा, “तुलजापुर भारत की आध्यात्मिक विरासत में विशेष स्थान रखता है। माँ तुलजा भवानी की उपासना आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रद्धालुओं को प्रेरित करती आ रही है। भारत स्वस्तिक यात्रा के माध्यम से हमारा प्रयास है कि ऐसे पवित्र स्थलों और उनके द्वारा संरक्षित परंपराओं की ओर अधिक ध्यान आकर्षित किया जाए। साथ ही, हम उन साझा आध्यात्मिक आधारों को पुनः रेखांकित करना चाहते हैं, जो हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़ते हैं।”

यात्रा का केंद्रीय प्रतीक स्वस्तिक मंगल, सद्भाव और सर्वकल्याण का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी चारों भुजाएँ एक साझा केंद्र से जुड़ी होती हैं, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों, परंपराओं और समुदायों को एक साथ लाने के यात्रा के उद्देश्य को सार्थक अभिव्यक्ति देती हैं। इसी भावना के साथ यह यात्रा प्रत्येक पवित्र स्थल की विशिष्ट पहचान को सम्मान देते हुए उन गहरे संबंधों को उजागर करने का प्रयास करती है, जो इन सभी को एक सूत्र में जोड़ते हैं।

भारत स्वस्तिक यात्रा के अंतर्गत लगभग 9,000 किलोमीटर की इस यात्रा में करीब 900 श्रद्धालु पूज्य मोरारी बापू के साथ दो विशेष ट्रेनों—कैलाश भारत गौरव ट्रेन और चित्रकूट भारत गौरव ट्रेन—में यात्रा कर रहे हैं। इन ट्रेनों में क्रमशः 22 और 16 कोच हैं।

पूज्य मोरारी बापू के लिए रामकथा सदैव सत्य, प्रेम और करुणा के मूल्यों को विविध स्थानों और जनसमुदायों तक पहुँचाने का माध्यम रही है। तुलजापुर की रामकथा इसी निरंतर यात्रा का हिस्सा बनी। इसने रामचरितमानस के संदेश को ऐसी भूमि तक पहुँचाया, जिसकी आध्यात्मिक पहचान देवी के प्रति अटूट भक्ति से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है।

यात्रा के दौरान आयोजित रामकथा और अन्य कार्यक्रम सभी के लिए खुले रहेंगे। समावेशिता और सेवा की अपनी परंपरा के अनुरूप, प्रत्येक पड़ाव पर प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जहाँ निःशुल्क शाकाहारी भोजन प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

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